#JaunpurNews: ई.गिरीश चन्द्र सिन्हा "जीवन" स्मृति सभा व काव्यगोष्ठी का आयोजन | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। ई.गिरीश चन्द्र सिन्हा "जीवन" स्मृति सभा व काव्यगोष्ठी का का आयोजन सिटी स्टेशन स्थित निवास स्थान पर हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप अध्यक्ष हिन्दी विभाग,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी और अध्यक्षत व्यंग्य कवि सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। सर्वप्रथम स्मृति शेष कवि गिरीश चन्द्र सिन्हा जीवन के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया, उनके सुपुत्र आलोक रंजन सिन्हा ने उपस्थित जनों का अभिनंदन किया और अपने पिताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला
कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना पथिक जी ने सरस्वती वंदना किया। कवि कमलेश ने अपनी ग़ज़ल "दुनिया के कुछ और चोट खां लूं तो चलूं, दुश्मनों से जरा दोस्ती निभा लूं तो चलो"कवि रूपेश श्रीवास्तव ने "न हिंदू कहो, न मुसलमान कहो, इंसान हो जी, इंसान कहो" कवि राजेश पाण्डेय ने "तू जिस गठरी को ढोता है, मैं उसका भार उठता हूं " कवि अनिल उपाध्याय जी ने "आज करेगा कल पाएगा, यकीनन बुरा कर्म कल्पायेगा।" कवि रामजीत मिश्र ने "जो ख़ासम-ख़ास है वे भी किनारा काट जाते हैं, मुसीबत क्या पड़ी सब छोड़ अपना साथ जाते हैं" कवि गिरीश श्रीवास्तव गिरीश जी ने सरापा इश्क हूं जज्बात हूं मैं । अकेला ही सही बारात हूं मैं । सितारे कैद हैं मुट्ठी में मेरी- कहा किसने की खाली हाथ हूं मैं। कवि फूलचंद भारती ने "प्यार के रास्ते कुछ कठिन है मगर, लोग आए यहां प्यार करते गए" कवि आलोक रंजन सिन्हा जी ने माॅं से इठलाना शीर्षक कविता पढ़ी। कवयित्री दमयंती सिंह ने " हम भारत की नारी है,अबला तुम न समझ लेना " कवि जनार्दन प्रसाद अष्ठाना 'पथिक' ने "पिता छतनार वृक्ष का रूप" पढ़कर पिता के संघर्ष को रेखांकित किया। ग़ज़लकार प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप ने " हजारों नौजवां है और नौकरियां हैं थोड़ी सी, फिर उसके बाद सारी जगहंसाई मार देती है" संचालन कवि अशोक मिश्र एवं धन्यवाद संजय सेठ ने किया। डा० प्रतीक मिश्र, अंसार जौनपुरी, अश्वनी तिवारी उपस्थित रहे।
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