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शर्मसार करती मणिपुर की विकृत घटना | #NayaSaveraNetwork


नया सवेरा नेटवर्क

आज शिक्षित समाज में किसी को समाज के सामने भारी भीड़ में नंगा करके प्रताड़ित किया जाना अशोभनीय निंदनीय और दंडनीय है। पिछले दिनो मणिपुर से एक विडियो बड़ी तेजी से हर प्लेटफार्म पर घूम रहा है। कुछ लोग जो राक्षसी प्रवृत्ति के थे एक महिला को भीड़ में ले जाकर निर्वस्त्र किया। प्रताड़ित भी किया। जिसकी जितनी निंदा की जाय कम है। 

इस अतिनिंदनीय काम की निंदा से अधिक राजनेताओं की भी निंदा होनी चाहिये। जिनके कारण इस तरह के कृत्य आज धडल्ले से किये जा रहे है। राजनेताओं की इसलिए क्योंकि ए लोग अपनी सुविधानुसार राजनीतिक लाभ हानि को देखते हुए विरोध और मौन अपनाते हैं। ये लोग गिद्ध की प्रजाति के हैं। दृष्टि गड़ाये रहते हैं कि कब उनके राज्य में कोई कूकृत्य हो और हमें शोर मचाने का अवसर मिले। चाहे निर्वस्त्र कर घुमाया जाय या बलात्कार किया जाय या किसी की हत्या की जाय सब निंदनीय और दंडनीय है। इसमें किसी भी तरह का भेद भाव नहीं करना चाहिए। लेकिन हमारे देश में हमारी राजनीतिक पार्टियाँ हमेशा गुणा गड़ित के हिसाब से काम करती हैं।

1990 से लेकर 2013 तक। काश्मीर अमानवीय घटनायें घटित होती रहीं पर राजग के सिवा किसी भी दल ने चूँ तक नहीं कौया। पिछले दिनों कमोवेश राजस्थान में ऐसी ही कई घटनायें हुई सामूहिक बलात्कार हत्या अपहरण जैसी घटनायें हुई,पर भाजपा को छोड़ किसी ने प्रतिकार नहीं किया। यहां भाजपा की मजबूरी है, क्योंकि सरकार कांग्रेस की है। बंगाल में अनेकों चुनावी हत्यायें हुई। यहाँ भी सभी विपक्षी मौन सिर्फ भाजपा विरोध में। बिहार में शिक्षकों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। यहां भी सभी विपक्षी मौन भाजपा विरोध में। क्योंकि यहाँ भाजपा की सरकार नहीं है, इसलिए भाजपा विरोध कर रही है। यहाँ तो अति हो गई एक भाजपा का नेता पुलिस लाठी चार्ज में परलोक भी चला गया। मगर सभी विपक्षी मौन। ए दोगलापंथी क्यों।

वहीं मणिपुर में भाजपा की सरकार हैं वहाँ घोर निंदनीय कार्य हुआ है। जिसका बखान व बचाव किसी भी तरह से नहीं किया जा सकता। लेकिन यहाँ भी वही दोगलापंथी हो रही है। यहाँ सारे राजग से इतर दल पुरजोर विरोध में दिखाई पड़ रहे है। पड़ना भी चाहिए। मगर इस विरोधप्रदर्शन को जनता समझ ही नहीं पा रही। ए कैसी लड़ाई लड़ रहे हैं। एक अन्याय के लिए न्याय माँग रहे हैं, वहीं दूसरे अन्याय के लिए मौन, समझ से परे है इन दोगलों की लड़ाई।

ये जितने राजनीतिक दल हैं ये कभी भी जनता की लड़ाई लड़ते ही नहीं। यदि लड़ते होते तो आज हम भारतवासियों  को निर्भया या मणिपुर जैसी घटनाओं के लिए न शोर शराबा करना पड़ता न ही चिंता। इन दोगले नेताओं के कुकृत्य से तो ऐसा लगता है जैसे ए ही इन घटनाओं को प्रायोजित करवाते हैं और उसका विडियो बनवाकर चारो तरफ प्रसारित करवाकर फिर लाभ लेने के लिए धरना प्रदर्शन करते हैं।

अब ये जो मणिपुर की अतिनिंदनीय  घटना आज चारो तरफ आग की तरह फैली है। इसे फैलने में एक माह लग गया। अब सोंचने वाली बात यह है कि यह बात इतने दिनों तक दबी क्यों रही। जिस किसी ने भी इस घटना की विडियो बनाई वो पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी|दी भी तो इतने विलम्ब से क्यों दी। इस विडियो को देखने बाद ऐसा लगता है जैसे यह सारी घटना पहले से तय थी कि हम लोग ऐसा करेंगे और तुम विडियो बना लेना। इस घटना में राजनीतिक बू आ रही है। थू है ऐसे राजनेताओं पर ऐसी भीड़ पर जो ऐसे घिनौने कृत्य करते करवाते और देखतेवालों पर।

हमारा शास्त्र कहता है कि ऐसे कुकृत्य का यदि विरोध न कर सको, होने से न रोंक सको तो देखो भी मत। देखने वाले करने वाले से अधिक पाप के भागीदार बनते हैं। इस लिए ऐसी जगहों से हट जाना चाहिए जहाँ हम कुछ कर न सकें।

एक बार पुनः अतिनिंदनीय कृत्य की निंदा करते हुए उन सभी पोपोगेंडा मचाने वाले दोगले नेताओं की भी जितनी निंदा की जाय कम है।

लेखक. पं. जमदग्निपुरी


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