फ़ायर का एक्शन - अमेरिका में टेंशन | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
- अमेरिका में एक सदी के इतिहास में जंगलों में आग की सबसे भयानक घातक घटना
- अमेरिकी जंगलों में आग - पीड़ितों पर भारत ने दुखी हूं कहकर अमेरिका के साथ अपनी एकजुट व्यक्त की है - एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया
गोंदिया- आदि अनादि काल से कुदरत का कहर जब टूटता है तो वह किसी राष्ट्र, देश, मानव, व्यक्ति या समाज को नहीं देखता बस अपना कहर बरसाकर सैकड़ो हजारों जीवों को लीलकर एक सन्नाटा छोड़कर चला जाता है, जो हम प्रत्यक्ष रूप में भारत सहित अनेको विकसित देशों में देख चुके हैं। हम ऐसा अनेकों पाठ्य संसाधनों में पढ़ चुके हैं कि इस प्राकृतिक आपदाओं का ज्ञाता मानवीय जीव ही है। दूसरे शब्दों में प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ कर उन्हें जर्जर हालत में पहुंचने वाला मानवीय जीव है, जिसका परिणाम उनकी अगली पीढ़ियों को भुगतना पड़ रहा है, इसकी एक इकाई के रूप में जलवायु परिवर्तन समस्या में देखा जा रहा है, जिसपर सैकड़ो देशों ने मिलकर पेरिस समझौता किया है जिसके अनुसार सभी देश उत्सर्जन को काम करनें में लगे हुए हैं।भारत के हिमाचल प्रदेश में भी दिनांक 18 अगस्त 2023 को सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर आज राज्य आपदा घोषित की गई है।चूंकि पिछले अनेक दिनों से अमेरिका के हवाई द्वीप के जंगलों में आग का तांडव देखने को मिल रहा है जिसपर भारतीय दूतावास ने भी, दुखी हूं कहकर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अमेरिका के साथ अपनी एकजुट व्यक्त की है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,अमेरिका में एक सदी के इतिहास में जंगलों में आग की सबसे भयानक घातक घटना।
साथियों बात अगर हम अमेरिका में आग की करें तो, हवाई द्वीप के जंगलों में आग का तांडव देखने को मिल रहा है। आग इतनी ज्यादा है कि उसने कई शहरों को चपेट में ले लिया। हवाई स्थित माउई के सुरम्य शहर में लगी आग से अब तक 110 लोगों की मौत हो गई है। जंगलों में लगी आग अमेरिकी इतिहास में सदी की सबसे घातक आग की घटना बन गई है। नए आँकड़ों ने उत्तरी कैलिफोर्निया में 2018 कैंप फायर में मारे गए लोगों की संख्या को भी पार कर लिया है। उस हादसे में 85 लोग मारे गए थे। ऐसा आलम एक सदी पहले, 1918 में सूखाग्रस्त उत्तरी मिनेसोटा में लगी आग के दौरान देखा गया था जिसमें करीब 453 लोगों की मौत हो गई थी। आग कई इलाकों में फैल गई थी, जिसमें हजारों घर नष्ट हो गए थे और सैकड़ों लोग मारे गए थे। सोशल मीडिया पर सामने आई कई वीडियो पर हवाई के शहरों का बुरा हाल दिख रहा है। लाहैना शहर के अधिकांश हिस्से वीरान हो चुके हैं। इमारतें हो या कारें सब राख हैं। हजारों लोग मिल नहीं रहे हैं।हवाई द्वीप का लाहैना शहर पूरी तरह तबाह हो चुका है। हजारों गाड़ियां राख बन चुकी है, मकान खंडहर है और कई लोगों की जिंगदियां खत्म हो गई हैं। शहर की हजारों इमारतें आग की चपेट में आई हैं।माउई में कम से कम दो अन्य जगहों पर भी आग की लपटें पहुंच गई हैं। हालांकि, इससे अब तक किसी के मरने की सूचना नहीं है। दक्षिण माउई के किहेई और पहाड़ी क्षेत्र में ये आग लगी है। बताते चलें कि हवाई के माउई में स्थित लहैना मेंमंगलवार, 8 अगस्त को आग भड़क उठी थी जो अभी तक जारी है।आग लगने की वजह अभी साफ नहीं है। माना जा रहा है कि तापमान बढ़ने और तेज हवाओं से आग लगी है. आग के कारण पूरा ऐतिहासिक रिसॉर्ट शहर नष्ट हो गया। इस आग ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों और गाड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया. मीडियम उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लहैना के रेनोवेशन की लागत करीब 5.5 बिलियन डॉलर यानी 45 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है।अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जंगलों की आग शहर के पेड़ों की जड़ों तक पहुंच चुकी है। हेलिकॉप्टरों से आग बुझाने के लिए पानी फेंके जाने के बावजुद जमीन के नीचे पेड़ों की जड़ें जल रही हैं, जिससे आग के फिर से फैलने का खतरा है,अधिकारियों और रेस्क्यू वर्कर्स ने माउई में 85 फीसदी आग पर काबू पा लिया है। गवर्नर के मुताबिक, हर दिन करीब 15 हजार लोगों को घर छोड़ना पड़ा है। वहीं जो लोग अब वापस लौट रहे हैं वो अपने जले हुए घरों को देखकर सदमे में हैं। हवाई के कहुलुई एयरपोर्ट के एक रनवे को राहत सामग्री के लिए रिजर्व कर दिया गया है।मीडिया छपी खबर के मुताबिक गवर्नर ने बताया, ये आग निश्चित रूप से हवाई में अब तक की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा है।हम केवल उन लोगों की मदद कर सकते हैं, जो जिंदा हैं. अब हमारा ध्यान लोगों को फिर से एकजुट करना, उन्हें घर दिलाना और उनके स्वास्थ्य की देखभाल करना है. और फिर शहर का पुनर्निर्माण करना है, आग की घटना में अपने घर खोने वाले लोगों के लिए हमनें एक हज़ार होटल के कमरे बुक किए हैं।साथ ही उन परिवारों के लिए किराए के मकान की मुफ्त में व्यवस्था कर रहे हैं। 1,400 से अधिक लोगों को इमरजेंसी शेल्टर्स में ले जाया जा चुका है।
साथियों बात अगर हम इस आग पर भारतीय दूतावास की संवेदना और एक पेड़ की करेंतो,अमेरिका में भारतीय दूतावास को गहरा दुख हुआ है और उसने हवाई में जंगल की आग के पीड़ितों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है, जिसके परिणामस्वरूप 110 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। उन्होंने कहा हवाई के माउई में विनाशकारी जंगल की आग से बहुत दुखी हूं। इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएँ शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। भारतीय दूतावास ने एक ट्वीट में कहा, हम प्रार्थना करते हैं कि स्थानीय समुदाय को ताकत मिले और स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाए। इससे पहले आग की वजह से भारत से इम्पोर्ट किया गया अमेरिका का सबसे बड़ा और 150 साल पुराना बरगद का पेड़ भी जल गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, रेस्क्यू वर्कर्स अब तक कम इलाके तक ही पहुंच पाए हैं। इसकी वजह से आने वाले दिनों में मरने वाले लोगों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की आशंका है।
साथियों बात अगर हम अमेरिका में लगी आग के अंदाज की करें तो, यह 100 साल के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा साबित हुई है, इससे पहले हवाई के अमेरिकी राज्य बनने के बाद साल 1960 में आई सुनामी में 61 लोगों की मौत हुई थी।.बीते दिनों से भड़की इस आग का अंदाजा चार दिन बाद हु। इस प्राकृतिक आपदा ने ऐतिहासिक रिसॉर्ट शहर को नष्ट कर दिया और बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिसमें 2200 से अधिक संरचनाएं क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गईं जबकि 2100 एकड़ से अधिक जगह जलकर खाक हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि मोबाइल नेटवर्क की विफलता, तेज हवा के झोंके और कई मील दूर एक अलग जंगल की आग शामिल है, जिससे इमरजेंसी एजेंसियों के साथ सही समय पर चेतावनी और वहां से लोगों के निकलने को लेकर समन्वय नहीं हो पाया, जिसकी वजह से हमें ज्यादानुकसान उठाना पड़ा।
साथियों बात अगर हम व्हाइट हाउस के बयान की करें तो, बीते दिनों, अमेरिकी राष्ट्रपति ने हवाई जंगल की आग को बड़ी आपदा घोषित किया और 8 अगस्त से जंगल की आग से प्रभावित क्षेत्रों में राज्य और स्थानीय पुनर्प्राप्ति प्रयासों के पूरक के लिए संघीय सहायता का आदेश दिया। बिडेन का कार्रवाई माउई काउंटी में प्रभावित लोगों को संघीय वित्त पोषण उपलब्ध कराती है। व्हाइट हाउस के एक बयान में कहा गया है,आज, राष्ट्रपति ने घोषणा की कि हवाई राज्य में एक बड़ी आपदा मौजूद है और जंगल की आग से प्रभावित क्षेत्रों में राज्य और स्थानीय पुनर्प्राप्ति प्रयासों के पूरक के लिए संघीय सहायता का आदेश दिया।
साथियों बात अगर हम कनाडा जंगलों में आग लगने के संभावित कारणों की करें तो, कनाडा में जंगल की आग को बाढ़ के बाद सबसे बड़ी आपदा माना जाता है। जंगल की आग से हर साल 4 मिलियन स्कवायर किलोमीटर का इलाका जल जाता है। आग जलने के लिए हीट,ईंधन औरऑक्सीजन जरूरी होतेहैं।जंगल मेंऑक्सीजन हवा में ही मौजूद होती है। पेड़ों की सूखी टहनियां और पत्ते ईंधन का काम करते हैं। वहीं एक छोटी सी चिंगारी हीट का काम कर सकती है।ज्यादातर आग गर्मी के मौसम में लगती है। इस मौसम में एक हल्की चिंगारी ही पूरे जंगल को आग की चपेट में लेने के लिए काफी होती है। ये चिंगारी पेड़ों की टहनियों के आपस में रगड़ खाने से या सूरज की तेज किरणें भी कई बार भड़क जाती हैं। गर्मी में पेड़ों की टहनियां और शाखाएं सूख जाती हैं, जो आसानी से आग पकड़ लेती हैं। एक बार आग लगने पर इसे हवा बढ़ावा देती है। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से बिजली गिरने,ज्वालामुखी और कोयले के जलने की वजह से भी जंगल में आग लग सकती है। फिलहाल तापमान में बढ़ोतरी को कनाडा में लगी आग की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि फ़ायर का एक्शन - अमेरिका में टेंशन।अमेरिका में एक सदी के इतिहास में जंगलों में आग की सबसे भयानक घातक घटना।अमेरिकी जंगलों में आग - पीड़ितों पर भारत ने दुखी हूं कहकर अमेरिका के साथ अपनी एकजुट व्यक्त की है।
-संकलनकर्ता लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
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