Jaunpur News: पूर्व सांसद उमाकांत यादव को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत, सजा निलंबित
13 अगस्त को जमानत का भी आदेश हो चुका है पारित, अब जेल से जल्द होंगे रिहा
चुनाव लड़ने का रास्ता हुआ साफ, समर्थकों में खुशी की लहर
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मछलीशहर के पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता उमाकांत यादव को 13 अगस्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। 27 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उमाकांत यादव की सजा को निलंबित करने का भी आदेश पारित किया है, जिससे उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। इस आदेश के बाद अब पूर्व सांसद उमाकांत यादव कोई भी चुनाव लड़ सकते हैं। उम्मीद है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वे मैदान में पूरे दमखम के साथ उतरेंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट की डबल बेंच के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति संतोष राय ने अपने फैसले में यह स्पष्ट आदेश किया कि उमाकांत यादव की जो भी सजा निचली अदालत में दी थी, उसे निलंबित किया जाता है, जब तक कि हाई कोर्ट ने पूरे मामले का फैसला नहीं हो जाता। गौरतलब हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता दिनेशकांत यादव, देवव्रत यादव, अजय सिंह यादव, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, राजश्री गुप्ता, रामप्रताप यादव, सुष्मिता राघव ने याचिका दायर कर सजा पर रोक लगाने की मांग की थी, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अपना फैसला 27 अगस्त को सुनाते हुए सजा को निलंबित करने का आदेश जारी किया।
गौरतलब हो कि उमाकांत यादव, आजमगढ़ और जौनपुर के इलाकों में प्रभावशाली नेता रहे हैं। उनके ऊपर 36 से ज़्यादा मामले दर्ज हैं, जिनमें से 25 में उन्हें बरी किया जा चुका है। उन्होंने 1991 से विभिन्न राजनैतिक दलों से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। जौनपुर जिले के शाहगंज रेलवे स्टेशन पर 5 फरवरी 1995 एक जीआरपी सिपाही की हत्या के आरोप में उन्हें उम्रकैद की सज़ा हुई है, जिसके खिलाफ़ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी जहां उन्हें सशर्त ज़मानत 13 अगस्त 2025 को मिल गई थी। हालांकि वे जेल से रिहा नहीं हो पाए हैं।
बता दें कि इस मामले में सात आरोपियों पर पुलिस हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। जिसमें से पूर्व सांसद उमाकांत यादव को भी कोर्ट ने हत्या का आरोपी था। गौरतलब है कि उमाकांत यादव 1991 में बीएसपी से खुटहन विधानसभा से विधायक बने। इसके बाद 1993 में वे सपा बसपा गठबंधन से दूसरी बार इसी सीट से विधायक चुने गए। 1996 के चुनाव में सपा बसपा गठबंधन टूटने के बाद उमाकांत यादव बीएसपी छोड़ समाजवादी पार्टी से विधायक बने। 2002 के विधानसभा चुनाव में उमाकांत यादव ने बीजेपी-जदयू गठबंधन से खुटहन से चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा प्रत्याशी शैलेंद्र यादव ललई से हार गये। 2004 लोकसभा चुनाव में उमाकांत यादव जेल बंद रहते हुए एक बार फिर से मछलीशहर से बीएसपी के टिकट पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी को हराकर सांसद बने थे।
यह भी पढ़ें | Jaunpur News: दुष्कर्म एवं पाक्सो एक्ट के फरार चल रहे आरोपी को किया गिरफ्तार
| विज्ञापन |
.jpg)
.jpg)
.jpg)