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हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्थान तीनो हिन्द में बन गये घान | #NayaSaveraNetwork

पं.जमदग्निपुरी

नया सवेरा नेटवर्क

अंग्रेज जाते जाते हमें अपना मांसिक गुलाम बना कर गये|हमारी सनातन संस्कृति में उत्सव मनाये जाते थे|अंग्रेजों ने हमें दिवस मनाने पर जैसे विवश कर दिया हो|आज भारत में जितने दिन नहीं हैं उसके चौगुने दिवस मनाये जा रहे हैं|भारत में ही कई बार हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है|कभी राज्य कभी देश तो कभी विश्व हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है|जिसकी तारीख तय की गई है १० जनवरी|१४ सितम्बर आदि|बड़े बड़े हिन्दी के आयोजन होंते हैं|सब बड़के वाले विद्वान लम्बे चौड़े कसीदे पढ़ते हैं|कुछ सरकारी स्तर पर तो कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा मंच सजते हैं|सरकारी स्तर पर तो केवल ढोंग होते हैं|और पैसे की लूट होती है|हिन्दी के नाम से बहुतों की थोड़ी बहुत जेबें भर जाती हैं|मगर हिन्दी अपनी दुर्दशा पर आँसू बहाती रहती है और ऐसे ही चलता रहा तो बहाती रहेगी|क्योंकि जो विद्वान लोग हिन्दी की प्रगति के लिए लम्बे चौड़े भाषण मंच पर दिए थे या देंगे,वही हिन्दी की दुर्गति के जिम्मेदार भी हैं|

जो स्थिति आज हिन्दी की हिन्द में है वही स्थिति हिन्दू की भी हिन्दुस्थान में है|जैसे हिन्दी यहाँ दोयम दर्जे की भाषा है,वैसे ही हिन्दू भी यहाँ दोयम दर्जे का नागरिक है|क्योंकि हिन्दू हिन्दुस्थान में ही अपने पर्व गौरवपूर्ण व आजादी से नहीं मना सकता|उसके हर पर्व में सरकारी हस्तक्षेप व म्लेच्छों द्वारा विघ्न डाला जा रहा है|उसी तरह हिन्दी हिन्दी तो हम कर रहे हैं|मगर सिर्फ दिखावा भर ही है|हिन्दी को राष्ट्र भाषा न सरकार बनाना चाहती है न साहित्यकार ही बनाना चाह रहे हैं|समाज की तो बात ही छोड़ दीजिए|समाज तो अंग्रेजी पढ़ने बोलने के लिए जैसे बौराया सा है|उसको लग रहा है कि यदि हम अंग्रेजी नहीं पढ़ेगे तो रोजगार नहीं मिलेगा|समाज में रुतबा नहीं रहेगा|अंग्रेजी शब्दों का मतलब भले न पता हो|पर बोलेंगे जरूर|इसमें हमारे हिन्द की महिलायें पहले पायदान पर हैं|उनपर अंग्रेजी का नशा शिर चढ़कर बोलता है|इसमें शहरी महिलायें तो इतनी दिवानी हैं कि अंग्रेजी के लिए सम्बन्ध विच्छेद तक कर ले रही हैं|खुद को भले कुछ न आये बच्चा कान्वेंट में पढ़ेगा|उसके लिए पति छूट जाय या पति शिर से नख तक कर्ज में डूब जाय,कोई बात नहीं |महिलाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ता|बस बच्चा उनका कान्वेंट में जाना चाहिए|बहुत परिवार सिर्फ अंग्रेजी के लिए टूट रहे हैं|आज हिन्द में परिवार व रिश्ते टूट रहे हैं और बिखर रहे हैं|महिलायें अंग्रेजी माध्यम को अपनी इज्जत से जोड़कर चल रही हैं|शहरी करण में महिलायें पुरषों पर भारी हैं|पुरुष चाह कर भी अपने बच्चे को हिन्दी माध्यम से नहीं पढ़ा पा रहे हैं|इसलिए संस्कारी नहीं बना पा रहे हैं|जिसका परिणाम यह है कि हिन्दी भारत में दबती जा रही है|इसी लिए शायद हिन्दी दिवस जैसे उत्सव हमारे देश में मनाये जा रहे हैं|

      अब दिवस किसलिए मनाया जाता है यह जानना बहुत जरूरी है|अंग्रेज जो परिवार का मायने नहीं जानते समझते थे|माँ बाप से अलग रहते थे|साल में एक दिन मिलते जुलते थे|उस मेल मिलाप को वो लोग उत्सव की तरह मनाते थे|यह प्रक्रिया रोज रोज न हो इसलिए एक तारीख तय कर दिए|उसी तारीख को लोग एकत्रित होकर जगह जगह दिवस मनाने लगे|उन्ही के दबाव में हम भारतीय गुलामों ने भी दिवस मनाना शुरू किये|आजादी के पहले हम उतना नहीं मनाते थे जितना अब मना रहे हैं|दिवस मनाने का मतलब एक और है जैसे जब कोई मर जाता है तो उसकी याद में मनाया जाता है|वह हमारे दिलों में जिन्दा रहें|इसलिए उसका दिवस मनाने लगे|तो क्या हिन्दी मर गई है जिसकी याद में हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है|

       वैसे मनाना आज जरूरी भी है|जरूरी इसलिए कि सचमुच में आज हिन्दी मर ही रही है|क्योंकि गुरुकुल खतम हैं|हिन्दी माध्यम से बच्चों को पढ़ाने में अपनी बेइज्जती समझते हैं|भले हिन्दी के व्याख्याता हों|मंचो से भले लम्बे लम्बे भाषण दे रहे हों|मगर बच्चों की पढ़ाई लिखाई अंग्रेजी माध्यम से हो इस बात का विशेष ध्यान रखे जा रहे हैं|इसलिए हिन्दी की जीवन्तता बनाये रखने के लिए दिवस मनाना अति आवश्यक है|हमारे यहाँ बड़के वाले विद्वान हिन्दी पर भाषण झाड़ने अमेरिका अफ्रीका आदि देशों की दौड़ लगाकर आते हैं और हमें बताते हैं कि हिन्दी हमारी कई देशों में बोली समझी जा रही है|यह हमारे लिए गौरव की बात है|पर वो ए नहीं बताते कि हिन्द में हिन्दी की क्या औकात है|कैसे बतायें कि हम हिन्दी बस मंच तक ही बोलते हैं|

       हिन्दी की दशा भारत में वैसे ही जैसे आतंकवादी संगठनों के सरगनाओं के बच्चे तो अच्छे स्कूलों में पढ़ लिखकर इंजिनियर डाक्टर बन रहे हैं|और आतंकियों के बच्चे आतंकी बन के मर रहे हैं|पत्थरबाजी कर रहे हैं| वैसे ही हिन्दी के विद्वान हैं|सबको हिन्दी पढ़ने की शिक्षा तो देते हैं|मगर खुद अंग्रेजी के गुलाम बने हैं|कथनी करनी में विशेष अंतर है|देखा जाय तो आज दिवस इसलिए भी मनाना जरूरी है कि लोगों को याद रहे कि हिन्दी भी एक भाषा है|क्योंकि कहने के लिए हिन्दी विश्व भर में बोली जा रही है|मगर हिन्द में हिन्दी मृत होती जा रही है|इसलिए हिन्दी दिवस मनाना बहुत जरूरी है|और इसी लिए शायद विद्वान लोग जोर शोर से लगे भी हैं|

     हिन्दी वही भाषा है जो उत्तर से दक्षिण को पूरब से पश्चिम को आजादी की लड़ाई में जोड़ा था|मगर आजादी के बाद हिन्दी दमा की मरीज होकर बेदम होती चली जा रही है|इसलिए उसे जीवित रखने के लिए हिन्दी दिवस और पखवाड़ा मनाने की प्रक्रिया जोरों में चल रही है|लोगों को बताया जा रहा है कि एक थी हिन्दी भाषा|जो आज विदेशों में खूब चल रही है|पर हिन्दुस्थान से लुप्त हो रही है|लुप्त होने में हमारी सरकारों का विशेष योगदान रहा है|और है भी|प्रचार प्रसार के अलावाँ हिन्दी का कोई अस्तित्व नहीं है|सरकारें दिवस मनाने के लिए खूब खर्च कर रही हैं,पर आजादी के अमृतकाल में भी हिन्दी अपनी अंतिम साँसे गिन रही है|हर राज्य में अकाडमी बनी है|अकाडमी चलाने वाले अक्सर मुशायरा का आयोजन करते हैं|और खाते हिन्दी का हैं|हर साल बड़े बड़े पुरस्कार बाँटे जाते हैं|मिलता अक्सर चमचों को है|जो घूम घूम के गजल पढ़ते हैं|हिन्दी के उत्थान के लिए अकाडमी में गजलकारों का चयन होता है|हिन्दी के मूर्धन्य विद्वान ताली बजा रहे हैं|इसलिए भी आज हिन्दी दिवस मनाना जरूरी है|

हिन्दी के प्रति सरकारों की उदासीनता हिन्दी को श्वांसयंत्र पर रखी हुई है|कब मर जाय पता नहीं|इसलिए दिवस मना कर उसे आक्सीजन दे जीवंत रखने की कोशिस हो रही है|आजादी के पहले हिन्दी हिन्द की शान थी|आजादी के बाद हिन्दी हीनता की प्रतीक बना दी गई| यह तत्कालीन सरकार की महत्वपूर्ण गलती है| जिसके लिए आज हमें हिन्दी दिवस मनाना पड़ रहा है| यदि आजादी के बाद हमारे देश में एक निशान एक विधान एक भाषा पर इमानदारी से काम हुआ होता तो आज दिवस मनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती| पता नहीं किस भय से हमें हमारी हिन्दी से नहीं जोड़ा गया| पता नहीं किस भय से हिन्दी को राष्ट्र भाषा नहीं बनाया गया| न बनाया जा रहा है|हमने आज तक अंग्रेजी दिवस मनाते कभी कहीं नहीं देखा|मगर हिन्दी दिवस साल में तीन चार बार मनाया जा रहा| बस केवल हिन्दी के नाम पर अपनी जेबें भरी जा रही हैं|तमाशा बना दिया गया है हिन्दी को,और कुछ नहीं| मारे विद्वतजन सिर्फ"हिन्दी हिन्दी शोर कर रहे, अंग्रेजी पर जोर दे रहे"|


*माउंट लिटेरा जी स्कूल फतेहगंज जौनपुर के डायरेक्टर अरविंद सिंह की तरफ से नव वर्ष एवं मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं | Naya Sabera Network*
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