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Poetry: भारी है मेरी प्यारी काशी

नया सवेरा नेटवर्क

भारी है मेरी प्यारी काशी


मैं सत्य कहूँ मेरे प्यारे मित्रों....

लिखता जब-जब मैं प्रयागराज हूँ

मेरी काशी छूटे जाती है....

जब-जब मैं लिखता प्यारे....!

गंगा संग यमुना की धारा....

वरुणा और अस्सी की मेरी....

धारा...धीरे से छूटे जाती है...

जो लिखता कभी मैं....!

महाकुंभ की महिमा प्यारे

सच मानो...नौलखी मेलों संग....

देव दीवाली औ मणिकर्णिका मेरी

अनायास ही छूटे जाती है....

देवों की भी जो बात करूं मैं....!

तो लेटे हनुमान को लिख़ने से...

संग भोले मेरी पार्वती मईया...!

हक से....रूठे जाती हैं....

जो शिक्षा पर कुछ ध्यान धरूँ मैं...

पूरब के ऑक्सफोर्ड के आगे....

मित्रों...मेरे महामना के मन की...!

संचित सब आशाएं टूटी जाती हैं..

जो लिखूँ कभी मैं...प्रयागराज की

सड़के चौड़ी-चौड़ी सी....

हर कोई मानेगा मित्रों.....!

गली बनारस की छूटे जाती है....

गर लिखूँ राष्ट्र की राजधानी....!

जो कभी प्रयागराज को प्यारे....

फिर तो सांस्कृतिक राजधानी...

ही बिन कारण छूटे जाती है....

और लिखूँ जो अमरूदों की बागें..

लंगड़े की सांसें....थम सी जाती हैं

कोर्ट कचहरी जो मैं लिखना चाहूँ

सच मानो प्यारे मित्रों.....!

दलील बनारस की दब जाती है...

झूठ फरेब का किस्सा जो लिखता

तो चाईं बनारसी की चालें...

चुपके से...छूटे जाती है....

खानपान में प्यारे....यदि....

दही-जलेबी पर कुछ भी लिखूँ तो

काशी की....गली कचौड़ी वाली..

टपकाती लार लिए...छूटे जाती है

कभी लिखना चाहूँ जो मैं....!

अमा यार या अमा भो...ड़ी के....

तो मघई पान घुलाये.....!

हर काशीवासी यह मानेगा....

सरऊ और ससुर भो...ड़ी के...!

अपनी प्यारी गाली छूटे जाती है..

प्रयाग बड़ा है या बड़ी है काशी...!

प्रश्न हमेशा यह....मन में कौंधे....

विचार गहन जो करता हूँ...

सावन मास बड़ी आसानी से....!

इसका प्यारा सा....उत्तर साधे.....

जब नागवासुकी से लेकर,

काँवर पर गंगाजल....

जाते काँवरिया काशी पैदल-पैदल

भोले को विधिवत नहलाकर

भक्त सभी एक सुर में बोले....

बम-बम भोले अविनाशी...और..

दसों दिशाओं में खुद ही गूँजे....!

बम-बम बोल रहा है काशी....

अब कौन भला कर सकता है...?

इस पर..संदेह कोई भी हिंदीभाषी

कि तीनों लोकों से है प्यारी काशी

तीनों लोकों से है न्यारी काशी...

प्रयागराज पर रही है....!

सदा ही भारी काशी....

और....प्रयागराज पर अब भी...

भारी है मेरी प्यारी काशी....

भारी है मेरी प्यारी काशी....



रचनाकार....

जितेन्द्र कुमार दुबे

अपर पुलिस उपायुक्त,लखनऊ


एस.आर.एस. हॉस्पिटल एण्ड ट्रामा सेन्टर  📍 तेज डायग्नोस्टिक सेन्टर के सामने (पेट्रोल पम्प के बगल में), नईगंज तिराहा, जौनपुर   ☎️ 7355 358194, 05452-356555      🏥🏥🏥  👨🏻‍⚕️ डा. अभय प्रताप सिंह  MBBS (KGMU), DNB(Ortho), MS (Ortho) UCN, FIJR (Germany), MNAMS आर्थोस्कोपिक एण्ड ज्वाइंट रिप्लेसमेन्ट आर्थोपेडिक सर्जन हड्डी रोग विशेषज्ञ ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👨🏻‍⚕️ डा. आनन्द त्रिपाठी  MBBS, MD, DM (Neuro) न्यूरो फिजिसियन ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👨🏻‍⚕️ डा. राजेश त्रिपाठी  MBBS, MD (Anesthisia) एनेस्थिसिया रोग विशेषज्ञ ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👩🏻‍⚕️ डा. नेदा सलाम  CGO स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ओ.पी.डी. प्रतिदिन  👨🏻‍⚕️ डा. एस. के. मिश्र  MBBS, MS (General Surgeon) जनरल सर्जरी विजिटिंग ऑन काल  👩🏻‍⚕️  डा. चंचला मिश्रा  MBBS, MS (Obs & Gyn.) स्त्री रोग विशेषज्ञ विजिटिंग ऑन काल  👨🏻‍⚕️ डा. अरविन्द कुमार अग्रहरि  MBBS, MS, MCH (Neuro) न्यूरो सर्जन विजिटिंग ऑन काल
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