Mumbai News: पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु की जीवन प्रवास पर आधारित पुस्तक ‘ध्येयधुंद’ का लोकार्पण
नया सवेरा नेटवर्क
मुंबई। “मैं हमेशा सोचता था कि मेरे जैसे एक सामान्य व्यक्ति से इतने कार्य कैसे हो जाते हैं? तब एहसास होता है कि कहीं न कहीं एक दैवी शक्ति होती है, जो हमसे अच्छे कार्य करवाती है। इसलिए आइए, हम सब मिलकर समाजाभिमुख कार्य करें; उस समय वह दैवी शक्ति निश्चित रूप से हमारे साथ खड़ी रहेगी,” ऐसा आह्वान पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने किया। नकुल पार्सेकर द्वारा लिखित और सुरेश प्रभु के जीवनप्रवास पर आधारित ‘ध्येयधुंद’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण समारोह शिवाजी पार्क स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक सभागार में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रभु ने अपने अब तक के सफर में साथ देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। समारोह में सारस्वत बैंक के अध्यक्ष गौतम ठाकुर, एबीपी माझा के संपादक राजीव खांडेकर, वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रफुल्ल छाजेड, कालानिर्णय के कार्यकारी निदेशक जयराज सालगांवकर, नाबाॅर्ड के निदेशक सतीश मराठे, शैलेश हरिभक्ति, जिजाऊ संस्था के संस्थापक निलेश साम्ब्रे, स्वामीराज प्रकाशन के रजनीश राणे, जय अल्पसंख्यक ट्रस्ट की अल्पा शाह तथा वर्धमान श्रुतगंगा ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय शाह सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने की, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभकामनाएं दीं। गौतम ठाकुर ने अपने भाषण में सुरेश प्रभु की निर्णय क्षमता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में लिए गए निर्णयों से सारस्वत बैंक ने बड़ी प्रगति की। रविंद्र चव्हाण ने प्रभु को “परिस” की उपमा देते हुए कहा कि उनके कार्यों से अनेक क्षेत्रों को नई दिशा मिली है। सभी मान्यवरों ने एकमत से कहा कि सुरेश प्रभु ने कभी स्वयं या अपने कार्यों का प्रचार-प्रसार नहीं किया और वे वास्तव में वैश्विक दृष्टि वाले नेता हैं। पुस्तक के लेखक नकुल पार्सेकर ने भी कहा कि प्रभु की एक कार्यकर्ता के रूप में पहचान उनकी ऑक्सफोर्ड डिग्री से भी बड़ी है। ‘ध्येयधुंद’ पुस्तक के सह-प्रकाशक के रूप में बोलते हुए वर्धमान श्रुतगंगा ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय शाह ने कहा कि श्री वर्धमान श्रुतगंगा ट्रस्ट के लिए आज अत्यंत गर्व और आनंद का दिन है, क्योंकि देश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के एक महान व्यक्तित्व के जीवनप्रवास को पुस्तक रूप में दुनिया के सामने लाने का अवसर मिला है। इसके लिए उन्होंने लेखक नकुलजी पार्सेकर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुरेश जी ने जैन समाज के लिए बहुत कार्य किया है, लेकिन उन्होंने कभी उसका श्रेय नहीं लिया। इसलिए आज इस पुस्तक के माध्यम से हम एक बार फिर सुरेश जी से जुड़ पाए हैं - यह हमारे लिए अत्यंत आनंद की बात है। उन्होंने आगे कहा कि जब राजनीति में आदर्शवाद कम होता जा रहा है, तब सुरेश प्रभु आदर्श राजनीति और विकासोन्मुख समाजकारण के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। स्वामीराज प्रकाशन प्रकाशन क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था है और मराठी भाषा के लिए उनका चल रहा अभियान स्वागतयोग्य है। भाषा कोई भी हो, वह जीवित रहनी चाहिए, यह हमारा भी आग्रह है, ऐसा शाह ने स्पष्ट किया। इस अवसर पर संजय शाह ने विशेष घोषणा करते हुए बताया कि ‘ध्येयधुंद’ पुस्तक का संस्कृत संस्करण शीघ्र ही प्रकाशित किया जाएगा। प्रभु और लेखक की औपचारिक अनुमति के पश्चात आगे की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। मराठी संस्करण के बाद पुस्तक के हिंदी और अंग्रेज़ी संस्करण भी जल्द प्रकाशित किए जाएंगे।
कार्यक्रम का संचालन अशोक परब ने किया, जबकि मोहन होडावडेकर ने स्वागत समिति की ओर से आभार प्रदर्शन किया। गानचंद्रिका पद्मजा फेणाणी, डॉ. संजय देशमुख सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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