#Article : मुद्रालोन और सरकार के दावे सफेद हाँथी ही साबित हो रहे | #NayaSaveraNetwork
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| पं.जमदग्निपुरी |
नया सवेरा नेटवर्क
2014 में जब भाजपा की सरकार आई तो कई लोक लुभावनी स्कीम भी लेकर आई। जिसमें कई तो पूरी होती दिख भी रही है। उन्ही लोक लुभावनी स्कीम में एक स्कीम यह भी थी कि गरीबों को बिना गारंटी और बिना गारंटर के व्यवसाय के लिए लोन दिया जायेगा। जिससे लोग स्वावलम्बी बने और स्वरोजगार स्थापित कर रोजगार उत्पन्न कर सकें सरकार की मंशा तो उत्तम थी और है भी मगर जब कोई गरीब बेरोजगार बैंक में मुद्रा लोन लेने जाता है तो उसे वही पुरानी प्रक्रिया बताकर बैंक वाले बेरंग लौटा देते हैं कहते हैं मुद्रा बैंक से मुद्रा लेनी है तो पहले बैंक में मुद्रा डालो कम से कम बैंक में छ: महीना का लेन देन करो वो भी करेंट एकाउंट में|तब जाकर आपको लघु उद्योग के लिए व्यवसाय के लिए लोन मिल पायेगा।
अब बताइए जिसके पास इतना पैसा है कि वह करेंट एकाउंट में लेन देन कर सके तो उसे लाख दो लाख का लोन लेने की जरूरत ही क्या है मुद्रा लोन चाहे सरकारी पेंच से या बैंको की बदमाशी से, सिर्फ और सिर्फ सफेद हाँथी ही साबित हो रहा है,गरीबों के लि | यहाँ एक बात बहुत ही स्पष्ट साबित हो रही है| गाँव में पहले नौटंकी बहुत होती थी| उसमें एक जोकर होता था| तो एक जोकर ने अपने साथी से कहा हाँथ ऊपर करके कि मैने आज इतना बड़ा खरगोस देखा| साथी अचम्भित,बोला चल भाग, कहीं इतना बड़ा खरगोस होता है| तो उसने कहा कि होता है| तुम केवल ऊपर वाला ही हाँथ देखे| नीचे वाला तो देखे ही नहीं|वही बात इस मुद्रा लोन में हो रही है| बैंक वाले कहते हैं कि जनता ने सिर्फ भाषण सुना मगर उसकी नुक्ता चीनी मतलब उसकी अच्छाई या कठिनाई के बारे में जाना ही नहीं|यह भी गरीब जनता के साथ खुला छल है।
उसकी उम्मीद जगाकर उम्मीदों पर पानी फेरना है। यदि मुद्रा लोन बिना गारंटी सरकार दे रही हैं जैसा कि प्रचार में और कई बार सरकार खुद मंच से जनता को कह चुकी है। उसके बावजूद भी यदि बैंक गारंटी माँग रहा है तो क्यों? कहीं उपरोक्त खरहे वाली ही बात तो सरकार जनता को बता सपने तो नहीं दिखा रही है। क्योंकि बैंक नियमों का हवाला देकर मुद्रा लोन रूपी गुब्बारे का हवा निकाल गरीबों के अरमानो पर पानी फेर दे रही हैं। मुद्रा लोन भी वही पा रहा है जो अमीर है। यहाँ भी गरीबों का हक मारा जा रहा है। मुद्रा लोन का फायदा अमीर और बड़े दुकानदार उठा रहे हैं सरकार कहती थी यह लोन बिना झंझट के रेढ़ी वाला भी प्राप्त करके खुद की आमदनी बढ़ाकर दुकान खरीद सकता है और कम से कम एक रोजगार उत्पन्न कर सकता है।
मगर ऐसा हो नहीं पा रहा। क्योंकि बैंके रेढ़ी लगाने वाले से डोमिसाईल, गुमास्ता, उद्यम आधार, आधार कार्ड पेनकार्ड के साथ बैंक में करेंट एकाउंट माँग रही हैं। उसमें भी कम से कम 6 महीने का लेन देन माँग रही हैं। जो कि एक रेढ़ी वाले के पास कहाँ उपलब्ध है। कहने का मतलब ये कि कथनी और करनी में बहुत अंतर है। इस अंतर को सरकार या तो पाटे या बेमतलब के जनता को बेवकूफ न बनाय वैसे भी 2 करोड़ रोजगार देने की बात को जुमला बता चुकी है। तो इसे भी जुमला बताकर पल्ला झाड़ ले कम से कम जनता सफेद हाँथी देखने के लिए अपना कीमती समय बर्वाद तो न करे।
पं.जमदग्निपुरी
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