ग़ज़ल: अगर कोई तुम्हें विस्तार देगा | #NayaSaveraNetwork
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ग़ज़ल
अगर कोई तुम्हें विस्तार देगा
वो अपनी शर्त का संसार देगा
बड़ा बरगद जो जीवन दे रहा है
न जाने कौन सा आकार देगा
दिखावा झूठ पागलपन की हद तक
तुम्हारी चेतना को मार देगा
तुम उसके काम आ जाओ तो पहले
वही अब बाद में दुत्कार देगा
मुनाफा चाहिए हर हाल उसको
नये ऑफर नया व्यापार देगा
ये बातें धर्म की और इसमें नफ़रत
थमा वो हाथ में तलवार देगा
बनाने लग गये बारूद ज़्यादा
धुआँ किस नींव को आधार देगा
समा जाती है दहशत आँख में ही
धमाका किस तरह का प्यार देगा
वंदना, अहमदाबाद