वाराणसी: संस्कृत विद्वान डॉ. द्वारिका प्रसाद द्विवेदी का निधन | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
वाराणसी। काशी में संस्कृत समाज के अद्भुत रत्न डॉ. द्वारिका प्रसाद द्विवेदी का निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार की रात 11.30 बजे अंतिम सांस ली। डॉ. द्वारिका प्रसाद काशी की प्राचीन विद्वत परंपरा के अप्रतिम स्तंभ रहे।
डॉ. द्विवेदी द्वारा नव्य व्याकरण के ‘मध्यसिद्धांतकौमुदी की हिंदी टीका सर्वप्रथम की गयी। व्याकरण शास्त्र के ही ग्रंथ ‘प्रौढ़मनोरमा पर की गई टीका के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा ‘पाणिनीय की पदवी से अलंकृत किया जा चुका है। अपनी अध्यापन सेवाएं श्रीनन्दलाल बाजोरिया संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण के प्राध्यापक के रूप में दीं। साथ ही सम्मानित आचार्य के रूप में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी हिंदू विश्वद्यालय के भी अध्यापन किया।
उनकी शिष्य मंडली की शृंखला बहुत विराट रही जिसमें कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी तो कई विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, महाविद्यालयों के प्राचार्य होने के साथ ही देश की सैनिक सेवा में धर्मगुरु आदि रहे। उनके कई शिष्यों ने अन्यान्य मठों और आश्रमों का शास्त्रोक्त रीति से संचालन किया। उनमें वर्तमान में काठिया बाबा आश्रम के श्रीमहंत वृन्दावन बिहारी दास महाराज का नाम प्रमुख है।
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