वाराणसी: बाबासाहेब के विचारों के प्रसार के लिए होगा राष्ट्रीय सेमिनार | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
वाराणसी। ‘मगन भई तुलसी राम गुन गाइके और ‘सब कोऊ चली डोली पालकी रथ जुड़वाय के आदि विवाह गीत गुरुवार को गंगा तट पर नेमी महिलाओं की भीड़ में मुखर हुए। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान का नियम पालन करने वाली सैकड़ों महिलाएं गोधूली में भी अस्सी से तुलसी घाट के बीच जुटीं।
गंगा तट सहित मंदिरों एवं घरों में गन्ने का मंडप सजाकर देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम को ऋतु फल अर्पित किए गए। घर की साफ-सफाई की गई। पूजा के स्थान पर रंगोली बनाई गई। तुलसी के पौधे का गमला और चौरा गेरू आदि से सजाकर उसके चारों ओर ईख का मंडप बनाया गया। उसके ऊपर सुहाग की प्रतीक चुनरी ओढ़ाई गई। गमले को साड़ी ओढ़ाकर तुलसी को चूड़ी चढ़ाकर उनका शृंगार किया गया। विवाह में मंडप पूजा, वरपूजा, कन्यादान, हवन और फिर प्रीतिभोज, सब कुछ परंपरा के अनुसार हुआ। विवाह का कर्मकांड पूर्ण करने के बाद आरती उतारी गई।
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