Mumbai News: मुंबई की पाठशालाओं के 27,000 से अधिक विद्यार्थियों ने दी धार्मिक परीक्षा
नया सवेरा नेटवर्क
मुंबई। श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ द्वारा आयोजित वार्षिक धार्मिक परीक्षा में इस वर्ष मुंबई की पाठशालाओं के 27,000 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि यह परीक्षा पहली बार पूरे भारत में एक ही दिन, एक ही समय पर, 100 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर कक्षा 1 से 36 तक आयोजित की गई। यह आयोजन जैन धार्मिक शिक्षा के इतिहास में एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है। इस शुभ अवसर का आरंभ संस्था के उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह तथा कोषाध्यक्ष-ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला एवं जवाहरलाल मोतीलाल शाह के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। शक्तितला स्कूल में आयोजित परीक्षा के दौरान संस्था के पदाधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का दौरा कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन किया। पदाधिकारियों ने कहा, कि पाठशाला ही जैन शासन का प्राण है। पाठशाला में संस्कारित बच्चे आगे चलकर साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका, जैन ट्रस्टी, स्वयंसेवक एवं जैन रक्षक बनकर शासन को सुदृढ़ करते हैं। जिनागम अर्थात श्रुतज्ञान है, और यह श्रुतज्ञान पाठशाला से ही प्राप्त होता है।
गौरतलब हो कि डिजिटल युग में बच्चों को पाठशाला से जोड़ना एक चुनौती बन गया है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए संघ द्वारा जैन डिजिटल पाठशाला कार्यक्रम आरंभ किया गया है, जिसके माध्यम से 5 से 14 वर्ष के बच्चों को आधुनिक तकनीक के सहारे धार्मिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में संघ के मार्गदर्शन में मुंबई में 655 से अधिक पाठशालाओं में 1,400 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं सेवा दे रही हैं तथा 75,000 से अधिक बच्चे नियमित रूप से धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
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इस अवसर पर उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह ने कहा, कि बच्चों में धार्मिक संस्कारों का रोपण करना संस्था का मुख्य उद्देश्य है, और इसकी शुरूआत पाठशाला से ही होती है। जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांत-अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद-जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति सिखाते हैं। जिन बच्चों में धार्मिक संस्कार होते हैं, उनका सर्वांगीण विकास निश्चित होता है और वही जैन शासन को मजबूत बनाते हैं। महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह ने कहा, कि श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ का मुख्य लक्ष्य बच्चों में संस्कारों का रोपण करना है, और इसका प्रथम चरण पाठशाला ही है। पाठशाला ही जैन शासन का प्राण है।
कोषाध्यक्ष-ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला ने कहा, कि श्रुतज्ञान पाठशाला से ही प्राप्त होता है। बच्चों के जीवन निर्माण के लिए पाठशाला सर्वोत्तम साधन है। सम्यक ज्ञान की पर्व समान पाठशाला से जुड़े बच्चों का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होता है।
इस राष्ट्रव्यापी धार्मिक परीक्षा के अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहरलाल मोतीलाल शाह, अध्यक्ष सुरेश देवचंद संघवी, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, कोषाध्यक्ष अशोक नरसिंह चरला तथा महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम में जैन ट्रस्टी, पाठशाला के विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे।

