जौनपुर: आशा,आंगनबाड़ी व एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोभी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में डोभी ब्लॉक की आशाओं आंगनबाड़ी और एएनएम को ''होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड'' (एचबीवाईसी) कार्यक्रम का प्रशिक्षण विगत 21 जनवरी से 15 फरवरी 2023 तक दिया गया। जिसमें 335 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया, जिससे आशाएं गृह आधारित बच्चों की देखभाल करके बचपन में होने वाली बीमारी को कम करने का तरीका अपनाकर और पोषण स्तर में सुधार लाकर बच्चों के समुचित आरंभिक बाल विकास को सुनिश्चित करेंगी। प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए एसीएमओ (आरसीएच) डॉक्टर एससी वर्मा ने बताया कि आशाएं प्रशिक्षण के बाद शिशु में बीमारी और मृत्यु दर कम करने में सहायक होगी इसके लिए वह पहले से ही एचबीएनसी कार्यक्रम के अंतर्गत नवजात शिशु और माताओं की देखभाल के लिए जन्म से 42 दिन तक 7 बार जन्म के दिन से लेकर तीसरे दिन, सातवें दिन ,14वे, 28वे और 42 वें दिन गृह भ्रमण करती थी और आवश्यक सेवाएं प्रदान करती थी। अब इस एचबीवाईसी कार्यक्रम में वे 15 माह तक के बच्चों की देखभाल, पोषण ,टीकाकरण, बीमारी की पहचान और रोकथाम तथा आरंभिक बाल विकास हेतु जन्म के तीसरे माह ,छठवे नवंे, बारहवे और पंद्रहवें माह में भी गृह भ्रमण कर आवश्यक सेवाएं प्रदान करेंगी। इसके लिए आशाओं को प्रति शिशु 250 की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। उक्त कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशिक्षक डॉ एके त्रिपाठी निदेशक अभिनव सेवा संस्थान ने बताया कि बाल मृत्यु दर कम करने में यह प्रशिक्षण मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि स्वास्थ विभाग के काफी प्रयास के बाद भी 2020 के अनुसार उत्तर प्रदेश की बाल मृत्यु दर 43, शिशु मृत्यु दर 38 और नवजात शिशु मृत्यु दर 28 प्रति एक हजार जीवित जन्म है। जिसमें 'कुपोषण' 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु का एक बहुत बड़ा कारण है। कुपोषित बच्चों में संक्रमण होने और बार-बार बीमार पड़ने का ज्यादा खतरा रहता है। इस प्रशिक्षण के बाद आशा आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा संगिनी संयुक्त रूप से बच्चों के समुचित पोषण के लिए सामग्री देते हुए उनके वृद्धि की निगरानी करेंगी और बचपन में सामान्यतया होने वाली बीमारियों की पहचान कर खतरे के लक्षण के आधार पर तुरंत हॉस्पिटल जाने के लिए संदर्भित करेगी, इसमें आशाएं जल ,स्वच्छता एवं व्यक्तिगत साफ-सफाई (डब्ल्यूएएसएच)से संबंधित जानकारियों को ग्राम वासियों को बताएंगी जिससे निश्चित ही बाल मृत्यु में कमी आएगी। प्रशिक्षण के दौरान यूनिसेफ के मंडलीय प्रतिनिधि आलोक राय एवं जिले के डीसीपीएम मोहम्मद खुवैब रजा ने निरीक्षण किया और प्रशिक्षण की व्यवस्था और गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया। प्रशिक्षक के रूप में डॉ रामजीत भारती चिकित्सा अधिकारी, डॉ अशोक कुमार त्रिपाठी, मास्टर ट्रेनर हरिश्चंद्र यादव एनजीओ एवं अभय राज सिंह स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी ने योगदान दिया। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजर सत्यव्रत त्रिपाठी ने आशाओं से अपील किया कि आशाएं अपने अपने क्षेत्र के हर बच्चों को 6 माह तक केवल स्तनपान कराने हेतु माताओं को जागरूक करेंगी और 6 माह के पूर्ण होने पर पोषक तत्वों से युक्त पूरक आहार देना प्रारंभ करने की सलाह देगी , पूरक आहार खिलाते समय ध्यान देने योग्य पांच महत्वपूर्ण बातें गाढ़ापन, सघनता, विविधता, मात्रा और आवृत्ति का ध्यान रखेंगे तथा साथ में ही 2 वर्ष तक स्तनपान जारी रखने को भी बताएंगी। इससे बच्चों के शरीर और मस्तिष्क का बेहतर विकास हो सकेगा और एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोभी के अधीक्षक डॉ प्रिंस मोदी ने किया और सबके प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशाओं को हर संभव सहायता देने की प्रतिबद्धता दोहराई ,अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उमा शर्मा विशाल कुमार दुबे सुधाकर मिश्रा और सुभाष चंद्र कनौजिया का योगदान सराहनीय रहा।



