पिता | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
पिता
पिता ने जीवन दिया
जिंदगी को पावन किया,
हम रोते रहे खिलौने के लिए
पिता ने तन बेच कर खिलौना दिया ।
हम खेलते खेलते थोड़े बड़े हुए
पिता के सामने पैर पर खड़े हुए,
देखकर हमे पिता ने मुस्कुरा दिया
इतने में एक खिलौना और ला दिया ।
फिर किशोरावस्था में हम आए
थोड़ा सा पिता से जुबान लड़ाए,
इतने में पिता जी कुर्सी से उठे
और दो कान के नीचे लगाए ।
धीरे धीरे पिता की उम्र ढल गई
हमारे ऊपर जिम्मेदारी पड़ गई,
हम भी शहर को कमाने चल दिए
अपने कल को बेहतर बनाने चल दिए ।
पैसा बहुत कमाया हमने
दोस्त बहुत बनाया हमने
पिताजी की बातों को भूलकर
गलत आदतों का साथ निभाया हमने ।
पिता ने कहा कि बेटा सुधार कर लो
जीवन में कुछ अच्छा कर लो,
उनकी बात विष के समान लगी
गलत संगति अति प्रबल हुई।
एक दिन पिता ने घर से निकाला
किसी ने नहीं खिलाया एक निवाला ,
दो दिन भूखा रहा तो समझ आया
मैं कितना खुशकिस्मत हूं जो मैंने पिता का साथ पाया।
कदर कर लो बाप की
ये बड़ी किस्मत से मिले हैं,
कुछ ऐसे भी घर हैं बिना पिता के
जिनके घर के चूल्हे आज भी ठंडे पड़े हैं।
पिता की बात का बुरा मत मानना
वो कहते हैं तो तुम्हारा भला ही होगा
क्युकी इतनी बड़ी दुनिया में हम अनजाने से है
पिता से भी सगा क्या कोई होगा ?
रितेश मौर्य
जौनपुर , उत्तर प्रदेश

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