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    फिर से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होंगे पर भाजपा के साथ सब ठीक है- जदयू | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपनी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अनबन की अटकलों को खारिज करते हुए उसके साथ सब कुछ ठीक होने का दावा किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह फिर से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होगी। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन ने रविवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति के बारे में सवालों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘आपको मुख्यमंत्री से इस बारे में पूछना चाहिए।’’
    नीति आयोग की बैठक में नीतीश की अनुपस्थिति को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्टीकरण अब तक नहीं आया है पर मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद की अपनी शारीरिक कमजोरी का हवाला देते हुए नीतीश ने उक्त बैठक में शामिल होने पर असमर्थता जतायी। नीतीश 25 जुलाई को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। हालांकि, संक्रमण से उबरने के बाद वह रविवार को यहां कुछ कार्यक्रमों में शामिल हुए।
    इनमें से एक कार्यक्रम जो कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस पर आयोजित किया गया था, में उन्होंने उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन और उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद जैसे भाजपा के अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ मंच साझा किया। लोकसभा सदस्य ललन ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई पार्टी सांसदों की बैठक के एजेंडे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बैठक के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है पर पार्टी सूत्रों ने कहा कि विधायकों और सांसदों के मंगलवार को जदयू नेता के साथ बातचीत करने की संभावना है।
    ऐसी भी अफवाहें हैं कि विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने विधायकों को अगले कुछ दिनों के लिए पटना में रहने का आदेश दिया है, जिससे यहां मीडिया के एक वर्ग में जोरदार अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम होने वाला है। ललन ने भाजपा के साथ सबकुछ ठीक होने का दावा करते हुए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में जदयू के समर्थन का हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने व्हीलचेयर पर मतदान केंद्र पहुंचकर मतदान किया।’’
    जदयू अध्यक्ष ने कहा, ‘‘भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का इससे मजबूत प्रदर्शन नहीं हो सकता।’’ भाजपा के नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में अगला लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के वादे के बारे पूछे जाने पर ललन ने कहा, ‘‘मैं 2024 या 2025 के बारे में कुछ भी आश्वासन के साथ कैसे कह सकता हूं। मैं यह नहीं कह सकता कि मैं कल जीवित रहूंगा या नहीं।’’
    एक और राज्यसभा कार्यकाल से वंचित होने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले आरसीपी सिंह द्वारा शनिवार को जदयू से इस्तीफा देने और इसके बाद पार्टी को लेकर की गयी उनकी टिप्पणी के बारे में ललन ने विस्तार से बताए बिना कहा, ‘‘हो सकता है कि उन्होंने कल ही जदयू से इस्तीफा दिया हो, पर उन्हें देर-सवेर तो जाना ही था, क्योंकि उनका तन यहां (जदयू में) और मन कहीं और था।’’ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरसीपी के बारे में कहा, ‘‘वे सत्ता के साथी रहे हैं, न कि संघर्ष के। सत्ता हाथ से निकल गयी ऐसे में उनकी बौखलाहट स्वभाविक है।’’
    उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी को कम सीट आने की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के 43 सीट जीतने के पीछे जनाधार का कम होना नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के खिलाफ रची गई साजिश थी। ललन ने कहा कि 2020 में एक चिराग मॉडल आया था, अब एक और चिराग मॉडल तैयार करके षड्यंत्र किया जा रहा था जिसको लेकर हमलोग अब सर्तक हैं। षड्यंत्र कैसे हुआ कहां हुआ हमें मालूम है, समय आने पर बताया जाएगा।
    आरसीपी के जदयू को ‘‘डूबता जहाज’’ बताए जाने पर ललन ने कहा कि जदयू ‘‘डूबता नहीं बल्कि दौड़ता जहाज’’ हैं। जहाज में पानी आता है तो पहले कौन भागता है। अपनी पार्टी के पूर्ववर्ती राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी को ललन ने सलाह दी कि वे नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी में उलझे बिना स्वेच्छा से जहां भी जाना चाहते हैं, वहां जाने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जदयू के मालिक हैं। आरसीपी या मेरे जैसे लोग उनके आशीर्वाद के कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुने जाते हैं लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि हम सिर्फ ‘केयरटेकर’ हैं।
    ललन ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया,‘‘हमारी पार्टी लोकसभा चुनाव के बाद वर्ष 2019 में ही केंद्र में सरकार में शामिल नहीं होने का फैसला किया था, हम अब भी उस पर कायम हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार में शामिल नहीं होने का फैसला हमारे नेता नीतीश कुमार जो उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे, ने सभी से राय-मशविरा करके लिया था।’’ 2021 में आरसीपीए जो उस समय जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, के केंद्रीय मंत्री बनने के बारे में पूछे जाने पर ललन ने कहा कि उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते लिया, क्यों लिया, किससे परामर्श किया, ये वही बता सकते हैं।

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