यह चुनाव परिणाम बहुत कुछ कह गया | #NayaSaveraNetwork
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| पं. जमदग्निपुरी |
नया सवेरा नेटवर्क
अभी विगत माह नवम्बर में देश के पाँच राज्यों में विधान सभा के चुनाव हुए सभी राजनीतिक पार्टियाँ पूरे दम खम से चुनाव लड़ीं। जो सत्ता में थी वो सत्ता में बने रहने के लिए जो नहीं थीं वो पाने के लिए बहुत सारे लोक लुभावने संकल्प के साथ चुनावी अखाड़े में अपने अपने पैंतरे अजमाई पर सफल वही हुआ जिसका मुद्दा और उद्देश्य साफ था।
इस चुनाव से एक बात तो साफ हो गई कि जनता अब जागरुक हो रही है| वह यह समझने लगी है कि क्या इस देश के और देशवासियों के हित में है| इस चुनाव में यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है| जनता ने जाति धर्म से ऊपर उठ कर वोट दिया है| वह यह समझने लगी है कि देश या राज्य आर्थिक रूप से जब मजबूत होगा तभी हमारा और देश का विकास होगा| इसीलिए मुफ्त की रेवड़ी बाँटने वालों की तो जमानत ही जप्त कर दी| जनता अब उसे वोट कर रही है जो देश को आगे ले जाने के प्रयास में लगा है| जनता यह समझने लगी है कि यदि विकास चाहिए तो कुछ कुर्बानी देनी पड़ेगी|अब हम बहकावे में आकर मुफ्त के चक्कर में न देश को गर्त में जाने देंगे न आने वाली पीढ़ी का भविष्य|जनता ने अब शायद ठान लिया है कि जाति धर्म से ऊपर उठ कर देश राज्य को सशक्त बनाना है|यह चुनाव परिणाम यही कह रहा है|
पहले चुनावों पर जाति धर्म की छाप पूर्ण रूप से दिखाई देती थी|लेकिन अब वह धीरे धीरे धुँधली पड़ती जा रही है|अब जनता जागरुक हो रही है|विगत दस वर्षों से बर्तमान सरकार के काम को देखते हुए जनता अपना निर्णय दे रही है|यह बात पक्ष विपक्ष दोनो को समझना चाहिए|और जिस तरह जनता बदली है उसी तरह राजनीतिक पार्टियों को भी अपने में बदलाव लाना चाहिए| जनता का बदला मन देश को सशक्त देखना चाहता है| जनता समझ चुकी है यदि अमेरिका की तरह बनना है तो मँहगाई आदि को बर्दाश्त करना पड़ेगा| जनता देख रही है कि जो देश विकसित हैं वो हमारे यहाँ से अधिक मँहगे सामान खरीद रहे हैं| वहाँ जन भागीदारी सरकार व देश चलाने में अधिक है| इसलिए वो विकसित हैं| अब हम भी यह सब दरकिनार करते हुए निज के बारे में कम देश के बारे में अधिक काम करेंगे और करने वाले को ही सत्ता सौपेंगे|
इस चुनाव में कई पार्टियाँ मुफ्त की रेवड़ी लिए प्रचार कर रही थीं|कई जातियों को डरा रही थीं|तो कई धर्म को डराकर अपना उल्लू सीधा करने में लगी थीं|इन पार्टियों के पास जनता के विकास के लिए कोई सपना ही नहीं था|राज्य को अग्रणी रखने का कोई संकल्प ही नहीं था|जनता ने इन सभी को ठेंगा दिखा दिया|और उसे जिता दिया जिसके पास देश और राज्य को विकसित बनाने का सपना था संकल्प था|जनता समझने लगी है कि अपना विकास तभी होगा जब देश का राज्य का विकास होगा|
भाजपा चुनाव में उतरी थी तो सिर्फ और सिर्फ विकास के लिए|उसने कोई लालीपाप जनता को नहीं दी थी|उसने न जाति के नाम पर न धर्म के नाम पर चुनावी मैदान में जोर अाजमाईश की| फिर भी जनता ने उसे ही चुना|वहीं अन्य पार्टियाँ सिर्फ भाजपा को सत्ता न मिल पाये इसलिए कोई धर्म के नाम पर लड़ रहा था तो कोई जाति के नाम पर तो को सबकुछ मुफ्त के नाम पर|जनता ने सबको ठेंगा दिखाते हुएऔर सबक सिखाते हुए विकास के नाम पर देश के नाम पर वोट किया है|यह बात उन सभी पार्टियों को समझ लेना चाहिए|जनता अब इन सब बातों से ऊब चुकी है|जाति धर्म और मुफ्त के चक्कर मे खुद को बरवाद कर चुकी है|अब और बरवाद नहीं होना चाहती|इसलिए अब जनता उसे ही चुनेगी जिसके पास देश और राज्य को समृद्ध करने का संकल्प होगा,सपना होगा|
हालाँकि अभी भी कुछ धर्म जाति और मुफ्त के लोभी हैं|जो इस चक्कर में फँसकर देश की नाव डुबोने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं|और उसी आधार पर वोट कर रहे हैं|ए सभी अपने अलावाँ देश के बारे में या आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचते ही नहीं|इनका बस एक ही फंडा है एक ही सोंच है|अपना भला भला जग माही,वाली सोंच के हैं|जिसके परिणाम भी कहीं कहीं दिखे हैं|
जिस तरह जनता सजग हो रही है उसी तरह पार्टियों को भी सजग होना पड़ेगा|नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब एक ही पार्टी सत्ता में रहेगी|और जब एक ही रहेगी तो हो सकता है वह मनमानी पर उतर जाय और जनतंत्र को राजतंत्र में परिवर्तित कर दे|इसलिए विपक्ष को भी मजबूत रहना आवश्यक है|और विपक्ष तभी मजबूत होगा जब वो जनता में भरोसा उत्पन्न कर पायेगा कि ये भी देश के बारे में सोचते हैं|इनके पास भी देश राज्य को आगे ले जाने का सपना है संकल्प है|यह चुनाव परिणाम यह संदेश सभी को दे रहा है कि अब जाति धर्म और मुफ्त का मुद्दा नहीं चलेगा|चलेगा तो बस विकास का ही मुद्दा |
जनता अब यह फर्क करना धीरे धीरे जानने लगी है कि किसको सत्ता की मलाई खानी है और कौन देश के लिए सत्ता तक पहुँचना चाहता है|यह चुनाव परिणाम शायद इसी बात का संकेत है|जनता ने मुफ्त की रेवड़ी लेने से साफ मना कर दिया|जनता यह परिणाम देकर राजनीतिक दलों से कह दिया हमें देश चाहिए|वो भी समृद्ध सुदृढ़ सशक्त और संगठित|हमें कर जोड़े वाला भारत नहीं चाहिए|न हम कर जोड़े नतमस्तक रहेंगे न देश को अब उस स्थिति में जाने देंगे|जनता यह संदेश इस परिणाम से दे दी कि हमें आँख में आँख डालकर बात करने वाला सीना ताने गौरवपूर्ण भारत चाहिए|जो हमें ऐसा भारत देगा अब हम वोट उसी को देंगे|
भाजपा से इतर पार्टियाँ भाजपा को दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टी बताते नहीं थकती|यदि भाजपा दक्षिणपंथी होती तो दक्षिण में उसका प्रदर्शन सौ प्रतिशत होना चाहिए|मगर वहाँ वह अब भी नगण्य ही है|इसके बावजूद आरोप लगाके के सत्ता पाना चाहती हैं|इसे भी जनता ने नकार दिया|यह बात राजनैतिक दल जितनी जल्दी समझ जाय अच्छा रहेगा|अन्यथा परिणाम ऐसे ही आयेंगे|ऊल जलूल भाषणबाजी अब नहीं चलेगी|जनता अब काम चाहती है|देश का विकास चाहती है|अब मुद्दा एक ही चलेगा|सिर्फ औ सिर्फ विकास का चलेगा|
कुछ नेतागण हार की समीक्षा करने की बजाय सारा ठीकरा ईवीएम मशीन पर फोड़ रहे हैं|अपना आत्मावलोकन करने की बजाय मशीन को दोषी ठहरा रहे हैं|जैसे ही उनके जीते हुए राज्य या कंडीडेट की बात पूँछी जाती है|तब इन धुर्तों के गले सूख जाते हैं| और अपनी ही जीत को भाजपा की चाल बताने लगते हैं|तब जनता सोंचती है कि ऐसे लोगों को वोट देना ही बेकार है|लड़ मर कर वोट हमने दिया|जिताया हमने और ये धुर्त हम सबका आभार मानने की बजाय भाजपा को क्रेडिट दे रहे हैं|तो क्यों न आगे से भाजपा को ही वोट किया जाय|कम से कम हमारी वोट की कीमत तो भाजपा वाले समझते हैं और हमें क्रेडिट देते हैं|जनता को जनार्दन मानते हैं|ऐसे लोगों को वोट क्यों दें जो जनता को राक्षस कहते हैं|यह चुनाव परिणाम यह भी बता रहा है कि जनता को मूर्ख तो अब विल्कुल न समझा जाय|अब जनता की भावनाओं से कोई अधिक दिनों तक खिलवाड़ नहीं कर सकता|यह चुनाव परिणाम सभी पार्टियों के आत्मावलोकन करने के लिए आया है|ईवीएम को बदनाम करने से सत्ता नहीं मिलेगी|ढंग से जनहित और देशहित के काम ही अब सत्ता तक पहुँचने की सीढ़ी बनेगी|नाम नहीं अब काम चाहिए|जनता ने ऐलान कर दिया है|
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