#Poetry: इहां कजरी से गउवां गुलजार बा | #NayaSaveraNetwork
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इहां कजरी से गउवां गुलजार बा
जिया बेकरार पिया न
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इहां कजरी से गउवां गुलजार बा,
जिया बेकरार पिया न ।
मन मयूर मगन मोर,
मस्ती मा मचाए शोर,
मेघ मचलि-मचलि गावेला मल्हार पिया,
जिया बेकरार पिया न।
झूलइं झुलना झकझोर,
गोरी गावइं गहिके डोर,
झांकइं झड़ियन से बुढ़वन बिमार पिया
जिया बेकरार पिया न।
धानी-धानी धारे धरती,
धन्य-धन्य भइल परती,
धनुष धारे मेघ बरसे धुआंधार पिया
जिया बेकरार पिया न।
नैन कजरा कइ कटारी,
कुहुंके कामिनी कुंवारी,
कारी कोयल कजरी सुनि के माने हार पिया
जिया बेकरार पिया न।
विरह व्यथा मा बेचारी,
रोवे रात-रात नारी,
बेकरारी बढ़ल दिल बा तार-तार पिया
जिया बेकरार पिया न।
पोर-पोर परपराए,
नैना निंदिया न आए,
केकरा कही, काम करेला प्रहार पिया
जिया बेकरार पिया न।
दिया देत अहइ साथ,
दुनहूं जरी रात-रात,
मुला हमरा त दिनवउ अंगार पिया
जिया बेकरार पिया न।
जोही जोरि-जोरि हाथ,
कब बोलइब्या जगन्नाथ,
भइल जिनगी हमार जार-जार पिया
जिया बेकरार पिया न।
ताना तोरइं रोज सासू,
हमरी देखि-देखि आंसू,
लागे लग्गा से लिखल अहइ लिलार पिया
जिया तार-तार पिया न।
कब ले किरकिरी करइब्या,
कंत कहिया गांउ अइब्या,
कागा कांव-कांव करत बा दुआर पिया
जिया बेकरार पिया न।
हारि गए हम हुजूर,
हमसी होइगा कऽ कसूर?
हिया होत बा हलाल अबकी बार पिया
जिया बेकरार पिया न।
केकरा बिन करी सिंगार,
एतना जिनि सतावा यार,
नाहीं हमहूं हेरब नदी अउ इनार पिया
जिया बेकरार पिया न।
सही सावनी कलेश,
समझि सकइं ना सुरेश,
सखि सेजरिया लागे हमइ जस कटार पिया
जिया बेकरार पिया न।
इहां कजरी से गउवां गुलजार बा,
जिया बेकरार पिया न ।
सुरेश मिश्र



