Azamgarh News : सनबीम स्कूल मुस्कुरा में हुआ साइबर जागरूकता कार्यक्रम
क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम आस्था जायसवाल, प्रभारी साइबर सेल सागर रंगू एवं मुख्य आरक्षी ओम प्रकाश जायसवाल ने दी जानकारी
नया सवेरा नेटवर्क
आजमगढ़। पुलिस महानिदेशक के आदेशानुसार तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक यातायात/नोडल अधिकारी साइबर क्राइम विवेक त्रिपाठी के पर्यवेक्षण में सनबीम स्कूल मुस्कुरा में साइबर जागरूकता कार्यक्रम हुआ।
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उक्त कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम आस्था जायसवाल, प्रभारी साइबर सेल सागर रंगू तथा मुख्य आरक्षी ओम प्रकाश जायसवाल ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया तथा सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने हेतु प्रेरित किया।
इस दौरान छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों जैसे ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल/लिंक, सोशल मीडिया फ्रॉड, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन गेमिंग, जॉब फ्रॉड आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपाय बताये गये। अन्त में उपस्थित छात्र-छात्राओं से अपील की गई कि वे स्वयं सतर्क रहें तथा अपने परिवार एवं समाज को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें।
छात्र-छात्राओं के साथ सीओ ने किया संवाद सत्र
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम आस्था जायसवाल ने छात्र-छात्राओं के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया जिसमें उनके द्वारा पूछे गये साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रश्नों का सरल, स्पष्ट एवं व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। इस दौरान विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर मार्गदर्शन करते हुये उन्होंने बताया कि साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल की जाने वाली कार्यवाही। सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्तियों से संपर्क एवं मित्रता के संभावित खतरे। मोबाइल फोन गुम, चोरी या हैक होने की स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपाय। ऑनलाइन पढ़ाई एवं गेमिंग के दौरान व्यक्तिगत डाटा की गोपनीयता बनाए रखने के उपाय। छात्रों एवं किशोरों के लिए जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग एवं डिजिटल अनुशासन का महत्व। डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) फ्रॉड के संबंध में विशेष जानकारी है।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
छात्र-छात्राओं को बताया गया कि वर्तमान में साइबर अपराधी स्वयं को CBI, पुलिस, ED या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल अथवा फोन कॉल के माध्यम से लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी देते हैं और भय दिखाकर धन की मांग करते हैं। इस संबंध में स्पष्ट किया गया कि भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार का कॉल करे तो उसे तुरंत काट दें, किसी भी प्रकार की धनराशि न भेजें और तत्काल 1930 हेल्पलाइन अथवा नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें।
साइबर हेल्पलाइन एवं वेबसाइट की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध की स्थिति में सहायता प्राप्त करने हेतु उपलब्ध सरकारी माध्यमों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। छात्र-छात्राओं को बताया गया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त की जा सकती है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) — www.cybercrime.gov.in के माध्यम से साइबर अपराध से संबंधित शिकायत ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज करते समय संबंधित साक्ष्य, स्क्रीन शॉट, कॉल डिटेल एवं बैंक विवरण सुरक्षित रखना अत्यन्त आवश्यक है।

