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#Poetry: क्या डमरू छंद लिखना आसान है? | #NayaSaveraNetwork



नया सवेरा नेटवर्क

क्या डमरू छंद लिखना आसान है? 

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(सृजन प्रोत्साहन मांगता है )

 वियोग श्रृंगार 

सावन की रिमझिम चालू है, प्रियतम परदेश में हैं। प्रकृति मचल रही है। 
उधर मेघ बरस रहे हैं,इधर नायिका के नैन-

झम-झम बरसत गगन मगन मन,
सरवर लहरत, कर-कर नरतन।

नर तन मचलत,जग मन हरषत,
हलधर तज घर,करम करत वन।

वन-वन सरगम बजत अनवरत,
सरग जरत लख घनन-घनन घन।

घन जस मन पर परत जलद कण,
बरसत नयनन तट, पर झम-झम।

 सुरेश मिश्र

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