#Article: इस तरह से तो महिलाओं के सम्मान की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
आज हमारे देश में महिलाओं के सम्मान और उसकी सुरक्षा को लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियाँ व सामाजिक संगठन व सरकारी संगठन बहुत हो हल्ला मचा रहे हैं|नियम भी आये दिन सरकार कठोर बना रही है|मगर जब हम महिला सम्मान व उसकी सुरक्षा पर दृष्टिपात करते हैं तो,देखने में यह आता है कि कुछ एक चिध्हित महिलाओं को लेकर ही तमाम उपरोक्त पार्टियाँ और संगठन मैदान में आते हैं,अपने अपने हिसाब से|राजनीतिक पार्टियाँ चिन्हित महिलाओं के लिए हाय तौबा करती हैं तो बात समझ में आती है| कि ये अपने लिए लड़ रहे हैं|लेकिन सामाजिक संगठन जब चिन्हित महिलाओं के लिए लड़ते दिखते हैं तब उनकी कार्यप्रणाली शक के दायरे में बिना कहे आ जाती है|
विगत दस साल पीछे से अगर महिला सुरक्षा और मान अपमान पर हम नजर दौड़ायें तो पाते हैं सब चिन्हित महिलाओं के ही मान सम्मान की व सुरक्षा को लेकर ही आंदोलन हुए हैं|चाहे वह निर्भया का केस हो,या अन्य|निर्भया के केस में हमने देखा कि यूपीए में सम्मिलित जितने संगठन व पार्टियाँ थीं सब बचाव की मुद्रा में थीं|और जितने विरोधी थे सब आंदोलन रत|उसके बाद कई घटनायें हुई|कमोवेश सबके हालात वैसे ही रहे|एक पत्रकार की खाट इसलिए खड़ी कर दी गई क्योंकि यूपीए की चेयरमैन का उसने असली नाम ले लिया|क्यों?जहाँ उसने नाम लिया वहाँ सत्ता उनकी थी|उसकी गाड़ी पर उसके समर्थकों ने हमला भी कर दिया|समर्थकों का कुछ नहीं हुआ|लेकिन पत्रकार को जेल की हवा खानी पड़ी|ऐसे ही सरकार समर्थित नेता यूपी के एनडीए वाले जो निर्भया वाले में खूब बवाल काटे थे|वो सब वैसे ही केस में बचाते फिरे अपने नेता को|ऐसे ही यूपीए वाले मणिपुर में महिला सुरक्षा को लेकर बहुत बवाल काटे|मगर बिहार बंगाल राजस्थान में उससे भी भयंकर अपराध महिलाओं के साथ हुए|सब मौन|क्योंकि बिहार बंगाल राजस्थान में यूपीए समर्थित सरकार थी|और मणिपुर में एनडीए समर्थित सरकार थी|
एनडीए वाले बिहार बंगाल राजस्थान पर चिल्ल पों कर रहे थे,और यूपीए वाले मणिपुर|विगत दिनों महिला पहलवानों के साथ एनडीए का सांसद और कुस्ती संघ का तत्कालीन अध्यक्ष का मामला सामने आया|यहाँ भी वही हालात,सरकार एनडीए की,तो अपने सांसद को बचाने में लगी रही|और तब की यूपीए अब की इंडी न्याय दिलाने के लिए आंदोलन रत रही|दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा तो पुरजोर लगी रहीं|तब तक लगी रहीं जबतक सरकार झुक नहीं गई और उस सांसद के ऊपर एफआई आर नहीं गई|उसका पद नहीं चला गया|इसलिए वो साधुवाद की पात्र हैं|इतना सब होने के बाद भी एनडीए कान सीधे न पकड़कर उल्टा पकडा़ कान ही है मगर घुमा कर|कहने का मतलब ए कि उस अपराधी की जगह उसके बेटे को सांसदी का टिकट दिया है|शायद यह सोंचकर कि बबूल में आम का फल मिलेगा|जबकी यह सरासर गलत है|इसका किसी भी तरह समर्थन नहीं किया जा सकता है|न ही करना चाहिए|
अब बात उसी महिला पर आ गई जो कभी महिला पहलवानों को न्याय दिलाने के लिए सरकार की ईंट से ईंट बजा दी|आज उसी महिला के साथ उसी के सीएम के घर में मारपीट हुई|सेक्सुवल हरेस्मेंट हुआ, सीएम के पीए द्वारा|इंडी गठबंधन मौन|बोल भी रहे हैं तो एनडीए की साजिश बता रहे|वह महिला हैरान इस बात से है कि पार्टियों ने संग छोड़ दिया कोई बात नहीं|मगर वह महिलायें भी मौन हैं जिनको न्याय दिलाने के लिए मैने अपनी पूरी ताकत लगा दी|आज वो महिला पहलवान कहाँ पहलवानी कर रही हैं|आज वो मेरे साथ क्यों नहीं खड़ी हैं|यह सोंच सोंच कर वह भिन्नाई है कि क्या उनका आंदोलन इंडी द्वारा प्रायोजित था|यदि प्रायोजित न होता तो आज मेरे साथ जो हुआ| वो महिला पहलवान मेरे साथ होती|मेरा समर्थन करती|मगर ये सब तो गधे की सींग की तरह गायब हैं|मजे की बात तो यह है जो महिला राजग की बैंड बजा दी थी|उसी महिला के सम्मान की लड़ाई आज राजग लड़ रही है|इसीलिए इंडी वाले यह कहते बिल्कुल न शरमा रहे हैं न सकुचा रहे हैं,कि यह राजग वालों की साजिश है|
महिला तब तक पूरी तरह सम्मानित और सुरक्षित नहीं हो सकती,जब तक चिन्हित मांसिकता खत्म नहीं होती|जब तक सामाजिक संगठन राजनीति से अलग नहीं होते|महिला किसी भी राजनीतिक दल की हो उसके सम्मान और उसकी सुरक्षा के लिए जबतक सभी दलों का स्वर एक न हो|तब तक महिला सम्मान और सुरक्षा के लिए बवाल काटना बेमानी है|महिलाओं के साथ छल है|उनके नाम से राजनीति है|चिन्हित मांसिकता से न कोई संगठन अछूता है न राजनीतिक पार्टियाँ|सब अपने अपने हिसाब से विरोध व समर्थन कर रहे हैं|यूपी के एक पार्टी के मुखिया कहे थे|लड़के हैं गलती हो जाती है|यूपीए की एक नेत्री ने कहा लड़की हूँ लड़ सकती हूँ|
राजग की सरकार तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसा अभियान ही चलाई है|फिर भी बेटियाँ हर जगह असुरक्षित ही हैं|कारण मौका परस्ती है|जिस तरह से इंडी वाले,खासकरके आम आदमी पार्टी वाले अपनी ही साथी का आज साथ छोड़ दिये हैं|उसी का चीर हरण कर रहे हैं|उसी की पार्टी की एक नेत्री टीवी पर आकर उसी के दोष गिना रही हैं|उसी के चरित्र पर मुखर होके अंगुली उठा रही हैं|क्योंकि उसकी आँच उनके ही गठबंधन पर आ रही है|उनकी ही पार्टी पर आ रही है|इस तरह की मांसिकता से न महिला सुरक्षित रह सकती है न सम्मानित रह सकती है|जब महिला खुद के घर में भेद भाव का शिकार हो तो,सारे आंदोलन, सारे विधान,सारे विरोध बेमानी है|चुनावी स्टंटबाजी है और कुछ नहीं|
पं.जमदग्निपुी
Tags:
#DailyNews
#mumbai
#recent
Article
Daily News
Local News
National
Naya Savera
New Delhi
recent



