Poetry : हम बोलें तो खलता है | Naya Savera Network
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हम बोलें तो खलता है
वह बोलें तो चलता है।
प्यार-मुहब्बत कभी न करना,
जो करता है जलता है।
झूठ,पाप,अन्याय आजकल
'इन' लोगों को फलता है।
घोषित हुआ इलेक्शन जबसे,
मौसम रोज बदलता है।
जिसको देखो वही सनातन-
चींटी समझ मसलता है।
एक रहा जो सेफ रहा है,
उसको कोई न छलता है।
आबादी का देख संतुलन,
बबुआ जहर उगलता है।
शेर दबाए दुम बैठा है,
'पड़वा' खूब उछलता है।
गांवों में भी शहर घुस गया
रह-रह रोज मचलता है।
मां की दुआ साथ में रखिए,
इससे हर गम टलता है।
आगे केवल वह जाता है
जो सांचे में ढलता है।
सुरेश मिश्र
9869141831



