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Poetry: अगर बर्दाश्त कर पाओ तभी आओ सियासत में...

नया सवेरा नेटवर्क

अगर बर्दाश्त कर पाओ  तभी आओ सियासत में। 

नहीं तो काम कुछ कर ही न पाओगे रियासत में।।

सभी को मानके अपना करो हर काम को ही तुम,

यकीं करना नहीं बिल्कुल कभी भी तुम बगावत में। 

झुकाना सर सदा सजदे में रब के सामने अपना,

नहीं कोई कमी करना कभी भी तुम इबादत में।

किया करते जो सबसे प्यार इंसाँ बस उन्हें मानो, 

रहो बिल्कुल नहीं अब तुम किसी की भी खिलाफ़त में 

बितेगी चैन से ये ज़िन्दगी मानो मेरा कहना,

हमेशा ही बिताओ ज़िन्दगी को बस, किफ़ायत में। 

न जाने क्यूँ खफ़ा सारा जहाँ ही आज है मुझसे,

लगाते रहते हैं तोहमत सभी मुझपे अदावत में।

बढ़ो आगे मगर राहें ग़लत बिल्कुल नहीं चुनना,

कभी "आशिक़ " कमी करना नहीं अपनी शराफ़त में।

रमेश चन्द्र सेठ 'आशिक़ जौनपुरी'

*जौनपुर टाईल्स एण्ड सेनेट्री | लाइन बाजार थाने के बगल में जौनपुर | सम्पर्क करें - प्रो. अनुज विक्रम सिंह, मो. 9670770770*
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