Mumbai News : बिना देखें ही रूक्कमणी श्रीकृष्ण को दिल दे बैठी, फिर हुआ गंधर्व विवाह: संत राजकृष्ण शास्त्री | Naya Savera Network
नवी मुम्बई। जब मथुरा के राजा कंस का बध श्रीकृष्ण के हाथों हुआ। इस घटना के उपरांत श्रीकृष्ण वृन्दावन छोड मथुरा रहने लगे। लेकिन कृष्ण को अपने परिवार की याद आने लगी उस समय उद्धव को गोपियों के पास भेजा। विरहनी जीवन में भी गोपियों पर उद्धव की ज्ञान भरी बाते असर न कर सकी। गोपियो ने अपनी अविरल अश्रुधारा बहाकर अपने प्रेम को दर्शाया आज भी ब्रज मण्डल का जल इसी अश्रुधारा के कारण खारेपन का अहसास दिला रहा है। उक्त प्रसंग संत राजकृष्ण शास्त्री ने कोपरखैरणे में विश्व भारती इंग्लिशस्कूल ऐंड कनिष्ठ महाविद्यालय में चल रहे छठे दिन की भागवत कथा के दौरान व्यक्त की।
आगे की कथा में बताया कि श्री कृष्ण का गंधर्व विवाह माता रूक्कमणी से हुआ। प्रसंग ऐसा है कि रूक्कमणी का विवाह चेदिराज शिशुपाल से तय हुआ था। रूक्कमणी मन ही मन श्रीकृष्ण को दिल दे बैठी थी और उन्हें पति के रूप में मान लिया था। रूक्कमणी ने श्रीकृष्ण के पास अपने मन की बात का संदेश अपने सहेली से भिजवाया। जिसे भुवन सुन्दर श्रीकृष्ण ने स्वीकार भी किया और कात्यायनी देवी मन्दिर में पूजन करने के बहाने बुलाया।
वही श्रीकृष्ण आकर रूककमणी के भाई रूक्मी के सैनिकों संग युद्ध में पराजित कर द्वारिका जाकर माता रूक्कमणी से गंधर्व विवाह सम्पन्न कराया। इस तरह दोनों के मिलन की अनूठी कथा है। विवाह के इस दृश्य प्रसंग पर घण्टों नृत्य चलता रहा।भजन गायक हेमन्त ब्रजवासी के सुमधुर कण्ठ से भजनों पर लोग नृत्य करते रहें ।आज कथा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए।कथा विश्राम के दिन ही विशाल भण्डारे की व्यवस्था भी है जिसमें अधिक से अधिक लोगों को आने का अनुरोध प्रबंधक संजीव सिंह ने किया है ।कथा के दौरान प्रधानाचार्या साधना सिंह भी भगवान के विवाह में शामिल होकर नृत्य करती रही।
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