Article: गजब की दोगलापंथी चल रही है भाई | Naya Savera Network
नया सवेरा नेटवर्क
दो राज्य महाराष्ट्र और झारखण्ड के विधानसभा चुनाव इस समय उफान पर है|कुछ राज्यों में उपचुनाव भी हो रहे हैं|सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपने अपने प्रचार में पुरजोर तरीके से लगी हैं|कुछ लोक लुभावने भाषण हो रहे हैं तो कुछ भयावह भी हो रहे हैं|कुछ राष्ट्र और राज्य की उन्नति बात कर रहे हैं तो कुछ जाति और धर्म की उन्नति की बात कर रहे हैं|कुछ शिक्षा स्वास्थ्य की बात कर रहे हैं तो,कुछ विजली पानी सड़क सुरक्षा की बात कर रहे हैं|कुछ दबी जुबान से कभी कभार मंहगाई और रोजगार की भी बात कर रहे हैं|लेकिन खुलकर किसी भी राजनीतिक पार्टी ने यह साहस नहीं दिखाया कि मेरी सरकार बनते ही मंहगाई पर रोंक लगेगी और अधिकाधिक रोजगार देंगे|
इस बार भी चुनाव में मूल मुद्दे गायब हैं|जनता को सिर्फ लालीपाप बाँटा जा रहा है|कोई राशन फ्री का बाँटकर अपनी पीठ थपथपा रहा है|मगर भूल जा रहा है कि मजदूर वर्ग आलसी बन रहा है|वह अब काम नहीं करना चाह रहा है|जिससे खेती का काम मंद पड़ रहा है|लोग अपाहिज बनते जा रहे हैं|लोगों सोंच यह है कि,न हर चलइ न चलइ कुदारी,बइठे भोजन मिलइ सरकारी|लोग जरूरत के हिसाब से मेहनत करते हैं|सबकी मुख्य जरूरत है उदरपूर्ति|जब उदरपूर्ति घर बैठे हो जा रही है तो,काम कौन करेगा|कोई लाडली बहना के नाम से रेवड़ी बाँट रहा है तो कोई बेरोजगारी भत्ता देने की बात कर रहा है|मजे की बात ए है कि रेवड़ी कम ज्यादा सभी बाँट रहे हैं|प्रलोभन सभी दे रहे हैं|लेकिन विरोध भी एक दूसरे की योजनाओं का कर रहे हैं|एक ने तो ऐसा विरोध किया कि सभी अचरज में हैं|वह कह रहा है मुझे जिताइए मैं 1500 की जगह तीन हजार दूँगा|एक तरफ विरोध दूसरी तरफ दोगुना बाटूँगा,गजब की दोगला पंथी है भाई|
हर चुनाव की तरह यह चुनाव भी जाति और धर्म पर ही लड़ा जा रहा है|उसी विषय पर ही वार प्रतिवार हो रहा है|पिछले दिनों आ.शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी ने एक आवाहन किया|कि सभी हिन्दू महाराष्ट्र में महायुती को वोट करें|इस पर महाविकास अघाड़ी वालों पर जैसे बज्रपात हो गया|ऐसी हाय तौबा मचाये कि पूँछों मत|यहाँ तक नसीहत देने लगे कि शंकाराचार्य को राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए|यह बात सुनकर कम से कम मैं अपनी हॕसी नहीं रोक पाया|रोंक इसलिए नहीं पाया कि यही शंकराचार्य 2019 के चुनाव में बनारस से चुनाव लड़ चुके हैं नरेन्द्र मोदी के खिलाफ|तब तो कोई कुछ नहीं बोला क्यों?इसलिए कहना पड़ रहा है कि गजब दोगलापंथी है भाई इस देश में|
इसी चुनाव में महाराष्ट्र उलेमा कांउसिल ने महाविकास अघाड़ी के सामने कुछ शर्तें रखी,जिसे महाविकाश अघाड़ी वालों ने सहर्ष स्वीकार कर ली|जिसमें अधिकाधिक देश विरोधी माँगे थी|फिर भी सत्ता पाने के लिए सभी बातें मान ली|जिसके उपलक्ष्य में उलेमा कांउसिल के मौलवी ने फतवा जारी किया है कि सभी मुसलमान महाविकाश अघाड़ी को ही वोट करेंगे|तब कोई चूँ तक नहीं बोला|ए क्या है,इसे दोगला पंथी न कहें तो और क्या कहें|शंकराचार्य ने आवाहन किया तो धर्मवादी हो गया|और उलेमाओं ने किया तो धर्मनिर्पेक्ष|इसीलिए कहना पड़ रहा है कि गजब की दोगला पंथी चल रही है भाई इस देश में|
वो संविधान में जबरी 370 ,35 ए,पर्सनल ला बोर्ड,वक्फ बोर्ड,आदि घुसेड़ दिये तो संविधान सुरक्षित था|ये उसे धीरे धीरे निकाल रहे हैं तो संविधान खतरे में कैसे पड़ रहा|वो संविधान में निहित सी ए ए,एन आर सी,और यू सी सी,लागू नहीं किये,उल्टे अनाप शनाप ठूँस दिए,तब संविधान खतरे में नहीं था|ये संविधान में निहित बातें लागू कर रहे हैं तो संविधान खतरे में पड़ जा रहा है|
वो हिन्दू कोड बिल और पर्सनल ला ठूँस दिए,तब संविधान खतरे में नहीं था|ए तीन तलाक निकाल दिए तो संविधान खतरे में पड़ रहा है| इसलिए कहना पड़ रहा है कि गजब की दोगला पंथी चल रही है भाई इस देश में|
लब्बो लुवाब ए कि हम करें तो रासलीला तुम करो चरित्रहीन,यह कहावत आज के हमारे कर्णधार नेतागण पूरी निष्ठा से चरितार्थ कर रहे हैं|हिन्दूवादी संगठन या पार्टी यदि हिन्दू एकता की बात करें तो वो बात धर्मवादी हो जाती है|वही मुस्लिम संगठन व मुस्लिम समर्थित पार्टियाँ मुस्लिम एकता की बात करें तो, वह धर्मनिरपेक्ष कैसे होता है,यह बात आज तक नहीं समझ पाया|हिन्दू जय श्रीराम हरहर महादेव कहे तो हिंसक होता है|मुस्लिम नारे तकबीर अल्ला हूँ अकबर कहके तलवार लहराये तो वह शांति दूत कैसे हो जाता है,यह भी बात आज तक समझ से परे ही है|एक कह रहा है 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो,हम हिन्दुओं को निपटा देंगे|यह शांति की और प्रेम की भाषा है|एक कह दिया कि मुझे 5 मिनट दे दो तो वह मारकाट की भाषा कैसे हो गई|एक मौलवी चीख चीख कर कह रहा है कि जिस दिन मुसलमान सड़क पर उतरेगा,उस दिन हिन्दूओं को छिपने की जगह नहीं मिलेगी|उसके जवाब में जब एक संत ने कहा तो व हिंसक कैसे हो गया|एक तरफ जैसे ही कोई उनकी सही बात बताता है,उसका शर तन से जुदा करने के लिए मौलवियों द्वारा फतवा और इनाम घोषित किया जाता है,सब मौन रहते हैं|लेकिन वहीं जब हिन्दू देवी देवताओं का अपमान विधर्मियों द्वारा किया जाता है|और कोई संत उस पर आपत्ति जताता है तो वह हिंसक और उपद्रवी कहा जाता है|ऐसी दोगला पंथी लोग लाते कहाँ से हैं|मेरे उपरोक्त लेख का यही मतलब है|जब संविधान में समान रूप से सबको जीने रहने खाने का अधिकार दिया गया है तो,पर्सनल ला और एस एसी एस टी जैसा प्रावधान क्यों?| एक ही देश में अलग अलग कानून क्यों?इंसान की एक समान गलती के लिए अलग अलग विधान क्यों?इसलिए मेरा तो कथन बस इतना है कि--
न बात ईश्वर की हो न अल्लाह की|
न बात हिन्दू की हो न मुसलमान की||
सिक्ख की हो न ईसाई की न जाति की|
बात हो तो केवल बस केवल इन्सान की||
तभी सही मायने में धर्मनिरपेक्षता और जाति निरपेक्षता कही जायेगी मानी जायेगी|जब इस देश में बहुधर्मी लोग रहते हैं|और उसी में कोई एक धर्म को चिन्हित कर उत्पात करेगा|तो वार प्रतिवार होता ही है|तब एक पक्षीय बात करना बेमानी है|और तभी कहना पड़ रहा है कि गजब की दोगला पंथी चल रही है भाई इस देश में|
पं.जमदग्निपुरी



