#MumbaiNews: प्रेमचंद का साहित्य विकसित भारत की अवधारणा: प्रो. रामचंद | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
मुंबई। मारवाड़ी महाविद्यालय, दरभंगा के हिंदी विभाग में चल रही द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर रहे (जेएनयू, नई दिल्ली) के प्रो. रामचंद ने कहा कि प्रेमचंद पर मैं ऐसी गोष्ठी अरसे बाद देख रहा हूं जो पूरी तरह से सुव्यवस्थित चली प्रो. रामचंद ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य विकसित भारत की अवधारणा है। मुख्य वक्ता डॉ.अंजनी कुमार श्रीवास्तव (महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी) ने कहा कि हम कृतघनता के युग में हैं। कृतघनता के दृष्टिगत प्रेमचंद को पढ़ना चाहिए उन्होंने कहा प्रेमचंद सामाजिक समरसता की बात करते हैं।
विशिष्ट वक्ता डॉ. रुपेश कुमार सिंह (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र) ने प्रेमचंद के साहित्य को तीन वर्गों में विभाजित कर पश्चात विचारक टालस्टाय व गांधी के प्रभाव को लेकर अपनी बात की।अतिथि वक्ता डॉ. अनूप सिंह (सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय औरंगाबाद बिहार) ने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य में स्वाधीनता आंदोलन से लेकर प्रगतिवाद तक के विभिन्न पक्ष को देख सकते हैं एवं अतिथि वक्ता डॉ. पूनम सिंह (हिन्दू महिला कॉलेज सीतापुर उत्तर प्रदेश) ने प्रेमचंद के साहित्य में आए किसानों व मजदूरों को विश्लेशित करते हुए कहा कि प्रेमचंद किसान बैंक का समर्थन करते हैं । द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन डॉ.गजेंद्र भारद्वाज एवं धन्यवाद मनोज कुमार (शोधार्थी) ने कर अगले सत्र में पुनः उपस्थित होने का आग्रह किया।
सेमिनार के समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. राजेंद्र शाह (जी.डी. महाविद्यालय बेगुसराय) ने प्रेमचंद की साहित्यिक चेतना, मानवीय दृष्टिकोण के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया और अंत में संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु आयोजक मंडल को बधाई तथा संगोष्ठी संयोजक को साधुवाद दिया। साथ में मारवाड़ी महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. दिलीप कुमार एवं बर्सर महोदय ने द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर हिंदी विभाग की सराहना कर आशीर्वचन दिए। मुख्य वक्ता डॉ. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी (झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय रांची) ने प्रेमचंद के रंगभूमि उपन्यास पर चर्चा करते हुए कहा कि राजनीति में जो काम गांधी जी कर रहे थे साहित्य में वही काम प्रेमचंद।
अतिथि वक्ता डॉ. शिव नारायण (डीबीएस कॉलेज कानपुर) ने संगोष्ठी में बात रखते हुए कहते हैं कि प्रेमचंद ब्रिटिश न्यायिक व्यवस्था और भारतीय न्यायिक व्यवस्था की बात करते हैं वक्तव्य में आगे वह कहते हैं कि प्रेमचंद पाठक के मन की बात साहित्य पर करते हैं जिससे पाठक रचना की ओर आकर्षित होता चला जाता है, इन्होंने प्रेमचंद के साहित्य को मुक्तिकामी साहित्य कहा है। अतिथि वक्ता डॉ.रमाशंकर सिंह (सीएमपी डिग्री कॉलेज प्रयागराज) ने सेमिनार का विषय- 'प्रेमचंद को पढ़ते हुए' के व्यावहारिक पक्ष पर बात करते हुए प्रेमचंद के साहित्य को समानुभूति का साहित्य कहा है। अतिथि वक्ता डॉ.रजनीश कुमार यादव (राजेंद्र महाविद्यालय छपरा) प्रेमचंद का रचना कर्म उनके जीवन संघर्ष से जुड़ा है तथा प्रेमचंद व्यक्तिगत जीवन में बहुत सहज व सकारात्मक भाव से घिरे रहने वाले व्यक्ति हैं।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के चारो सत्रों की रिपोर्टिंग मनोज कुमार (शोधार्थी ल.ना.मि.विश्वविद्यालय) ने समापन सत्र में की और वक्ताओं की विस्तृत बातों को बिंदुवार सभी के समक्ष प्रस्तुत किया। समापन सत्र का संचालन डॉ. नीलम सेन (एम.आर.एम. महाविद्यालय दरभंगा) ने किया व डॉ. अनिरुद्ध सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन कर गोष्ठी के समापन की घोषणा की। सेमिनार के दूसरे दिन दोनों सत्रों में देश के कई राज्यों से विभिन्न शोधार्थी एवं शिक्षकों ने अपना शोध पत्र वाचन किया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में शोधार्थी व शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

