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Article: गुरु परम्परा और गुरुओं का देश के प्रति बलिदान | Naya Savera Network



नया सवेरा नेटवर्क

हमारे आर्यावर्त में गुरु परम्परा चलती थी|जो मानव को विकसित करती थी|मानव को मानव बनाती थी|यदि गुरू रहने खाने के तौर तरीके सिखाते थे तो,खुद की , दीन दुखियों की व देश की सुरक्षा कैसे हो,इसलिए शास्त्र के साथ अस्त्र शस्त्र की भी शिक्षा देते थे|मानव में नैतिकता का बीजारोपण करते थे|समाज संतुलित व सुचारु रूप से गतिमान रहे,यह सीख गुरु ही सिखाते थे|और समय समय पर देश धर्म की रक्षा के लिए बलिदान भी दिए हैं|असहनीय यातनायें सहे प्राण तक दे दिए,मगर देश और धर्म पर जीते जी आँच नहीं आने दिए|गुरुओं का देश और धर्म के लिए बलिदान और योगदान अतुलनीय और अवर्णनीय है|आदि काल से लेकर आज तक अनेक किस्से गुरुओं के बलिदान से भरे पड़े हैं|ये अलग बात है कि बीच के दिनों में देशद्रोही,कुंठित मांसिकता,भारतीय संसकृति,भारतीयता,भारतीय परम्पराओं से जलन रखने वालों ने खुद को बड़का बलिदानी और खुद के परिवार के देश के प्रति किए कुकर्मो को ही देशभक्ति से जोड़कर प्रचारित व प्रसारित किए|गुरुकुल को समाप्त कर कान्वेंट मदरसों का तीब्रगति से विस्तार किए,गुरु की जगह सर,मास्टर,सिस्टर फादर,मौलवी,परम्परा का उदय कर गुरु परम्परा का विनाश किये|जिसका परिणाम यह हो रहा है कि आज समाज विद्रुप होते जा रहा है|मानव धर्म विमुख कार्य करने लगा है|ऐसा लग रहा है जैसे रक्ष संस्कृति पुन: फन उठाने लगी है|माता पिता श्रेष्ठ ,साधु संतो का मान अब कोई करना नहीं चाहता|आदि काल में हमारे देश में एक ही आश्रम होता था,वो था गुरुओं का आश्रम,आज हमारे आर्यावर्त में महिला आश्रम,बृद्धाश्रम,अनाथ आश्रम,और पता नहीं कौन कौन से नित नये आश्रम बनते जा रहे है|ये सब इसलिए खुल रहे हैं कि गुरु परम्परा को तहस नहस कर दिया गया|और मैकाले की शिक्षा को अंगीकार कर लिया गया|गुरुओं के बलिदान को लोग भुला दिए|जिसे सदैव याद रखना चाहिए था|आक्रांताओ के गुण गाये जा रहे हैं|देश द्रोहियों को देश भक्त और शहीद बताया जा रहा है|देश द्रोहियों के लिए ही हम आज देश जलाने के लिए तत्पर हैं|उन तमाम गुरु परम्परा के संरक्षकों को उन बलिदानियों को जो देश व धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व निछावर कर दिए,उन्हें हम भुला दिए|उनके लिए हम जान देने के लिए तत्पर हैं,जिन्होंने देश और देशवासियों के साथ केवल और केवल छल किया|ऐसा इसलिए कि हम पढ़ते नहीं हैं|यदि पढ़ भी लिए किसी तरह तो गुनते नहीं हैं|विचार नहीं करते|इसीलिए कहना पड़ रहा है|

"एक दुष्ट सयाना आइ कहा,कान ले गया कागा|
दौड़ाया न कर्ण तपाशा,महा मंदमति मूढ़ अभागा||
थक के थेथर हो गया,जब काग मिला नहिं कान|
कर्ण से कर स्पर्श हुआ,तब मूढ़ मंदमति जागा"||
        जिस गुरु परम्परा पर आर्यावर्त गर्व करता था|जिन गुरुओं के बलिदान से आज हम खुली हवा में आजादी से सांस ले रहे हैं,पूरे विश्व में आजादी से विचरण कर रहे हैं,उनके बलिदान को इतनी जल्दी भुला दिए|कितने नीमहराम हैं हम|बहुत दिनों की बात नहीं है|जब आर्यावर्त पर म्लेच्छों की नजर पड़ी|तब उनके प्रतिकार के लिए,देश धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहे,इसलिए सिख पंथ की स्थापना सिख पंथ के प्रथम गुरु पुण्यात्मा परम पूज्य गुरुनानक देव जी ने की|उनके बताये हुए मार्ग पर चलते हुए अनेक सिख पंथ के गुरुओं ने और नौजवानो ने देश धर्म की रक्षा के लिए सपरिवार कुर्बानी दिए|चाहे गुरु अंगद देव जी हों,गुरु अर्जुन देव हो,गुरु हर गोविंद जी हों,गुरु तेग बहादुर जी हों या दसवें गुरु,गुरु गोविंद जी हों,सिख पंथ के दस के दसों गुरुओं ने देश व धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व निछावर कर दिया|लेकिन उफ तक नहीं किए|इसमें गुरु गोविंद सिंह जी का नाम सर्वोपरि है|जब मुगलों ने बारी बारी से परिवार के एक एक सदस्यों की बड़ी ही निर्ममता से हत्यायें की और दबाव बनाया धर्म बदलने की,मगर पूरा परिवार धर्म के रक्षार्थ कठोर यातनायें सहते हुए कुर्बान हो गया|मगर टस से मस नहीं हुआ|गुरु गोविंद सिंह जी का परिवार 21 दिसम्बर से लेकर 27 दिसम्बर एक सप्ताह के भीतर मुगलों द्वारा कत्ल कर दिया गया|जिसमें उनके दो पुत्र बाबा अजीत सिंह व बाबा जुझार सिंह लड़ते हुए शहीद हो गये|बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जिनकी उम्र मात्र 9 व 7 वर्ष थी,जिन्दा दिवाल में चुनवा दिया म्लेच्छों ने,मगर उनके मजबूत इरादों को नहीं तोड़ पाये|ऐसे बलिनियों को भूला दिये|इन बलिदानियों का तो अधिकतम लोगों को न तो जन्मदिन याद होगा न ही बलिदान दिन|हम तो उनके जन्मदिन को बालदिवस मना रहे हैं जो देश के साथ केवल और केवल छल किए|हम उनके जन्म दिन और मृत्यु दिन मना रहे हैं|जिन्होंने सिर्फ औ सिर्फ धोखा दिया है|रानी लक्ष्मीबाई,मंगल पाण्डेय,भगत सिंह, राजगुरु,सुखदेव,चंद्रशेखर,बाल गंगाधर तिलक,नेताजी सुबाष चंद्र बोष,जैसे क्रांतिवीरों को भुलाते जा रहे हैं|वीर छत्रपति शिवाजी,महा राणाप्रताप,छत्रपति शंभू राजे,बाजीराव प्रथम आदि को गर्त में ढकेलते हुए हिन्द और हिन्दूद्रोहियों मुगलों म्लेच्छों आक्रांताओं को महान बनाते जा रहे हैं|जिस गुरु परम्परा के बूते सिख पंथ स्थापित हुआ|आज वही सिख पंथ के कुछ गद्दार गुरुनानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद जी तक के बलिदान पर पानी फेर रहे हैं|उनके बताये हुए मार्ग से इतर म्लेच्छों के मार्ग पर चलते हुए पवित्र सिख पंथ को बदनाम कर रहे हैं|और 1947 के बाद की भारत सरकार ने गुरु गोविंद जी के सपरिवार बलिदान को कूड़े के ढेर में डाल दी|और अकबर जैसे आक्रमणकारी आतताई हिन्दू द्रोहियों को इतिहास में महान बताकर स्थापित कर दी|हमारे गौरवशाली इतिहास को दबा दिया|और खुद को महिमामंडित करते हुए भारत रत्न जैसी उपाधि ले ली|और वो सभी सुख ले लिए और ले रहे हैं|जो तब के राजाओं को भी नशीब नहीं हुआ था|आज शहीदी दिवस के तीसरे दिन गुरु गोविंद जी के साथ उनके अमर सपूतों को और उनकी धर्मशीला अर्धागिनी को जो देश धर्म की रक्षा के लिए बलिदान हो गईं,काव्यसृजन परिवार के साथ सभी देश भक्त देशवासी गर्व से नमन कर रहे हैं|और भाव पूर्ण अपने दिलों में पुर्नस्थापित कर रहे हैं|
पं.जमदग्निपुरी

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