मुंबई: क्रांति महानायक भगवान परशुराम पर परिसंवाद संपन्न | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
मुंबई। श्री नरसिंह के. दुबे चैरिटेबल ट्रस्ट एवं अखिल ब्रह्म विज्ञान संस्थान मुंबई के संयुक्त तत्त्वावधान में नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में श्रीभगवान तिवारी के मार्गदर्शन में "क्रांति महानायक" भगवान परशुराम पर परिसंवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ संस्था के अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे, मुख्य अतिथि एडवोकेट समरनाथ पाण्डेय, विशेष अतिथि चिंतामणि द्विवेदी, वेदमूर्ति गोरक्षनाथ पैठणकर, गणमान्य अतिथि आशीष मिश्रा, सम्मानमूर्ति डॉ. राजेंद्र तिवारी, अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद के महासचिव देवेंद्र तिवारी, डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने आचार्यों द्वारा वेदमंत्रोच्चार के मध्य माँ सरस्वती, भगवान श्रीगणेश, भगवान धन्वंतरी और भगवान परशुराम की मूर्तियों पर माल्यार्पण, पूजन-अर्चन, दीप प्रज्वलित करके किया।
मंच संचालन डाॅ. चंद्रभूषण शुक्ल ने किया। डॉ. रोशनी किरण ने सरस्वती वंदना और भगवान परशुराम स्तोत्र गाया। सम्मानित अतिथियों और वक्ताओ का संस्था के अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे ने शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। प्रास्ताविकी में डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने "भगवान परशुराम" के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान परशुराम ने समाज में समता, न्याय और विकास का कार्य किया तथा अहंकार, अन्याय, शोषण का विनाश किया साथ ही "भगवान श्री परशुराम" का भव्य मंदिर निर्माण का उन्होने संकल्प लिया।
डॉ.श्रीभगवान तिवारी ने मनुष्य को भेदभाव भूलकर एकता का वीजारोपण करने का संदेश दिया। मुख्य वक्ता डॉ.अवनीश सिंह, डॉ.अवधेश राय, श्रीमती संगीता दुबे, डॉ.विवेक सिंह, ने भगवान परशुराम के जीवन पर विस्तार से विविध विषयों पर प्रकाश डाला। वेदमूर्ति गोरक्षनाथ पैठणकर ने संस्कृत और संस्कृति दोनों की रक्षा करने का संदेश दिया।
आचार्य पण्डित रामव्यास उपाध्याय ने संस्था तथा समारोह के अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे जी को शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया तथा आभार प्रकट किया। राष्ट्रगान के पश्चात कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। डाॅ. सूर्यमणि सिंह, विकास दुबे, सुनील तिवारी, दीपू सिंह, डॉ. शिवनारायण दुबे, डॉ. परमिंदर पाण्डेय, प्राध्यापक रामपाल सिंह , धनंजय चौबे, आर.के. सर, कवि साहित्यकार राम सिंह, साहित्यकार रासबिहारी पाण्डेय, पत्रकार प्रभाशंकर शुक्ला, रमेश राय, हरिप्रसाद पाण्डेय, नवल किशोर मिश्रा, जैसे प्रबुद्ध वर्ग से पूरा सभागार भरा हुआ था ।
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