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Poetry: फगुआ

नया सवेरा नेटवर्क

फगुआ 

मदमाइल बाटइ फगुनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां

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शादी बचपन में ही हो गई थी। जब वह शादी का मतलब भी न समझती थी। अट्ठारह बसंत बीत चुके। तमाम मनौतियां मानने के बाद ससुराल से सुदिन आया। बड़ी धूमधाम से विदाई हुई। नात रिश्तेदार विदा हो गए। अभी दो हफ्ते भी न बीते थे कि प्रियतम परदेश जाने के लिए तैयार हो गए। अभी सपने आकार लेने शुरू ही हुए थे कि फिर बिखरने लगे। प्रियतम ने खूब समझाया और वादा किया कि फागुन लगते ही वापस आ जाऊंगा। वह राह जोहते जोहते थक गई। सिसकती,रोती, बिलखती मगर करे भी तो क्या करे। उसने परदेसी बलम को चेतावनी देते हुए कहा -


मदमाइल बाटइ फगुनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


भंवरे गड़ाए कली पे नजरिया

माली न बाटइ बा ओनके खबरिया

घूरत बा बुढ़वा जवनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


जेतने विधुर ओनके तनिकउ न धीरा

देखइं हमइ तउ वो बोलइं कबीरा

दउड़ावइं लइके रंगनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


ससुरू के हमरे बा गजबइ कहनियां

'फागुन में बाबा देवर लागइं रनियां '

कहि-कहि छुवत हैं बदनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


बड़के देवरवा क बतिया निराली

फागुन लगल जबसे ओकरी दिवाली

गलवा छुवइ लइ बहनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


जल्दी से घर आवा ननदी के भइया

खेतिया न चुगि जाए तोहरी,चिरइया

अगिया लगावइ मदनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


फागुन महिनवां में सिसकइ जवनियां

सइयां बेदर्दी न समुझइं कहनियां

हमरा उठावइं न फोनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


परदेसी बलमा क कइसे बताई

सेजिया पे हमरा क आवइ रोवाई

टूटत बा हमरा बदनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


होलिया के जइसन जरे मोरा मनवां

केतना सतइब्या हो हमरे सजनवां

मनब्या न हमरा कहनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


मदमाइल बाटइ फगुनवां पिया

कहूं बहकइ न हमरा कदमवां।


सुरेश मिश्र

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