महाराष्ट्र: मतदान के साथ बढ़ा 'संशय' | #NayaSaveraNetwork



  • गढ़चिरौली-चिमूर में सर्वाधिक, दक्षिण मुंबई में न्यूनतम मतदान

अजीत कुमार राय / जागरूक टाइम्स
मुंबई। महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव पांच चरणों में समाप्त हो चुका है। अब राज्य की 48 लोकसभा सीटों पर कहां कितना मतदान हुआ इसके बारे में चुनाव आयोग ने अहम जानकारी शेयर की है। लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में कुल मतदान में बढ़ोतरी देखी गई है। कई लोकसभा सीटों पर मतदान में भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं ऐसी कुछ ही सीटें हैं जहां मतदान कम दर्ज किया गया है। अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या भी बढ़ी है। वोटिंग प्रतिशत का बढ़ना-घटना अंतिम नतीजों के लिहाज से अहम है। महाराष्ट्र में मतदान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिवसेना और एनसीपी में विभाजन के बाद यह पहला चुनाव था। 

इस चुनाव में यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता का जनादेश किस राजनीतिक दल को मिल रहा है। महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीटें हैं जो यूपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी सीट हैं। महाराष्ट्र में पांच चरणों में हुए चुनाव में 61.3% मतदान हुआ। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम ने कहा कि इस चुनाव में राज्य का औसत 2019 के चुनावों की तुलना में 0.6% बेहतर था। “अगर हम पांचवें चरण को देखें, तो हम पिछले लोकसभा चुनावों की तुलना में 1.4% बेहतर हैं। हालांकि, इसमें डाक मतपत्र शामिल नहीं हैं, जिन्हें मतगणना के दिन जोड़ा जाएगा। राज्य के 48 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में से केवल 20 सीटों पर 2019 के चुनावों की तुलना में अधिक मतदान हुआ, अधिकांश निर्वाचन क्षेत्र शहरी उदासीनता की प्रवृत्ति को दूर करने में विफल रहे। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस बार के लोकसभा चुनाव में गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा सीट पर सर्वाधिक 71.88% प्रतिशत तो दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट पर सबसे कम 50.06% प्रतिशत मतदान हुआ है। मुंबई, शिरूर और मावल के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में पिछले लोकसभा चुनावों की तुलना में कम मतदान दर्ज किया गया। बात यदि पिछले लोकसभा चुनाव की करें तो 48 सीटों में से 41 सीटों पर राजग का कब्जा था, जबकि यूपीए गठबंधन को मात्र 5 सीटों पर सफलता मिली थी। एक सीट एआईएमआईएम तथा एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार नवनीत राणा ने जीत दर्ज की थी, जो इस बार भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। हालांकि चुनाव पूर्व दो प्रमुख दलों में हुए टूट से एवं गठबंधनों के बदले स्वरूप से मतदाता भी संशय की स्थिति में हैं, ऐसे में चुनाव परिणाम की वास्तविक आकलन को लेकर संशय की स्थिति दिख रही है।
 
  • मुंबई : 2019 की तुलना में कम मतदान
मुंबई में हाल के लोकसभा चुनावों में 54.1% मतदान हुआ, जो 30 वर्षों में दूसरा सबसे अधिक मतदान है। शिवसेना गुटों के बीच सत्ता संघर्ष से चिह्नित इस अभियान ने मतदाताओं की व्यस्तता को प्रभावित किया हो सकता है। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मुंबई उत्तर में सबसे अधिक 57.02% मतदान दर्ज किया गया। इस सीट से भाजपा के दिग्गज नेता केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल चुनावी मैदान में हैं। वहीं मुंबई उत्तर मध्य संसदीय क्षेत्र में 51.98%, मुंबई उत्तर पूर्व में 56.37%, मुंबई उत्तर पश्चिम में 54.84%, मुंबई दक्षिण लोकसभा सीट पर 50.06% तथा मुंबई दक्षिण मध्य लोकसभा सीट पर 53.60% मतदान दर्ज किया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में मुंबई सभी सीटों पर राजग का कब्जा था, लेकिन इस बार परिस्थितियां थोड़ी अलग हैं। पिछली बार राजग का हिस्सा रही शिवसेना दो धड़ों में बंट चुकी है, एक राजग का हिस्सा है, तो दूसरा धड़ा राजग के साथ। वहीं हाल यूपीए का हिस्सा रही राकांपा में भी दो फाड़ हो गई है और एक गुट अब राजग के साथ है। वहीं पिछली बार जीत दर्ज करने वाले 6 सांसद इस बार चुनावी मैदान में भी नहीं है। भाजपा ने जहां अपने तीनों सांसदों का टिकट काट दिया हैं। वहीं शिवसेना के दोनों गुटों ने अपने पक्ष के सांसदों को फिर से टिकट दिया है।
 
  • महाराष्ट्र में चलेगी सहानुभूति या मोदी लहर
महाराष्ट्र में 2024 लोकसभा चुनाव राज्य की दो प्रमुख पार्टियों की टूट के साए में हुए। भाजपा, कांग्रेस के अलावा अब यहां दो सेना और दो पवार वाली पार्टियों ने जोर-आजमाइश की है। साल 2019 में शिवसेना की पूरी ताक़त भाजपा के साथ थी। आज शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक हिस्से उसके साथ हैं, और राज्य में शरद पवार और उद्धव ठाकरे के प्रति ‘सहानुभूति की लहर’ की बात कही जा रही है। वहीं राजग के नेता प्रदेश में एक बार फिर से मोदी लहर कायम रहने का दावा कर रहे हैं। विश्लेषकों ने कहा कि विभिन्न कारणों से भाजपा गठबंधन की सीटें इस बार घट सकती हैं, हालांकि एक ओपिनियन पोल ने इस गठबंधन को 41 सीटें, जबकि एक दूसरे पोल ने 37 सीटें दीं हैं। इस चुनाव में जहां शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और एनसीपी (शरद पवार) के लिए जनता के सामने अपना केस मज़बूती से पेश करने की चुनौती है, एकनाथ शिंदे और अजीत पवार और उनके साथ गए नेता भी अपने फ़ैसलों पर महाराष्ट्र की जनता की प्रतिक्रिया जानना चाहेंगे।
 
  • भाजपा के लिए सामान्य स्थिति
महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा इस बार भी 22-23 सीटें जीतने में सफल रहेगी। हालांकि उसके लिए सबसे प्रमुख् चुनौती है अपने सहयोगी दलों को दी हुई सीटें जीतने की। क्योंकि मतदाताओं के प्रारंभिक बयानों को देखें तो मुख्यमंत्री शिंदे एवं अजीत पवार गुट का प्रभाव उतना नहीं दिख रहा है, जितनी की भाजपा को उम्मीद थी। वहीं शरद पवार के भावनात्मक बयानों एवं उद्धव ठाकरे के प्रति लोगों की सहानुभूति देखने को मिल रही है। वहीं ठाकरे समर्थकों को अपनी ओर करने के लिए भाजपा का राज ठाकरे का समर्थन लेना भी कोई विशेष कारगर होता नहीं दिख रहा है। हालांकि मनसे के जुड़ने से राजग को उत्तर भारतीय वोटों का नुकसान हुआ है, ऐसा भी नहीं दिख रहा, जैसा कि विपक्ष द्वारा दावे किए जा रहे थे। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा एवं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मेहनत पार्टी को कितनी सफलता दिला पाती है।
 
2019 लोस चुनाव परिणाम                 
भाजपा     22 
शिवसेना   18
एनसीपी    4
कांग्रेस      1
अन्य       3

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