काव्य सृजन दिल्ली इकाई द्वारा संपन्न हुई काव्य गोष्ठी | #NayaSaveraNetwork
- छोड़ जाना तेरा याद आता रहा
नई दिल्ली। सामाजिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था "काव्य-सृजन" (पंजी.) के दिल्ली इकाई द्वारा २० अगस्त दिन रविवार को एक शानदार काव्यगोष्ठी का आयोजन बृहस्पति कला भवन, फतेहपुर बेरी नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा से हुई तत्पश्चात वंदना संजीव घोष नीर ने पढ़ी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाटी माइंस से पधारे वरिष्ठ आदरणीय परसराम ने की। कार्यक्रम में दिल्ली से अनेक कवियों ने अपने गीतों एवं कविताओं से लोगों का मन मोह लिया। 'आनंद आ रहा है, आनंद आ रहा है' संजीव कुमार घोष 'नीर' की ये रचना खूब पसंद की गई। राजीव मांझी के गीतों पर भी खूब झूमा गया। पवन कुमार के गीत जो राजस्थानी भाषा में थी गूढ़ सीख से भरपूर थी। समय-समय पर तालियों की गड़गड़ाहट ने गोष्ठी को सफलता प्रदान की। नीरज बौरीवाल की रचना माई में मां के ममता और मां की याद के बरक्स बात हुई। कविता खूब सराही गई। तरुण कुमार सिवोदिया की रचना तमाशेबाज राजा व्यंग्यपूर्ण रही। हंसने पर विवश हो गये लोग। पंकज तिवारी की रचना 'जब जरुरत थी मुझको तेरी बेवफा, छोड़ जाना तेरा याद आता रहा' भी खूब पसंद किया गया। पंकज तिवारी द्वारा कहानी 'विभा का हंस' का भी वाचन किया जिसका अंत बड़ा ही दर्दनाक रहा, कहानी बड़ी ही प्रभावी रही। अंकुश, आर्नव की भी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन काव्य सृजन दिल्ली इकाई के अध्यक्ष पंकज तिवारी ने काफी सुंदर तरीके से किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में परसराम ने सभी रचनाओं पर अपने विचार रखे। आभार ज्ञापन पवन कुमार द्वारा किया गया। काव्य सृजन दिल्ली इकाई के महासचिव संजीव घोष द्वारा काव्य सृजन के स्थापना एवं उद्देश्य से संबंधित बातें सभी के बीच रखीं गई। सामाजिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था "काव्य-सृजन" के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. शिवप्रकाश जमदग्निपुरी द्वारा शुभकामना संदेश भी प्राप्त हुआ।


