#Poetry: महादेवी निराला बच्चन की | #NayaSaveraNetwork
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महादेवी निराला बच्चन की
कविताओ का सुंदर उद्गम,
गंगा यमुना और सरस्वती का,
जग विख्यात जहां संगम।
है ऋषियों की यह तपोभूमि,
यहां यज्ञ विधा का हुआ निर्गम,
हरि चरणों के आश्रित होकर,
है खड़ा अक्षय वट अति दुर्गम।
है तीर्थों का राजा प्रयाग,
जहां कलकल ध्वनियों का सरगम,
पटरानी हैं जो सप्तपुरी,
उनका ये राजा है अनुपम।
ब्रह्मा की पड़ी पहली आहुति ,
जिसके अधिष्ठाता विष्णु स्वयं,
जहां माघ मास में प्रति संवत ,
संतो का होता है सत्संग,
है तीर्थो का राजा प्रयाग,
जहां कलकल ध्वनियों का सरगम।
अनामिका तिवारी" अन्नपूर्णा"


