शीर्षक: पास आओ कि जिंदगी कम है | #NayaSaveraNetwork
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पास आओ कि जिंदगी कम है
पास आओ कि जिंदगी कम है,
तुम नहीं हो तो हर खुशी गम है।
सामने होते तो हर घड़ी कम है,
पास आओ कि जिंदगी कम है।
नज़रें हर पल तुम्हें ही देखा है,
धड़कने हर घड़ी तुम्हे चाहा है।
दिल भी गहराइयों में डूबा है,
पास आओ कि जिंदगी कम है।
जह्नो दिल जोर से धड़कता है,
सारी काया में बस तुम्हीं तुम है।
अब तो परछाईं भी बात करती है,
पास आओ कि जिंदगी कम है।
साहित्यकार एवं लेखक
डॉ. आशीष मिश्र उर्वर


