#Article: मटियामेंट होता चुनार (मिर्ज़ापुर) का पॉटरी उद्योग | #NayaSaveraNetwork
नया सवेरा नेटवर्क
60के दशक में मेरे पिताजी स्व. डॉ. सत्यदेव सिंह जीअपने मित्रों के साथ मिर्ज़ापुर जनपद(तब सोनभद्र अलग नहीं हुआ था )के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वाटर फॉल्स,माँ विंध्यवासिनी के दर्शन पूजन के उपरान्त वापसी में चुनार से टी सेट (तब कप प्लेट में चाय पी जाती थी मग का चलन नहीं था) अचार रखने हेतुछोटे व बड़े मर्तबानव जार,गुलदस्ता, बड़ी माता जी के घर के पूजा मंदिर हेतु विभिन्न देवी देवताओं की चीनी मिट्टी से बनी चमचमाती मूर्तियां घर लाये थे, चुनार के पॉटरी उत्पादन से मेरा यह प्रथम परिचय था। नब्बे के दशक में मैं पहली बार अपने मित्र व संबंधी स्व. सत्यदेव सिंह "ज्योतिषी जी" व अनुज प्रमोद के श्वसुरजी स्व.ई. हरेंद्रप्रताप सिंह के साथ उनकी सबसे छोटी पुत्री की शादी हेतु लड़के के माँ बाप से मिलनेचुनार आया था।
चुनार व उसके आसपास सैकड़ो कारखानों की चिमनीयों से धुँवा निकलते व बाज़ार की दोनों पटरियों पर चुनार के बने पॉटरीज़ के सामानो की सैकड़ो दूकाने दिखाई दी थी। मैं समझता हूँ कि 80से 90का दशक चुनार पॉटरीज़ का स्वर्ण युग था। 2008व 2009मे स्वामी अर्गणानंद जी महराज के शक्तेशगढ़ के परमहंस आश्रम दर्शन व प्रवचन सुनने गया था तो चुनार के आसपास के कारखानों से कम धुँवा निकलता दिखाई दिया, इसे मै पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकताका प्रतीक समझा। इसी माह मे अपने भतीजे संजय कुमार सिंह पूर्व जिला जज, संप्रति चेयरमैन एजुकेशन ट्रीव्यूनल भभुआ बिहार के साथ शक्तेशगढ़ से वापसी पर चुनार के पॉटरीज़ के विभिन्न दुकानों पर जाने का अवसर मिला। सभी दूकाने चायनीज़ मॉल व खुर्ज़ा के बने माल से भरी पड़ी थी। मैंने चुनार के बने पॉटरीज़ को ही खरीदने की इच्छा जाहिर की तो दुकानदार का दर्द छलक उठा, उसने मुझे बताया कि रॉमैंटीरियल के दामों मे बेतहासा वृद्धि के कारण यहाँ अब केवल एक कारखाना रह गया है।
केवल दीपावली के समय माँ लक्ष्मी जी व गणेश जी की प्रतिमा से लगभग 20करोड़ का बिज़नेस हो जाता है जिससे सैकड़ो शिल्पी परिवार का जीवन यापन हो जाता है। सन 1954मे सरकार द्वारा स्थापित राजकीय पॉटरीज़ सेंटर मे ताला लगा हुआ है वहां घासफूस का अम्बार लगा हुआ है। यहाँ की इंडस्ट्री सरकारी उदासीनता की शिकार हो गयी जब कि खुर्ज़ा पर सरकारी मेहरबानी के कारण सस्ते होने के कारण वहां सै माल मगाना पड़ता है। मेरे पूछने पर दुकानदार नें बताया कि यदि राजकीय पॉटरीज़ सेंटर मे लगी पुरानी भट्ठीयों को नेचुरल गैस पाइप लाईन से चलने वाली स्पेशल टनल क्लिंन (भट्ठी) का निर्माण कराया जाय जो 1200डिग्री पर माल पका सके, कच्चे माल पर सब्सिडी दी जाय, रंग व पेंट उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाय, परिवहन की सुविधा बढ़ाई जाय, रिसर्च एंड डेवलोपमेन्ट पर फोकस किया जाय तो चुनार की पॉटरीज़ इंडस्ट्री को पुनः उसी बुलंदी पर पहुंचाया जा सकता है।
मैंने दुकानदार से चुनार के बने खिलौना (पति -पत्नी) आधा दर्जन मग व एक माला खरीदा जिसे अपनी स्व•धर्मपत्नी माधुरी सिंह के फोटो पर डाल दिया। भतीजे संजय कुमार सिंह नें भी चीनी मिट्टी से बना वाज (फूलदान ), मर्तबान, मग आदि कई सामान खरीदे। गत वर्ष देश के यशश्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी नें नई दिल्ली में आयोजित G-20 के सम्मेलन में पहली बार अफ्रीकी यूनियन (55देशों का समूह ) को G-20 की सदस्यता दिलाई है, गत वर्ष मुझे भी दो अफ्रीकन देश केनियाँ व मिश्र जाने का अवसर मिला था ओर वहां की ग़रीबी स्वयं अपनी आँखों से देखा है, यदि भारत सरकार थोड़ा सा भी ध्यान दे दे तो चुनार के बने अच्छे व सस्ते पॉटरीज़ से पूरे अफ्रीकी यूनियन के देशों के बाज़ार भरे जा सकते है। मुझे यह जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई कि अभी हाल में ही चुनार पॉटरीज़ को जी. आई. टैग (जियोग्राफिकल इण्डिकेशन ) काफ़ी संघर्ष के बाद मिल चुका हैजो इसे देश ही नहीं वरनविश्व व्यापार में भी पुनः इसे बुलंदियों तक पहुंचायेगाऐसा मेरा दृढ विश्वास है।
साभार: विनय कुमार सिंह पूर्व विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट जौनपुर
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