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भारत अमेरिका संबंधों की प्रगाढ़यता दुनियां को नई दिशा देगी | #NayaSaveraNetwork

नया सवेरा नेटवर्क

  • अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात भागीदार है 
  • भारत अमेरिका का डब्लयूटीओ में आधा दर्जन विवादास्पद मामलों को सुलझाने और ख़त्म करने का निर्णय गहरी दोस्ती में मील का पत्थर साबित होगा - एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया 

गोंदिया- वैश्विक स्तरपर जिस तरह भारत हर क्षेत्र में दिन दूनी रात चौगुनी तर्ज पर नए-नए आयामों के झंडे गाड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है, नवोन्मेष स्टार्टअप प्रौद्योगिकी नवाचार रूपी अस्त्रों से अपने विज़न आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ा रहा है और दुनियां के विकसित देश अब भारत की ओर देखने लगे हैं तथा भारत का रुझान विकसित राष्ट्र बनने की ओर है। हम पिछले कुछ महीनो से देख रहे हैं कि अमेरिका भारत के सबसे अधिक करीब आ रहा है जिसमें भारत के अधिकृत अमेरिका दौरे के समय सबसे बड़ा सम्मान दोनों सदनों में स्पीच, भारत के प्रति साफ कॉर्नर, सपोर्ट जिसके कारण आज अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निर्यात भागीदार है, जिसके डिटेल हम नीचे डिस्कस करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति का 8-10 सितंबर 2023 को जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत द् आना सबसे बड़ा राजनीतिक साझेदारी सहित अनेक प्लस पॉइंट है, जिसके बल पर भारत अमेरिका संबंधों की प्रकार्यता दुनियां को नई दिशा देगी। क्योंकि पिछले हफ्ते नई दिल्ली में अमेरिका से बी-20 शिखर सम्मेलन में विस्तृत बातचीत हुई बता दें कि दिनांक 28 नवंबर 2023 को माननीय पीएम की रूसी राष्ट्रपति से दूरसंचार से बातचीत हुई जिसमें रूसी राष्ट्रपति ने चंद्रयान-3 सफलता की बधाइयां दी और जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत ना आने पर खेद प्रकट कर विदेश मंत्री को भेजने की बात कही। दूसरी ओर बी-20 में विवादास्पद साथ मुद्दों में से 6 मुद्दे आपसी सहमति से निपटने का निर्णय हो चुका है जिसे उच्च लेवल पर हरी झंडी मिल गई है और जल्द ही इसको साकार रूप  प्रदान किया जाएगा। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत अमेरिका की प्रगाढ़य दोस्ती दुनियां को नई दिशा देकर मानव कल्याण और विकास समृद्धि में मील का पत्थर साबित होगी। 

साथियों बात अगर हम भारत और अमेरिका द्वारा डब्लयूटीओ में दर्ज आधा दर्जन विवादास्पद मामले आपस में सुलझाने की करें तो, भारत और अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) मामलों को सुलझाने और खत्म करने का फैसला किया है। इस निर्णय का मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मज़बूत करना है।दोनों पक्ष एक महीने के भीतर डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान पैनल को इसकी सूचना दे देंगे कि इन विवादों कोद्विपक्षीय सहमति से निपटाया जा रहा है और दोनों देश एक-दूसरे पर थोपे गए तीन-तीन मामले वापस ले लेंगे। यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडेन के निमंत्रण पर पीएम की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के दौरान ही लिया गया था। ये मामले, सौर सेल और मॉड्यूल, विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के खिलाफ कुछ निर्यातसंबंधी उपायों अमेरिका के कुछउत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क जैसे विवादों में भारत को हार मिली जबकि अमेरिका जीत गया। वहीं दूसरी ओर, भारत के कुछ हॉट-रोल्ड कार्बन स्टील फ्लैट उत्पादों में बराबरी करने संबंधी उपायों, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र और इस्पात एवं एल्युमीनियम उत्पादों से जुड़े कुछ कदमों संबंधित तीन मामलों में भारत को जीत मिली जबकि अमेरिका को हार का मुंह देखना पड़ा। इनमें से एक मामला 2018 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिकी धारा 232 के तहत स्टील और एल्युमीनियम पर क्रमश: 25 और 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने से जुड़ा है। इसके बाद भारत नेजवाबी कार्रवाई करते हुए 28 वस्तुओं पर शुल्क लगाया था। भारत ने तब कहा था कि आयात शुल्क से होने वाली आमदनी, इस्पात और एल्युमीनियम पर अमेरिकी शुल्क लगाए जाने के बाद भारतीय उद्योग को हुए नुकसान की भरपाई करेगी।इन विवादों का समाधान निश्चित रूप से भारत अमेरिका संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि अमेरिका और भारत अब केवल रणनीतिक वजहों से ही एक-दूसरे के सहयोगी नहीं हैं।अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निर्यात भागीदार है, वित्त वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच व्यापारिक वस्तुओं का द्विपक्षीय कारोबार करीब 128.78 अरब डॉलर तक था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने हाल ही में संवाददाताओं से कहा, यह भारत के लिए बहुत बड़ी जीत है और यह दोनों देशों के लिए परस्पर रूप से लाभकारी है। ‘प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिका और भारत दोनों के फायदे के लिए फैसला किया है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक और मुख्य कार्या​धिकारी  ने कहा, अदालत के बाहर कोई भी समझौता, व्यापार में वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल बनाता है क्योंकि इसमें किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होता है। यह एक अच्छा निर्णय है। यह न केवल अमेरिका में भारत के निर्यात के लिहाज से अनुकूल होगा बल्कि यह समग्र निर्यात के लिए भी सही संकेत देगा। 

साथियों बात अगर हम केंद्रीय वाणिज्य मंत्री के बी-20 शिखर सम्मेलन में बयान की करें तो, उन्होंने कहा कि साल के अंत तक भारत और अमेरिका के बीच कोई व्यापार विवाद नहीं होगा क्योंकि ऐसी उम्मीद है कि दोनों पक्ष तब तक लंबित विवाद को हल कर लेंगे। दोनों देशों से जुड़े डब्ल्यूटीओ विवादों में सफलता पाने के अलावा, भारत ने अमेरिका के सामान्य तरजीही तंत्र (जीएसपी) कार्यक्रम के तहत अपना दर्जा बहाल करने के लिए जोर देना जारी रखा है।एक संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस द्वारा तय किए गए पात्रता मानदंडों के लिहाज से इस पर विचार किया जा सकता है। जीएसपी के तहत भारत का लाभार्थी दर्जा 2019 में वापस ले लिया गया था जो कुछ वस्तुओं के लिए शुल्क मुक्त बाजार तक पहुंच बनाने की अनुमति देता है। साथियों बात अगर हम भारत अमेरिका संबंधों की करें तो, भारत 1961 में गुट निरपेक्ष आन्दोलन की स्थापना करने वाले देशों में प्रमुख था किन्तु शीत युद्ध के समय उसके अमेरिका के बजाय सोवियत संघ से बेहतर सम्बन्ध थे। इक्कीसवीं सदी में भारतीय विदेश नीति नेबहु-ध्रुवीय दुनियां के भीतर संप्रभु अधिकारों की रक्षा और राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने के लिए भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का लाभ उठाने की मांग की थी। राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (2001-2009) और बराक ओबामा (2009-2017) के प्रशासन के तहत, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत के मूल राष्ट्रीय हितों के अनुकूल होने का प्रदर्शन किया था और चिंताओं को स्वीकार किया था। द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में वृद्धि, वैश्विक सुरक्षा मामलों पर सहयोग, वैश्विक शासन (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) के मामलों पर निर्णय लेने में भारत को शामिल करना, व्यापार और निवेश मंचों (विश्व बैंक, आईएमएफ, एपेक) में उन्नत प्रतिनिधित्व। बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं (एमटीसीआर, वासेनार व्यवस्था, ऑस्ट्रेलिया समूह) में प्रवेश और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में प्रवेश के लिए समर्थन और प्रौद्योगिकी साझाकरण व्यवस्था के माध्यम से संयुक्त निर्माण प्रमुख मील के पत्थर बन गए हैं और गति और प्रगति का एक उपाय अमेरिका को करीब लाने के मार्ग पर- भारत संबंध है 2016 में,भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए और भारत को संयुक्त राज्य का एक प्रमुख रक्षा भागीदार घोषित किया गया था। 2020 में, भारत ने चल रहे कोरोनावायरस  महामारी के खिलाफ लड़ाई के बीच हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नामक एक औषधीय दवा पर एक निर्यात प्रतिबंध को समाप्त करने के लिए अपना समझौता प्रदान किया, जब ट्रम्प ने भारत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकी दी, अगर उसने निर्यात प्रतिबंध को समाप्त करने का पालन नहीं किया हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर। कोविड-19 टीकों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए आवश्यक कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ द्वारा एक याचिका को खारिज करने के बाद, बिडेन प्रशासन के शुरुआती चरणों में संबंध कुछ समय के लिए हिल गए थे। परंतु अभी संबंधों में बहुत तेजी से तगड़ा था आ रही है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत अमेरिका संबंधों की प्रगाढ़यता दुनियां को नई दिशा देगी।अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात भागीदार है।भारत अमेरिका का डब्लयूटीओ में आधा दर्जन विवादास्पद मामलों को सुलझाने और ख़त्म करने का निर्णय गहरी दोस्ती में मील का पत्थर साबित होगा।

-संकलनकर्ता लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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