मीरा रोड: लोकार्पित हुई हृदयेश मयंक की 'सिवान में बांसुरी' | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
मीरा रोड। कवि हृदयेश मयंक का सद्यः प्रकाशित कविता संग्रह 'सिवान में बांसुरी' का विमोचन सुप्रसिद्ध कवि राजेश जोशी के हाथों संपन्न हुआ। आयोजन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि विनोदास ने की।
इस अवसर पर राजेश जोशी ने कहा कि
'कविता में इतनी ताकत होती है कि वह पूरे कौम को नया जीवन दे सकती है। राजेश जोशी ने यह बात पाबलो नेरुदा का उल्लेख करते हुए जनवादी लेखक संघ और स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अपने काव्य पाठ और हृदयेश मयंक के सद्य: प्रकाशित कृति ' सिवान में बांसुरी' के विमोचन के अवसर पर मीरा रोड के विरूंगला केन्द्र में कही । हृदयेश मयंक को राजेश जोशी ने एक एक्टीविस्ट कवि बताया और कहा कि उनकी कविताओं में गीतकार का तत्व मौजूद है, भले ही उनकी रचनाएं फ्री वर्स में हमारे सामने परोसी गई हैं। उनके अपने संग्रह से 'उलंघन' कविता को पढ़ते हुए बताया कि यह कविता मुक्तिबोध की पक्षी और दीमक नामक कहानी के करीब है। इसके अलावा उन्होंने गांधी, रोशनी, मैं झुकता हूं, इत्यादि ,मेरा नया टेलीफोन नंबर नामक कविताओं का पाठ किया । श्रोताओं की मांग पर उन्होंने अपनी चर्चित रचना 'मारे जाएंगे' का पाठ किया। यद्यपि इस कविता का पाठ सिनेमा और रंग कर्मी अजय रोहिल्ला ने पहले किया था। उनकी कविता पाठ के पहले डॉ मधुबाला शुक्ला ने मयंक जी कविता ' पगले घर में रहना सीख' पाठ बड़े खुशनुमा अंदाज में किया। इस बीच रमन मिश्र ने जनवादी लेखक संघ की महाराष्ट्र ईकाई की नव गठित कमेटी में सुधा अरोड़ा को अध्यक्ष और संजय विसे को सचिव पद पर नियुक्त होने की जानकारी की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विनोद दास ने मयंक के कृति की छपाई की प्रशंसा की और पुस्तक पर शैलेष के द्वारा व्यक्त विचारों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि मयंक जी के संग्रह में गांव अवश्य होता है। उन्होंने राजेश जोशी के रचना कर्म पर बोलते हुए कहा कि राजेश जोशी केवल कवि नही है,वह एक बहुत अच्छे आलोचक हैं।यदि कवियों पर राजेश की आलोचना आप पढ़ेंगे तो तथाकथित और स्थापित समालोचकों को भूल जाएंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने माने लेखक और कवि विनोद दास ने की जबकि कार्यक्रम का संचालन शैलेष के द्वारा किया गया। उन्होंने मयंक के साथ अपने जीवन का भी संस्मरण सुनाया। इस आयोजन में साहित्य, संगीत, कला, सिनेमा, शिक्षा, पत्रकारिता और नाटक की दुनियां की ख्यातिलब्ध हस्तियां उपस्थित थीं। आमंत्रित सभी लोगों के प्रति हरिप्रसाद राय ने आभार माना।
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