आज का राशिफल | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आप का आज का दिन मिश्रित फलदायी है। दिन के पूर्वार्ध में सेहत में गिरावट आने से बेचैनी बढ़ेगी। बीमारी पर आकस्मिक खर्च होगा। आज मनोकामना पूर्ति में कुछ ना कुछ बाधा अवश्य आएगी। भाई-बंधुओ के बीच मनमुटाव हो सकता है। अपनी वाणी एवं व्यवहार में सावधानी बरतें। जमीन-जायदाद सम्बंधित कार्यो को फिलहाल स्थगित करें। अनापेक्षित यात्रा से थकान बढ़ेगी। धन की उधारी आज ना करें। मध्यान बाद का समय दिन की अपेक्षा बेहतर रहेगा। व्यवसाय अथवा घरेलू सम्बन्धो से धन की प्राप्ति होगी। महिलाये स्पष्ट बोलने के कारण अन्य लोगो को अखरेगी।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आप आनंद मनोरंजन में बितायेंगे। पूर्व में किये गए प्रयास आज सफल होने से मानसिक शांति मिलेगी। नए कार्य अनुबंधों की योजना तैयार रखें शीघ्र ही इसपर कार्य आरम्भ करना पड़ेगा। आज पूँजी निवेश भविष्य के लिए उत्तम रहेगा। प्रेम प्रसंगों में निकटता का अनुभव होगा लेकिन दूर रहने वाले रिश्तेदारों एवं आसपडोसियो से संबंध सामान्य नही रहेंगे। महिलाओ को भी धन सम्मान का लाभ मिलेगा संध्या बाद का समय परिजनों के साथ शांति से व्यतीत होगा। लंबी दूरी की यात्रा आज ना करें लाभ की जगह खर्च होगा साथ ही चोटादि का भय भी रहेगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए हानिकर रहेगा। पूर्व में किये निवेश का लाभ नहीं मिलने से निराश होंगे। महत्त्वपूर्ण कार्य अधूरे रहने से आर्थिक समस्या खड़ी होगी। प्रतिस्पर्धा अधिक रहने से कार्य क्षेत्र पर मंदी का सामना करना पड़ेगा। कमीशन के कार्यो से मध्यम लाभ होगा। पारिवारिक वातावरण आज घरेलू कलह से अशांत रहेगा अपनी गलती ना मानने से मतभेद के लंबे खिंचने के आसार है। आसपडोसियो से भी तकरार होने की संभावना है। संध्या के बाद थोड़ी बहुत शांति मिलेगी फिर भी आज के दिन मौन धारण करने से कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाएगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन आकस्मिक फायदे कराने वाला रहेगा। आज आप किसी से अधिक व्यवहार करना पसंद नहीं करेंगे इससे कई समस्याओं से भी बचे रहेंगे। सामाजिक क्षेत्र पर भी आज आपके योगदान की प्रशंसा होगी। वरिष्ठ जनो के साथ नविन संपर्क बनेंगे संध्या के समय व्यवसाय में तेजी आने से धन की आमद आशा से अधिक रहेगी। स्त्री-पुत्र से भी आज लाभदायक समाचार मिल सकते है। विपरीत लिंगीय आकर्षण आज कम रहेगा। संध्या बाद का समय मनोरंजन में व्यतीत करेंगे लंबी यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। महिलाओ की मांगे तुरंत पूरी करें अन्यथा परेशानी होगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आप शारीरिक एवं मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रहेंगे। परिवार के प्रति आज अधिक संवेदनशील रहेंगे फिर भी सभी को एक साथ प्रसन्न नही रख पाएंगे। कार्य व्यवसाय में मध्यान के बाद ही संतोषजनक लाभ होगा।। आज मनोरंजन एवं आराम में अधिक समय बितायेंगे मौज शौक के साथ ही घरेलू सुख सुविधा जुटाने पर भी खर्च होगा। धार्मिक स्थानों के पर्यटन का अवसर मिलेगा। परिजनों के साथ धार्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। महिलाये आज कामना पूर्ति ना होने पर कुंठित मन से कार्य करेंगी। बुजुर्ग आपके व्यवहार से आहत होंगे विवेकी व्यवहार अपनाएं।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन भाग्योदयकारक रहेगा।
व्यवसाय के साथ ही सामाजिक दृष्टिकोण से भी दिन लाभदायी रहेगा। आज आपको प्रत्येक कार्य का शुभफल प्राप्त होगा। व्यापार में मनोवांछित सफलता मिलने से मन हर्षित रहेगा पुराने कार्यो से धन लाभ होगा नए सौदे भी हाथ लगेंगे परन्तु इनपर कार्य आरंभ आज नही हो सकेगा। आज सांसारिक सुख सुविधाओं की वस्तुएं संकलित करने पर धन खर्च होगा। विवाहोत्सुकों के लिए योग्य साथी की तलाश पूरी हो सकती है महिलाये आज स्वयं की गलती के कारण परेशान रहेंगी। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति सहज होगी। मनोरंजन के अवसर मिलेंगे।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आपका मन अनिर्णय की स्थिति में रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में प्रत्येक कार्य सोच विचार कर करें। नए कार्य का आरम्भ आज करना उचित नहीं। कार्य अधूरे रहेंगे गलत निर्णय के कारण हानि होने की संभावना भी है। परिवार के बुजुर्गो अथवा कार्य क्षेत्र में अधिकारियो के साथ मनमुटाव हो सकता है। महिलाये घर एवं बाहर की जिम्मेदारियों में आज लापरवाही करेंगी जिससे अव्यवस्था बढ़ेगी। क्रोध एवं वाणी में संयम रखकर आज का दिन शांति से बिताना ही हितकर रहेगा। संध्या के बाद सम्बन्धो को लेकर ज्यादा सतर्क रहें।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन व्यावसायिक दृष्टिकोण से आपके लिए लाभदायक रहेगा। आज के दिन आप अपनी वाकपटुता और मीठी वाणी से लाभप्रद व्यापारिक सम्बंध विकसित कर सकेंगे सार्वजनिक क्षेत्र पर आपको किसी आयोजन में आमंत्रित किया जा सकता है परन्तु सतर्क रहें खुशनुमा माहौल किसी से कहा सुनी होने पर प्रतिष्ठा में कमी आ सकती है। आज आप में वैचारिक निखार आएगा लोगो की मदद भी बिना विचार करेंगे। परिजनों से सम्बन्ध मधुर रहेंगे स्त्री वर्ग किसी कारण से केवल दिखावे के लिए नाराज होंगी। शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहेंगे। पुत्र से मतभेद हो सकते है।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन भी आपके लिए अधिक परिश्रम वाला रहेगा। घरेलु कार्यो एवं व्यवसाय के बीच आज तालमेल बैठाना परेशानी भरा रहेगा सहकर्मियों से नाराजगी के चलते कार्य पूर्ण तो होंगे परन्तु कुछ ना कुछ त्रुटि बनी रहेगी। दैनिक कार्यो में विलंब होने से सारे दिन की बनी बनाई योजना चौपट हो सकती है। आलस्य को त्याग लक्ष्य पर ध्यान लगाए थोडे विलम्ब से ही सही सफलता अवश्य मिलेगी। परिजनों के साथ नरमी बरतें। महिलाये आज ज्यादा भावुक रहेंगी मामूली बातो को दिल पर ले लेगी। धर्म कर्म में निष्ठा रहने पर भी कम समय देंगे तंत्र मंत्र में प्रयोग करेंगे।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपको मिला जुला फल देने वाला रहेगा। आज आप पुराने कार्यो को विराम दे नए अनुबंध हाथ में लेने के प्रयास करेंगे परंतु इसमें कई व्यवधान आ सकते है प्रयासरत रहें सफलता अवश्य मिलेगी। नौकरी पेशा जातको को आज अतरिक्त कार्य करने पर परेशानी होगी लेकिन इसका शुभ फल भी मिलेगा। आर्थिक प्रयोजन में विलम्ब होगा फिर भी आवश्यकता से अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे अनैतिक कार्यो से आज बचकर रहें हानि हो सकती है। परिजनों में किसी ना किसी से वैचारिक मतभेद रहेंगे। महिला वर्ग काम के बोझ से अस्वस्थ हो सकती है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन विपरीत फल प्रदान करने वाला है। आज दिन भर सतर्क रहने की आवश्यकता है। सेहत नरम रहने से स्वभाव मे चिढ़चिढ़ापन आएगा फलस्वरूप किसी प्रियजन से मन मुटाव के प्रसंग बनेंगे। आर्थिक कारणों से चिंता बैचेनी रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज मन नहीं लगेगा। आज कानूनी उलझनों में फंसने की संभावना है। महिलाये आज दयनीय स्थिति से गुजरेंगी अनावश्यक परेशान ना करें। आध्यत्म से जुड़ने पर मानसिक शांति मिल सकती है। संतानो के विषय मे भी आज कोई अशुभ समाचार मिलने की सम्भावना है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आप के मन के अनुरूप रहेगा। आज दिखावे आडंबर पर अधिक खर्च करेंगे। मौज-शौक मनोरंजन में दिन का अधिकांश समय व्यतीत होगा। कार्य व्यवसाय में आज आशा से अधिक धन लाभ होगा लेकिन हाथ खुला रहने से बचत मुश्किल से ही कर पाएंगे। प्रतिस्पर्धा भी अधिक रहने से दिमागी कसरत करनी पड़ेगी। सामाजिक स्तर पर आज आपकी छवि धनवानों जैसी रहेगी महिलाये आज इसके विपरीत कंजूसी करेंगी संचय को ज्यादा महत्त्व देंगी। बुजुर्गो का सम्मान करें उनकी आवश्यकताओं पर भी ध्यान दें अन्यथा नई समस्या खड़ी हो सकती है। सेहत सामान्य रहेगी।
🌞 ~ वैदिक पंचांग ~ 🌞
दिनांक -26 अगस्त 2024 दिन - सोमवार
विक्रम संवत - 2081 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2080)
शक संवत -1946
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद ॠतु
मास - भाद्रपद (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)
पक्ष - कृष्ण
तिथि - अष्टमी 27 अगस्त रात्रि 02:19 तक तत्पश्चात नवमी
नक्षत्र - कृत्तिका शाम 03:55 तक तत्पश्चात रोहिणी
योग - व्याघात रात्रि 10:17 तक तत्पश्चात हर्षण
राहुकाल - सुबह 07:56 से सुबह 09:30 तक
सूर्योदय -06:21
सूर्यास्त- 18:58
दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
व्रत पर्व विवरण - श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌞 ~ वैदिक पंचांग ~ 🌞
जन्माष्टमी पर कृष्ण भगवान को इन नामो से करे प्रणाम प्रत्येक क्षेत्र मे बढेगी तरक्की⤵️
श्रीकृष्ण-जन्माष्टमीव्रत की कथा एवं विधि 🌷
➡ 26 अगस्त 2024 सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है।
भविष्यपुराण उत्तरपर्व अध्याय – २४
राजा युधिष्ठिर ने कहा – अच्युत ! आप विस्तार से (अपने जन्म-दिन) जन्माष्टमी व्रत का विधान बतलाने की कृपा करें |
भगवान् श्रीकृष्ण बोले – राजन ! जब मथुरा में कंस मारा गया, उस समय माता देवकी मुझे अपनी गोद में लेकर रोने लगीं | पिता वसुदेवजी भी मुझे तथा बलदेवजी आलिंगन कर गद्गदवाणी से कहने लगे – ‘आज मेरा जन्म सफल हुआ, जो मैं अपने दोनों पुत्रों को कुशल से देख रहा हूँ | सौभाग्य से आज हम सभी एकत्र मिल रहे हैं |’ हमारे माता-पिता को अति हर्षित देखकर बहुत से लोग वहाँ एकत्र हुए और मुझसे कहने लगे – ‘भगवन ! आपने बहुत बड़ा काम किया, जो इस दुष्ट कंसको मारा | हम सभी इससे बहुत पीड़ित थे | आप कृपाकर यह बतलाये कि आप माता देवकी के गर्भ से कब आविर्भूत हुए थे ? हम सब उस दिन महोत्सव मनाया करेंगे | आपको बार-बार नमस्कार है, हम सब आपकी शरण में हैं | आप हम पर प्रसन्न होइये | उस समय पिता वसुदेवजी ने भी मुझसे कहा था कि अपना जन्मदिन इन्हें बता दो |’
तब मैंने मथुरानिवासी जनों को जन्माष्टमी व्रत का रहस्य बतलाया और कहा – ‘पुरवासियों ! आपलोग मेरे जन्म दिन को विश्व में जन्माष्टमी के नाम से प्रसारित करें | प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति को जन्माष्टमी का व्रत अवश्य करना चाहिये | जिस समय सिंह राशि पर सूर्य और वृषराशिपर चन्द्रमा था, उस भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में मेरा जन्म हुआ | वसुदेवजी के द्वारा माता देवकी के गर्भ से मैंने जन्म लिया | यह दिन संसार में जन्माष्टमी नाम से विख्यात होगा | प्रथम यह व्रत मथुरा में प्रसिद्ध हुआ और बाद में सभी लोकों में इसकी प्रसिद्धी हो गयी | इस व्रत के करने से संसार में शान्ति होगी, सुख प्राप्त होगा और प्राणिवर्ग रोगरहित होगा |’
महाराज युधिष्ठिर ने कहा – भगवन ! अब आप इस व्रत का विधान बतलाये, जिसके करने से आप प्रसन्न होते हैं |
भगवान श्रीकृष्ण बोले – महाराज ! इस एक ही व्रत के कर लेने से सात जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं | व्रत के पहले दिन दंतधावन आदि करके व्रत का नियम ग्रहण करें | व्रत के दिन मध्यान्ह में स्नान कर माता भगवती देवकी का एक सूतिका गृह बनाये | उसे पद्मरागमणि और वनमाला आदिसे सुशोभित करें | गोकुल की भांति गोप, गोपी, घंटा, मृदंग, शंख और मांगल्य-कलश आदिसे समन्वित तथा अलंकृत सुतिका-गृह के द्वारपर रक्षा के लिए खणग, कृष्ण छाग, मुशल आदि रखे | दीवालों पर स्वस्तिक आदि मांगलिक चिन्ह बना दें | षष्ठीदेवी की भी नैवेद्य आदि के साथ स्थापना करें | इस प्रकार यथाशक्ति उस सूतिकागृह को विभूषितकर बीच में पर्यंक के ऊपर मुझसहित अर्धसुप्तावस्थावाली, तपस्विनी माता देवकी की प्रतिमा स्थापित करें | प्रतिमाएँ आठ प्रकार की होती हैं –स्वर्ण, चाँदी, ताम्र, पीतल, मृत्तिका, काष्ठ की मणिमयी तथा चित्रमयी | इनमे से किसी भी वस्तुकी सर्वलक्षणसम्पन्न प्रतिमा बनाकर स्थापित करें | माता देवकी का स्तनपान करती हुई बालस्वरूप मेरी प्रतिमा उनके समीप पलंग के ऊपर स्थापित करें | एक कन्या के साथ माता यशोदा की प्रतिमा भी वहां स्थापित की जाय | सूतिका-मंडप के ऊपर की भित्त्तियों में देवता, ग्रह, नाग तथा विद्याधर आदि की मूर्तियाँ हाथोसे पुष्प-वर्षा करते हुए बनाये | वसुदेवजी को सूतिकागृह के बाहर खणग और ढाल धारण किये चित्रित करना चाहिये | वसुदेवजी महर्षि कश्यप के अवतार हैं और देवकी माता अदितिकी | बलदेवजी शेषनाग के अवतार हैं, नन्दबाबा दक्षप्रजापति के, यशोदा दिति की और गर्गमुनि ब्रह्माजी के अवतार हैं | कंस कालनेमिका अवतार है | कंस के पहरेदारों को सूतिकागृह के आस-पास निद्रावस्था में चित्रित करना चाहिये | गौ, हाथी आदि तथा नाचती-गाती हुई अप्सराओं और गन्धर्वो की प्रतिमा भी बनाये | एक ओर कालिया नाग को यमुना के ह्रदय में स्थापित करें |
इसप्रकार अत्यंत रमणीय नवसुतिका-गृह में देवी देवकी की स्थापनकर भक्ति से गंध, पुष्प, अक्षत, धूप, नारियल, दाडिम, ककड़ी, बीजपुर, सुपारी, नारंगी तथा पनस आदि जो फल उस देशमें उससमय प्राप्त हों, उन सबसे पूजनकर माता देवकी की इसप्रकार प्रार्थना करे –
गायभ्दि: किन्नराध्यै: सततपरिवृता वेणुवीणानीनादै भृंगारादर्शकुम्भप्रमरकृतकरै: सेव्यमाना मुनीन्द्रै: |
पर्यन्गे स्वास्तृते या मुदित्ततरमना: पुत्रिणी सम्यगास्ते सा देवी देवमाता जयति सुवदना देवकी कान्तरूपा ||
‘जिनके चारों ओर किन्नर आदि अपने हाथों में वेणु तथा वीणा-वाद्यों के द्वारा स्तुति-गान कर रहे हैं और जो अभिषेक-पात्र, आदर्श, मंगलमय कलश तथा चँवर हाथों में लिए श्रेष्ठ मुनिगणोंद्वारा सेवित हैं तथा जो कृष्ण-जननी भलीभांति बिछे हुए पलंगपर विराजमान हैं, उन कमनीय स्वरुपवाली सुवदना देवमाता अदिति-स्वरूपा देवी देवकी की जय हो |’
उससमय यह ध्यान करें कि कमलासना लक्ष्मी देवकी के चरण दबा रही हो | उन देवी लक्ष्मी की – ‘नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम: |’ इस मन्त्र से पूजा करे | इसके बाद ‘ॐ देवक्यै नम:, ॐ वासुदेवाय नम:, ॐ बलभद्राय नम:, ॐ श्रीकृष्णाय नम:, ॐ सुभद्रायै नम:, ॐ नन्दाय नम: तथा ॐ यशोदायै नम:’ – इन नाम-मन्त्रों से सबका अलग-अलग पूजन करें |
कुछ लोग चन्द्रमा के उदय हो जानेपर चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान कर हरि का ध्यान करते हैं, उन्हें निम्नलिखित मन्त्रों से हरि का ध्यान करना चाहिये –
अनघं वामनं शौरि वैकुण्ठ पुरुषोत्तमम |
वासुदेवं हृषीकेशं माधवं मधुसूदनम ||
वाराहं पुण्डरीकाक्षं नृसिंहं ब्राह्मणप्रियम |
दामोदरं पद्यनाभं केशवं गरुड़ध्वजम |
गोविन्दमच्युतं कृष्णमनन्तमपराजितम |
अघोक्षजं जगद्विजं सर्गस्थित्यन्तकारणम |
अनादिनिधनं विष्णुं त्रैलोक्येश त्रिविक्रमम |
नारायण चतुर्बाहुं शंखचक्रगदाधरम |
पीताम्बरधरं नित्यं वनमालाविभूषितम |
श्रीवत्सांग जगत्सेतुं श्रीधरं श्रीपति हरिम || (उत्तरपर्व ५५/४६ – ५०)
इन मन्त्रों से भगवान् श्रीहरि का ध्यान करके ‘योगेश्वराय योगसम्भवाय योगपतये गोविन्दाय नमो नम:’ – इस मन्त्र से प्रतिमा को स्नान कराना चाहिये | अनन्तर ‘यज्ञेश्वराय यज्ञसम्भवाय यज्ञपतये गोविन्दाय नमो नम:’ – इस मंत्रसे अनुलोपन, अर्घ्य, धूप, दीप आदि अर्पण करें | तदनंतर ‘विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नम: |’ इस मन्त्र से नैवेद्य निवेदित करें | दीप अर्पण करने का मन्त्र इसप्रकार हैं – धम्रेश्वराय धर्मपतये धर्मसम्भवाय गोविन्दाय नमो नम: |’
इसप्रकार वेदी के ऊपर रोहिणी-सहित चन्द्रमा, वसुदेव, देवकी, नन्द, यशोदा और बलदेवजी का पूजन करें , इससे सभी पापों से मुक्ति हो जाती हैं | चंद्रोदय के समय इस मन्त्र से चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करें –
क्षीरोदार्नवसम्भूत अत्रिनेत्रसमुद्भव |
गृहनार्घ्य शशाकेंदों रोहिण्या सहितो मम || (उत्तरपर्व ५५/५४)
आधी रात को गुड और घी से वसोर्धारा की आहुति देकर षष्ठीदेवी की पूजा करे | उसी क्षण नामकरण आदि संस्कार भी करने चाहिये | नवमी के दिन प्रात:काल मेरे ही समान भगवती का भी उत्सव करना चाहिये | इसके अनन्तर ब्राह्मणों को भोजन कराकर ‘कृष्णो में प्रीयताम’ कहकर यथाशक्ति दक्षिणा देनी चाहिये |
धर्मनंदन ! इसप्रकार जो मेरा भक्त पुरुष अथवा नारी देवी देवकी के इस महोत्सव को प्रतिवर्ष करता हैं, वह पुत्र, सन्तान, आरोग्य, धन-धान्य, सदगृह, दीर्घ आयुष्य और राज्य तथा सभी मनोरथों को प्राप्त करता हैं | जिस देशमें यह उत्सव किया जाता है, वहाँ जन्म-मरण, आवागमन की व्याधि, अवृष्टि तथा ईति-भीती आदि का कभी भय नहीं रहता | मेघ समयपर वर्षा करते हैं | पांडूपुत्र ! जिस घर में यह देवकी-व्रत किया जाता हैं, वहाँ अकालमृत्यु नहीं होती और न गर्भपात होता हैं तथा वैधव्य, दौर्भाग्य एवं कलह नहीं होता | जो एक बार भी इस व्रत को करता हैं, वह विष्णुलोक को प्राप्त होता है | इस व्रत के करनेवाले संसार के सभी सुखों को भोगकर अंत में विष्णुलोक में निवास करते हैं |
इति श्री भविष्यपुराण का उत्तरपर्व का चौवीसवाँ अध्याय समाप्त हुआ |
वैभव कुंज शुकतीर्थ
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