#Article: कांग्रेस और उसके सिद्धांत | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
कांग्रेस का अस्तित्व मुख्यतः इन तीन बातों पर टिका हुआ है।हिंदू विरोध, मुस्लिम परस्ती तथा परिवारवाद।इन तीनों को छोड़ देने पर कांग्रेस स्वतः ही समाप्त हो जायेगी।इसका धर्म निरपेक्षता का लबादा मात्र दिखावे या कहने भर के लिए ही है।इससे इसका दूर-दूर तक कोई संबंध ही नहीं है।यदि धर्म निरपेक्षता का मतलब सभी धर्मों को समान नजर से देखना है तो यहां भी कांग्रेस की करनी-कथनी में जमीन- आसमान का अंतर सदैव दृष्टिगोचर होता आया है।इतिहास साक्षी है,यह मात्र केवल एक पक्ष,वह भी मुस्लिम पक्ष की हर जायज तो ठीक है,हर नाजायज बातों का भी बड़ी मजबूती के साथ समर्थन करती आई है।चाहे देश हो या विदेश,मुस्लिमों के अनुचित व्यवहार की निंदा न करके,उनका समर्थन करती रहती है।दुनिया में अथवा अपने ही देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर नहीं बोल सकती,क्योंकि यह इसकी विचारधारा के विपरीत और इसके अस्तित्व के लिए खतरा है।
यह हर जगह इस्लामी कट्टरवाद का समर्थन,मूक समर्थन करती नजर आती है।यही बात इसके गांधीवाद पर भी कही जा सकती है।इसकी विचारधारा में गांधीवाद नामक चीज कैसे हो सकती है?आज जब पूरी दुनिया इस्लामी कट्टरवाद से त्रस्त है तो यहां गांधीवाद का कोई मतलब ही नहीं समझ में आता।इस्लाम अपने को सभी वादों से ऊपर केवल और केवल "इस्लामवाद" ही मानता है,लेकिन कांग्रेस अपने को एकमात्र गांधीवादी विचारधारा की वाहक,पोषक मानते हुए पूरी दुनिया में अपना "कॉलर टाइट" करके घूमती रहती है।इसका गांधीवाद आज की दुनिया में निष्प्राण नजर आता है।
कांग्रेस के समर्थक अथवा इसके नेता कांग्रेस की इन्हीं मूल बातों,सिद्धांतों का मात्र सत्ता के लिए आंख बंद करके समर्थन करते आ रहे हैं।जिस दिन इनका स्वाभिमान जागा,हिंदुत्व की बात किए और इस्लामी कट्टरवाद का विरोध किया,उस दिन ऐसे लोग कांग्रेस में रहने की योग्यता खो देंगे।अतः यह कहना उचित ही होगा कि, "इसमें रहने वाले वाकई हिंदू नहीं हो सकते।"कांग्रेस की नीतियां,आदर्श,सिद्धांत एक खुली पुस्तक की तरह हैं।इसमें तर्क-वितर्क जैसी कोई बात मेरी समझ में तो नहीं आती।
निःसंदेह उपरोक्त बातें मैने अपनी सोच के आधार पर लिखी हैं।यह मेरा निजी मत हो सकता है।इससे कोई भी असहमत हो सकता है।विरोध तो स्वाभाविक है।
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