Jaunpur News: केसी कॉलेज में हिन्दी पत्रकारिता का वर्तमान रूप पर संगोष्ठी
अहिन्दी भाषी क्षेत्र ने किया हिंदी का तिलक : अमरजीत मिश्र
मुंबई। अहिन्दी भाषी क्षेत्रों ने हमेशा से हिन्दी का तिलक किया है। यह बात हिन्दी पत्रकारिता पर भी अक्षरश: लागू होता है। उक्त उद्गार पूर्व राज्यमंत्री अमरजीत मिश्र ने के.सी. कॉलेज में हिन्दी-विभाग व जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। इससे पूर्व संगोष्ठी की शुरूआत के.सी. कॉलेज की प्रचार्य प्रो. तेजश्री शानभाग के उद्बोधन से हुआ। तत्पश्चात श्री मिश्र ने कहा कि हिंदी का प्रथम समाचार पत्र जहां कोलकाता से शुरू हुआ तो बाबूराव विष्णु पराड़कर ने हिन्दी पत्रकारिता को एक नई पहचान दी। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमें एक संगोष्ठी हिन्दी पत्रकारिता में गैर िहन्दी भाषी लोगों के योगदान पर करनी चाहिए। श्री मिश्र ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समय बदल गया है। अब पत्रकार झोला लेकर चलने वाला नहीं रह गया है। आज पत्रकारिता रोजगार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हो गया है। आज के अनेक पत्रकार ईमानदारी पूर्वक कार्य करते हुए भी करोड़पति हैं। यह बात समझने की जरूरत है। संगोष्ठी का संयोजन हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार राय ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संजय सिंह तथा नाबार्ड के पूर्व उपमहाप्रबंधक अशोक चौहान की विशेष उपस्थिति रही।
आर्थिक लाभ देख निर्धारित लक्ष्य सफल नहीं होते : प्रो. दुबे
संगोष्ठी के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के निवर्तमान कार्याध्यक्ष प्रो. शीतला प्रसाद दुबे ने कहा कि हमें इस बात को समझना होगा कि वर्तमान में पत्रकारिता आज एक प्रमुख रोजगार प्रदाता संस्थान है। आज के पत्रकार, पत्रकारिता के बलबूते करोड़पति बन सकते हैं। लेकिन उन्हें यह बात बखूबी समझनी होगी कि यदि वे करोड़पति बनने के लिए पत्रकारिता में जा रहे हैं तो बिल्कुल न जाएं। क्योंकि हर हर क्षेत्र आपसे एक पेशेवराना समर्पण की मांग करती है, उसमें भी पत्रकारिता में कहीं आधिक की उम्मीद की जाती है।
पत्रकारिता मिशन है, यह कभी धंधा नहीं होगी : गोपाल राय
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि गोपाल राय ने कहा कि पत्रकारिता पहले भी मिशन थी, आज भी मिशन है और आगे भी रहेगी। यह कभी भी धंधा नहीं बनेगी। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि पत्रकारों पर नियंत्रण रखने के लिए जो कानून आजादी से पहले बनाए गए थे, वे आज भी बने हुए है। इतना ही सरकार अपनी विज्ञापन नीतियों एवं अन्य प्रावधानों के माध्यम से पत्रकारों पर नियंत्रण करने का प्रयास करती रहती है। इसके बावजूद पत्रकारिता सतत रूप से प्रगतिपथ पर गतिशील है, ये उसकी सबसे बड़ी सफलता है।
विद्वानों ने विविध विषयों पर रखे विचार
विभिन्न सत्रों में विभाजित संगोष्ठी में दैनिक भास्कर, मुंबई के संपादक भुवेंद्र त्यागी ने पत्रकारिता का बदलता स्वरूप और चुनौतियां, जय महाराष्ट्र के संपादक प्रसाद काथे ने राजनीति और पत्रकारिता का पारस्परिक संबंध, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन के राजभाषा प्रमुख सलीम खान ने हिंदी पत्रकारिता और राजभाषा, रॉयल नॉर्वेजियन महावाणिज्य दूतावास के सलाहकार राहुल माहेश्वरी ने विदेशी नागरिकों की नज़र में भारतीय पत्रकारिता, वरिष्ठ पटकथा एवं संवाद लेखक पवन कुमार ने पत्रकारिता से पटकथा, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक संदीप सोनवलकर ने पत्रकारिता के क्षेत्र में मार्केटिंग और जनसंचार का प्रभाव, टाइम्स नाऊ नवभारत के उप संपादक राकेश त्रिवेदी ने मीडिया संस्थानों का बहुआयामी स्वरूप एवं पत्रकारिता में एआई, पॉडकॉस्टर ईशान वर्मा ने पत्रकारिता का आधुनिक स्वरूप पॉडकास्ट विषय पर एवं रेडियो जॉकी, एफ. एम. रेनबो की स्वाति ने अपने विचार व्यक्त किए। सूत्र संचालन क्रमश: डॉ. अजीत राय, डॉ. विधि अग्रवाल, डॉ. रमा सिंह एवं डॉ. सुधीर कुमार चौबे ने किया आभार ज्ञापन महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहनिदेशक एवं सदस्य सचिव सचिन निंबालकर ने किया।
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