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    कविता| #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    हमारी पहचान बॉडी बन जाती है 

    जिस पल हमारी मृत्यु होती है 
    हमारी पहचान बॉडी बन जाती है 
    हमारे अपने भी बाडी लेकर आए क्या 
    ऐसे शब्दों में पुकारते हैं 

    जिन्हें प्रभावित करने हमने पूरी 
    जिंदगी खर्च कर दी होती है 
    वह भी हमें बॉडी के नाम से पुकारते हैं 
    बाडी कहां है घरवालों से पूछते हैं 

    इसलिए हम याद रखें हरदम खुश रहें 
    क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है 
    क्यों जिंदा होकर भी हमारे मन में 
    जीने की आस खत्म हो चुकी है 

    जो पल जिंदगी के हमें हैं उसमें खुशी 
    से जीने को जिंदगी कहते हैं 
    हर पल का इंजॉय कर ख़ुश रहें हम 
    मृत्यु के पल में बॉडी पहचान बन जाएंगे हम 

    आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 
    जिंदगी को खुशियों से जिए हम 
    हर हाल में खुश रहने की आदत डालें हम 
    खुशी की गरीबी भी अमीरी से नहीं है कम

    लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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