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    रेलवे को बचाने के लिए देश के हर नागरिक का दरवाजा खटखटाएंगे: डॉ राघवैया| #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    • रेलवे का निजीकरण जनता के हित में नहीं
    हैदराबाद। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मैन (एनएफआईआर) के महासचिव डॉ. एम. राघवय्या ने कहा कि रेल को बचाने के लिए हर भारतीय का दरवाजा खटखटाएंगे। भारतीय रेलवे का निजीकरण देश की जनता के हित में नहीं है। रेलकर्मी अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि रेल को बचाने के है। लिए आंदोलन कर रहे हैं। निजीकरण के बाद रेल उद्योगपतियों की हो जाएगी और वे जनता की जेब पर डाका डालेंगे। रेल सिर्फ और सिर्फ भारत सरकार चला सकती है और दूसरा कोई ऐसा नहीं कर सकता। रेलवे स्पोर्ट्स काम्पलेक्स, सिकंदराबाद में 5, 6 7 सितंबर तक तीन दिवसीय एनएफआईआर के 30वें राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर डॉ. एम. राघवय्या ने बताया कि 50 साल बाद एनएफआईआर के राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
    पहली बार हैदराबाद में वर्ष 1972 में सम्मेलन हुआ था। रेलवे के निजीकरण को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. राघवय्या ने कहा कि रेलकर्मी अपने स्वार्थ के लिए आंदोलन नहीं कर रहा है। आम भारतियों के हित और रेल को बचाने की चिन्ता है। निजीकरण होने के बाद जनता को 100 रूपए का टिकट 300 रूपए में मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 तक फायदे वाले 70 प्रतिशत रूट उद्योगपतियों को बेचने की योजना घाटे वाले बचे 30 प्रतिशत रूट को चलाने की जिम्मेदारी रेल कर्मचारियों को मिलेगी। उन्होंने कहा कि रेल को बचाने के लिए एनएफआईआर अपना झंडा और एजेंडा छोड़ने को तैयार है। देश की सभी यूनियन मिलकर रेल को निजीकरण से बचाने के लिए सिंगल एजेंडे पर काम करेगी।
    रेलवे के लगातार घाट होने पर प्रश्न पर डॉ. राघवय्या के तेवर तीखे हो गए। उन्होंने कहा कि कौन कहता है कि रेल घाटे में है। अभी 2021-22 में रेलवे की आय में इजाफा हुआ है। हर साल विभिन्न मदों का केन्द्र सरकार को रेलवे को लगभग 55 हजार करोड़ रुपए देना होता है। इस बकाये को सरकार नहीं दे रही है। पूर्वोत्तर राज्यों को सब्सिडी पर माल परिवगन किया जा रहा है। रक्षा के सामानों को रेल परिवहन कर रही है। इसका पैसा कौन रेलवे को दे चर्चा होगी। रेलवे का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। रेलवे को बचाने के लिए रेलकर्मी 30 मिनट अधिक बिना वेतन को काम करने के लिए तैयार है। उन्होंने की निजीकरण के विरोध में जनता की रेल बचाने के लिए जनता की अदालत में जाएंगे। देश के युवा, शिक्षक, छात्र, महिला, किसान, व्यापारियों आदि सभी के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उनकी राय के बाद आंदोलन को तेज किया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि 14 हजार किलोमीटर रेल लाइन नई बनी है। नई रेल लाइन के बाद कर्मचारियों की भरती हुई अभी रेलवे में करीब ढ़ाई लाख पद खाली है। रेलकर्मियों पर वर्कलोड बहुत है। आए दिन रेलकर्मियों पर कम काम करने और आरामतलब तरीके से नौकरी के आरोप लगने को लेकर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते समय डॉ. राघवय्या बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि इस आरोप की सच्चाई जानने के लिए पीएम, रेलमंत्री, विभिन्न दलों के नेताओं, आरोप लगाने वालों को एक दिन ट्रैक मैन के काम का प्रैक्टिल अनुभव करना चाहिए। गर्मी, बारिश, जाड़े, धूप में रेल लाइन पर प्रतिदिन 6 किलोमीटर आते और जाते है।
    इतना ही नहीं उनकों जंगलों, रेगिस्तान, पहाड़ों में ड्यूटी करनी पड़ती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी एक दिन ट्रैक पर जाएगा तो एक सप्ताह तक बेड पकड़ लेगा। कई रेलकर्मी जहरीले जानवरों के शिकार हो जाते है। हर दिन देश में दो रेलकर्मी ड्यूटी के दौरान मर रहा है। हम रेलकर्मियों के हक के लिए आरपार संघर्ष करेंगे। रेलकर्मियों और देश की जनता के हित से जुड़े मामले को लेकर रेलमंत्री, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को कई बार अवगत करा चुका हूं।

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