महावीर | #NayaSaveraNetwork
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महावीर
प्रेम अहिसा के पथ पर जब
मानव स्वयं न चलता है।
ख्वाबों में बोता है कांटा
जीवन यूँ ही ढलता है।
सोच सोच के मैं घबराता
ये मानव कितना घाती है।
हे महावीर स्वामी मुझको
तब याद तुम्हारी आती है।
गुलशन की कलियों के ऊपर
नजर लगाए बैठे हैं।
होशो हवासों के परदे को
कबके तोड़े बैठे हैं।
गांजा अफीम चरस में उनकी
रातें रोज गुजरती हैं।
हे महावीर स्वामी ......
कितनी उथल पुथल दुनिया में
खून की धारा बहती है।
अहंकार की देखो मिसाइल
बिजली जैसी गिरती है।
डॉलर के चक्कर में लाशें
श्मशानों में सजती हैं।
हे महावीर स्वामी...
रामकेश एम यादव(कवि,साहित्यकार),मुंबई
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