Article : सनातन द्रोही ही महान क्यों? | Naya Savera Network

नया सवेरा नेटवर्क

1947 में कथित तौर भारत आजाद हुआ था|कथित इसलिए कह रहा हूँ कि बहुसंख्य सनातनियों के साथ छल किया गया था|क्योंकि अखंड भारत तीन टुकड़े में विभाजित होकर मिला|कतिथ देशभक्त सत्तालोभियों ने हम भारतियों पर शासन करने के लिए बड़ी चालांकी से हम सबके पीठ में ऐसा छूरा घोंपा है कि आज तक उसका घाव रिस रहा है|पहले तो देश बॕटना ही नहीं चाहिए था|देश बॕटने की शर्त पर आजादी लेना ही नहीं चाहिए था|लेकिन सत्तालोभियों को इतनी जल्दी इसलिए थी कि कहीं दूसरे आजादी हांसिल कर लिए तो सत्ता हाँथ निकल जायेगी|और हम लोगों की चाल विफल हो जायेगी|इसलिए आनन फानन में अंग्रेजों की हर शर्त मानते हुए सत्तालोभियों ने बहुसंख्य सनातनियों को गुलाम बनाये रखने की मांसिकता लिए हमारे शासक बन बैठे|और अपने हिसाब से इतिहास लिखवाये|


       छल हम बहुसंख्यकों साथ ही नहीं उनके साथ भी सत्तालोभियों ने किया|बॕटवारा जब हो ही रहा था तो कायदे से होना चाहिए था|जब एक देश धर्म के आधार पर बन रहा था तो,दूसरे को धर्मनिर्पेक्ष क्यों बनाया गया|यही हम सभी भारतियों के साथ सबसे बड़ा छल किया गया|हम समझे की आजाद हो गये|मगर आजादी के बाद दोनों टुकड़ों ने बहुत कुछ गॕवाया|लाखों नर नारी बच्चे काटे गये|महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ|उन्हें वेश्या बनने के लिए मजबूर किया गया|ए सब करने वाले कोई और नहीं थे|सब अपने ही थे|आजादी के पहले जो एक साथ लड़ रहे थे अंग्रेजों से|वही लोग आजादी के बाद अपनों का खून पीने पर उतारू हो गये|क्यों?क्योंकि कतिथ देशभक्तों ने जो भयंकर छल वाला छूरा हम भारतियों की पीठ में घोंपा है वह आज तक निकल ही नहीं पा रहा|जब धर्म के हिसाब से बॕटवारा हो ही गया तो पूरा पूरा करना चाहिए था|आधा अधूरा क्यों? क्यों हम सबको हमेशा धर्म जाति के लिए लड़ते रहने की व्यवस्था कर दी गई|कारण जहाँ तक मैने समझा है वो ए कि पुस्त दर पुस्त सत्ता अपने घर में बनी रहे लोग मरते रहें|हम सत्तासुख भोगते रहेंगे|
        बॕटवारा होने के बाद धुर्त कांग्रेसियों ने ब्रिटिशों के हिसाब से संविधान बनवाया|अपने हिसाब से इतिहास लिखवाया|पाकिस्तान में जितने हिन्दू सिख जैन आदि ने अपने घर आदि छोड़े वो सब मुसमानों ने ले लिया|मगर भारत में जो मुसमानों ने अपने घर आदि छोड़े वह वक्फ बोर्ड बनाकर मुसमानो के ही अधिकार में रखा|जब बॕटवारा धर्म के आधार पर हुआ तो सभी मुसमानों को सुरक्षित पाकिस्तान भेजना चाहिए था|और उधर जितने हिन्दू सिख आदि थे सबको भारत में लाकर बसाना चाहिए था|ऐसा नहीं किया गया|क्योंकि भारत को भी धीरे धीरे गजवा ए हिन्द बनाना था|जिसके लिए यहाँ रुके मुसलमानों को निजी कानून व वक्फ बोर्ड दिया गया|उन्हें धार्मिक शिक्षा मिले इसलिए मदरसे दिये गये|जिसका परिणाम यह हुआ कि कई राज्यों में मुसलमान बहुसंख्य हो गये|आज भारत में पाकिस्तान से अधिक जमीन यहाँ वक्फ बोर्ड के पास है|जरा सोंचिए यदि 2014 में सत्ता परिवर्तन न होता तो हम सनातनियों को रहने के लिए जमीन ही नहीं बचती|और हम गुलामी करने के लिए विवश होते|
        एक छल कांग्रेसियों ने हम सनातनियों के साथ और किया है|इतिहास अपना लिखवा के|अपने को महिमामंडित किया|और सच्चे देशभक्त बलिदानियों को कूड़े के ढेर में डाल दिया|कांग्रेसी कहते हैं कि गाँधी नेहरू परिवार ने कुर्बानी दी है|कितने इस परिवार से फाँसी पर चढ़े हैं|कितने अंग्रेजों की गोली से मरे हैं|यह कोई नहीं बताता|बतायें भी कैसे जब लड़े हों तब न|लेकिन नहीं जब सइयाँ भये कोतवाल तो अब डर काहें का,वाली कहावत चरितार्थ करते हुए देशभक्तों को दहशतगर्द बता दिए|खुद क्रांतिकारी बन गये|सनातनद्रोही सम्राटों को महिमामंडित करते हुए उन्हें महान बनाकर हम लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिए|आजादी के पहले कोई महान शासक नहीं था|मगर आजादी के बाद जितने सनातन द्रोही सम्राट थे|सबके सब महान हो गये|आक्रांता अकबर औरंगजेब सिकंदर अशोक आदि महान हो गये जिन्होंने सनातनियों के ऊपर घोर अत्याचार किए|वो महान हो गये|अब आप लोग विश्मय में होंगे कि अशोक तो हिन्दू सम्राट था|वह सनातन द्रोही कैसे तो,इस भ्रम को दूर किए देते हैं|अशोक भी बौद्ध धर्म को प्रसारित करने के लिए बहुत से सनातनियों का कत्लेआम किया है|उसने भी मुगलों की ही तरह बौद्ध धर्म को विस्तारित करने के लिए अनिगिनत सनातनियों को मरवाया है|जिसने बौद्ध धर्म स्वीकारा वो बचा रह गया|जिसने नहीं स्वीकारा उसका कत्ल करवा दिया|कलिंग युद्ध इसका सबसे बड़ा प्रमाण है|जिसके बाद अशोक के भय से बहुत से देश बौद्ध धर्म अपना लिए|मगर जिनके दम से सनातन बचा है वे गुमनाम हो गये|जो सनातन के लिए घास की रोटी खाये वो परम प्रतापी महाराणा प्रताप जी इतिहास में वो जगह नहीं पाये  जो उन्हें मिलनी चाहिए थी|वीर छत्रपति शिवाजी छत्रपति संभाजी रण कौंशल के धनी पेशवा बाजीराराव प्रथम आदि हमारे इतिहास में ढंग से हैं ही नहीं|उनके पराक्रम उनके बलिदान की कहीं ढंग चर्चा ही नहीं है|नेताजी सुबाष चंद्र बोष चंद्रशेखर आजाद रानी लक्ष्मीबाई दुर्गा भाभी रानी चिनप्पा सुहेलदेव बिरसा मुंडा पं.विस्मिल राजगुरु  रानी दुर्गावती आदि जो आक्राताओं से लड़ते लड़ते बलिदान हुए उनकी महानता के चर्चे हमारे आजादी के बाद के इतिहास से गायब है|चर्चे और महानता के किस्से केवल आक्रांताओं को बताकर हम सनातनियों को आज भी मांसिक रूप से गुलाम ही बनाये रखा गया है|
पं.जमदग्निपुरी



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