#Poetry : डागडरवा त बनि गइल कसाई पिया | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
डागडरवा त बनि गइल कसाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न ।।
मनले मनउती हजार,
भरल गोदिया तब हमार,
कहवाँ भूल भइल, समझ में न आई पिया,
का तोहइं बताई पिया न ।।
सगरे दुख से रखलीं दूर,
बना अँखिया क नूर,
भले गहना मोर सब गइल बिकाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न ।
भइल तनिक सा बोखार,
लइके भागे हम बजार,
गोड़ पकड़ि कहे,"जल्दी द्या दवाई " पिया
का तोहइं बताई पिया न ।।
कहेसि हमसी डागडरवा,
पइसा लावा जा के घरवा,
हमके आइ गइल जोर कइ रोवाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न ।।
ललना मोर कुम्हिलात,
हमरा कुछुवउ ना सुझात,
यहरी-वहरी भागी छतिया से लगाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न।
भर्ती कइके अस्पताल,
सोचे, निक होइ जइहैं लाल,
मंगलसूत्र बेचि दिहेसि तोर लुगाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न ।।
पइसा लइके लउटे राती,
फाटि गइल हमरी छाती,
मोर करेजा हमसी किहेन बेवफाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न ।।
जल्दी आवा हे सजन,
बोलत बाएन ना ललन,
'सॉरी' कहिके डागडरवा ग बिलाई पिया,
का तोहइं बताई पिया न।
जेकरा पाले दिन-रात,
हमसी करइँ नाहीं बात,
अपने करेजवा क कइसे हम जराई पिया?
का तोहइं बताई पिया न ।।
सुरेश मिश्र



