संकट में पतवार बन खड़े होते हैं पिता | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
संकट में पतवार बन खड़े होते हैं पिता
संकट में पतवार बन खड़े होते हैं पिता
परिवार की हिम्मत विश्वास है पिता
उम्मीद की आस पहचान है पिता
जग में अपने नाम से पहचान दिलाते हैं पिता
खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता
कभी कंधे पर बिठाकर मेला दिखाते हैं पिता
कभी घोड़ा बनकर घुमाते हैं पिता
ऐसे सभी लोकों के महान देवता है पिता
कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान हैं पिता
मां अगर पैरों पर चलना सिखाती है
तो पैरों पर खड़ा होना सिखाते हैं पिता
कभी धरती तो कभी आसमान है पिता
परिवार की इच्छाओं को पूरा करते हैं पिता
हर किसी का ध्यान रखते हैं पिता
धरा पर ईश्वर अल्लाह का नाम है पिता
जग में अपने नाम से पहचान दिलाते हैं पिता
लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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