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Jaunpur News: मनरेगा का दुरुपयोग, मशीनों से काम, मजदूरों के नाम भुगतान

करोड़ों की लूट का आरोप, भुइली ग्राम सभा का मामला

हिम्मत बहादुर सिंह @ नया सवेरा 

जौनपुर। जिले के केराकत तहसील क्षेत्र के विकासखण्ड मुफ्तीगंज के ग्राम सभा भुइली में मनरेगा में करोड़ों की लूट का आरोप सामने आया है। ग्रामसभा भुइली के निवासी विपिन कुमार सिंह (मंटू) और विनीत पाण्डेय ने आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन को पत्र देकर बताया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को ग्राम प्रधान द्वारा व्यक्तिगत लाभ और धन उगाही का जरिया बना दिया गया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा के कार्य जेसीबी एवं ट्रैक्टर मशीनों से कराए जा रहे हैं, जबकि कागजों में फर्जी तरीके से मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगाकर उनके खातों में धनराशि भेजी जाती है। वास्तविकता यह है कि कोई भी मजदूर मौके या कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं रहता।


ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी एवं रोजगार सेवक की मिलीभगत

आरोप है कि पूरे भ्रष्टाचार में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव (सेक्रेटरी) एवं रोजगार सेवक की खुली मिलीभगत बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सभी कार्यों से संबंधित ठोस साक्ष्य एवं प्रमाण उपलब्ध हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। 

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अप्रैल 2025 में चकरोड संख्या 433 पर 4 लाख रुपए से अधिक का घोटाला

अप्रैल 2025 में चकरोड संख्या 433 पर ट्रैक्टर एवं जेसीबी से कार्य कराकर 4 लाख रुपये) से अधिक का भुगतान करा लिया गया, जबकि चकरोड के दोनों ओर खाली खेत और पर्याप्त स्थान उपलब्ध था। इसके बावजूद किसी भी मनरेगा मजदूर से एक दिन भी कार्य नहीं कराया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

चारागाह संख्या 407 में वर्तमान में भी मशीनों से कार्य, भुगतान निकालने की तैयारी

वर्तमान समय में चारागाह संख्या 407 में चकरोड का कार्य लगातार कई दिनों से जेसीबी मशीन द्वारा कराया जा रहा है, और शेष कार्य को भी मशीन से पूरा कराकर और अधिक धनराशि निकालने की तैयारी चल रही है।

अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

आरोप यह भी है कि खंड विकास अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी से कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं है। आरोप है कि अफसरों ने शिकायत सुनने के बाद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी और आंखें बंद कर लीं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या ग्राम प्रधान को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्या अधिकारियों की चुप्पी भ्रष्टाचार में भागीदारी का संकेत है? क्या मनरेगा अब गरीब मजदूरों के लिए नहीं, बल्कि चंद लोगों की कमाई की योजना बन चुकी है?

जहां लाभ, वहीं काम

आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा केवल वही कार्य कराए जा रहे हैं, जहां से उन्हें व्यक्तिगत लाभ और अधिकतम धन निकासी संभव हो, जबकि वास्तविक जनहित और जरूरत वाले कार्यों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

सभी प्रकार के भुगतानों पर तत्काल रोक की मांग

शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जब तक ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए समस्त कार्यों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच नहीं हो जाती, तब तक सभी प्रकार के भुगतानों पर तत्काल रोक लगाई जाए। चकरोड संख्या 433 एवं चारागाह संख्या 407 सहित सभी मनरेगा कार्यों की स्थलीय एवं दस्तावेजी जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने पर ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव एवं रोजगार सेवक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। अवैध रूप से निकाली गई धनराशि की रिकवरी कर सरकारी खाते में जमा कराई जाए। यदि इसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन स्वयं इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है, और तब ग्रामीण लोकायुक्त, मुख्यमंत्री कार्यालय, मीडिया एवं न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।



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