#JaunpurNews : भारत के सच्चे प्रजातन्त्रवादी व समाज सुधारक थे शाहू जी महाराज: अरविन्द पटेल | #NayaSaberaNetwork
धूमधाम से मनायी गयी छत्रपति शाहूजी महाराज की जयन्ती
जौनपुर। नगर पंचायत कजगांव में सरदार सेना के कार्यकर्ताओं ने छत्रपति शाहूजी महाराज की जयन्ती धूमधाम से मनायी जहां जिलाध्यक्ष अरविन्द पटेल ने साहू जी महाराज की जीवन काल में किये गये तमाम कार्यों के बारे में बताते हुये उन्होंने कहा कि छत्रपति साहू महाराज भारत के सच्चे प्रजातंत्रवादी और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते थे। वे कोल्हापुर के इतिहास में एक अमूल्य मणि के रूप में आज भी प्रसिद्ध हैं। छत्रपति साहू महाराज ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने राजा होते हुए भी दलित और शोषित वर्ग के कष्ट को समझा और सदा उनसे निकटता बनाए रखी। उन्होंने दलित वर्ग के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। गरीब बच्चों के लिये छात्रावास स्थापित किये और बाहरी बच्चों को शरण-प्रदान करने के आदेश दिये। साहू जी महाराज के शासन के दौरान 'बाल विवाह' पर ईमानदारी से प्रतिबंधित लगाया गया। बाल्यावस्था में ही बालक यशवंत राव को छत्रपति साहू जी महाराज की हैसियत से कोल्हापुर रियासत की राजगद्दी को सम्भालना पड़ा था। छत्रपति साहू जी महाराज की माता राधाबाई मुधोल राज्य की राजकन्या थीं। पिता जयसिंग रॉव उर्फ़ अबा साहेब घाटगे कागल निवासी थे। उनके दत्तक पिता शिवाजी चतुर्थ व दत्तक माता आनंदी बाई थी। श्री पटेल ने कहा कि दलितों की दशा में बदलाव लाने के लिए उन्होंने दो ऐसी विशेष प्रथाओं का अंत किया जो युगांतरकारी साबित हुई। पहला 1917 में उन्होंने उस 'बलूतदारी प्रथा' का अंत किया जिसके तहत एक अछूत को थोड़ी सी जमीन देकर बदले में उससे और उसके परिवार वालों से पूरे गाँव के लिए मुफ्त सेवाएं ली जाती थी। इसी तरह 1918 में उन्होंने कानून बनाकर राज्य की एक और पुरानी प्रथा 'वतनदारी' का अन्त किया तथा भूमि सुधार लागू कर महारों को भू-स्वामी बनने का हक़ दिलाया। इस आदेश से महारों की आर्थिक गुलामी काफी हद तक दूर हो गयी। छत्रपति साहू जी महाराज का निधन 10 मई 1922 मुम्बई में हुआ। महाराज ने पुनर्विवाह को क़ानूनी मान्यता दी थी। उनका समाज के किसी भी वर्ग से किसी भी प्रकार का द्वेष नहीं था। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन की दिशा में जो क्रान्तिकारी उपाय किये थे। वह इतिहास में याद रखे जायेंगे। अन्त में जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि आज का दिन सभी समाज के लोगों इसे एक त्योहार के रूप में मनाने का काम करें। इस अवसर पर श्याम सुन्दर पटेल, वृजेन्द्र पटेल, जंग बहादुर, मुन्ना लाल, विकास पटेल, अमन पटेल, सूर्यमणि, लालमन पटेल, बंशराज गौतम, भोदू यादव, दिनेश राजभर, त्रिलोकी, जुनैद, जिलई, अभिमन्यु पटेल, छोटे लाल, सूरज सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जौनपुर। नगर पंचायत कजगांव में सरदार सेना के कार्यकर्ताओं ने छत्रपति शाहूजी महाराज की जयन्ती धूमधाम से मनायी जहां जिलाध्यक्ष अरविन्द पटेल ने साहू जी महाराज की जीवन काल में किये गये तमाम कार्यों के बारे में बताते हुये उन्होंने कहा कि छत्रपति साहू महाराज भारत के सच्चे प्रजातंत्रवादी और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते थे। वे कोल्हापुर के इतिहास में एक अमूल्य मणि के रूप में आज भी प्रसिद्ध हैं। छत्रपति साहू महाराज ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने राजा होते हुए भी दलित और शोषित वर्ग के कष्ट को समझा और सदा उनसे निकटता बनाए रखी। उन्होंने दलित वर्ग के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। गरीब बच्चों के लिये छात्रावास स्थापित किये और बाहरी बच्चों को शरण-प्रदान करने के आदेश दिये। साहू जी महाराज के शासन के दौरान 'बाल विवाह' पर ईमानदारी से प्रतिबंधित लगाया गया। बाल्यावस्था में ही बालक यशवंत राव को छत्रपति साहू जी महाराज की हैसियत से कोल्हापुर रियासत की राजगद्दी को सम्भालना पड़ा था। छत्रपति साहू जी महाराज की माता राधाबाई मुधोल राज्य की राजकन्या थीं। पिता जयसिंग रॉव उर्फ़ अबा साहेब घाटगे कागल निवासी थे। उनके दत्तक पिता शिवाजी चतुर्थ व दत्तक माता आनंदी बाई थी। श्री पटेल ने कहा कि दलितों की दशा में बदलाव लाने के लिए उन्होंने दो ऐसी विशेष प्रथाओं का अंत किया जो युगांतरकारी साबित हुई। पहला 1917 में उन्होंने उस 'बलूतदारी प्रथा' का अंत किया जिसके तहत एक अछूत को थोड़ी सी जमीन देकर बदले में उससे और उसके परिवार वालों से पूरे गाँव के लिए मुफ्त सेवाएं ली जाती थी। इसी तरह 1918 में उन्होंने कानून बनाकर राज्य की एक और पुरानी प्रथा 'वतनदारी' का अन्त किया तथा भूमि सुधार लागू कर महारों को भू-स्वामी बनने का हक़ दिलाया। इस आदेश से महारों की आर्थिक गुलामी काफी हद तक दूर हो गयी। छत्रपति साहू जी महाराज का निधन 10 मई 1922 मुम्बई में हुआ। महाराज ने पुनर्विवाह को क़ानूनी मान्यता दी थी। उनका समाज के किसी भी वर्ग से किसी भी प्रकार का द्वेष नहीं था। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन की दिशा में जो क्रान्तिकारी उपाय किये थे। वह इतिहास में याद रखे जायेंगे। अन्त में जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि आज का दिन सभी समाज के लोगों इसे एक त्योहार के रूप में मनाने का काम करें। इस अवसर पर श्याम सुन्दर पटेल, वृजेन्द्र पटेल, जंग बहादुर, मुन्ना लाल, विकास पटेल, अमन पटेल, सूर्यमणि, लालमन पटेल, बंशराज गौतम, भोदू यादव, दिनेश राजभर, त्रिलोकी, जुनैद, जिलई, अभिमन्यु पटेल, छोटे लाल, सूरज सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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