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    आओ राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय ध्वज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखें | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    • राष्ट्रीय ध्वज घरों में फहराते समय भारतीय ध्वज संहिता 2002 के प्रावधानों को रेखांकित करना जरूरी 
    • राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की शान है - तिरंगे के सामने पूरा देश नतमस्तक है, ध्वज संहिता के नियमों रिवाजों कानूनों का पालन करना हर नागरिक का परम कर्तव्य - एडवोकेट किशन भावनानी
    गोंदिया- भारतवर्ष में के इतिहास में शायद यह पहली बार देश की शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगेके सम्मान में स्वतंत्रता के 75 में अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष में इतनी भव्यता के साथ विशाल कार्यक्रमों की झड़ी लगी लगा दी गई है। रेखांकित करने वाली बात यह है कि भारत के माननीय पीएम द्वारा 13 -15 अगस्त तक हर घर तिरंगा फहराने का सुझाव दिया गया है और सोशल मीडिया की डीपी में तिरंगा लगाने की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है जिसमें शासन-प्रशासन नेताओं मंत्रियों सहित देश के नागरिकों ने हाथों हाथ लिया है और हर व्यक्ति में एक जुनून जज्बे और जांबाज़ी दिख रही है। 
    साथियों रोज तिरंगे के सम्मान में रैलियां डिबेट प्रोत्साहन सहित अनेक कार्यक्रम किए जा रहे हैं बहुत सकारात्मक और स्वच्छ खुशी के माहौल का वातावरण देश में दिख रहा है और हम देख रहे हैं कि राष्ट्र की शान में पूरा देश राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सामने नतमस्तक है परंतु इन उमंग और खुशियां के पलों में हमें यह विशेष ध्यान करेंगे कि हमारी आन बान शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए। भारतीय ध्वज संहिता 2002 के प्रावधानों को समझा जाए इसीलिए आज हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आर्टिकल के माध्यम से इसके नियमों विनियमों और औपचारिकताओं सम्मान पर चर्चा कर कहेंगे आओ राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय ध्वज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखें। 
    साथियों बात अगर हम राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की करें तो प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है, जो उस देश के स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जो तीन रंगों - केसरिया, सफेद और हरे रंग से बना है और इसके केंद्र में नीले रंग से बना अशोक चक्र है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैयानंद ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। हमारा राष्ट्रीय ध्वज देश की शान है, जब भी हम लहराता हुआ तिरंगा देखते हैं,तो हमारा मन देशभक्ति से ओतप्रोत हो जाता है। भारत का झंडा देश के लोगों के बीच एकता, शांति, समृद्धि और विकास को दर्शाता है। अनगिनत बलिदानों,त्याग और एक लंबी लड़ाई के बाद हमारा देश औपनिवेशिक सत्ता की जकड़ से आजाद हुआ था. जिसमें देश का ध्वज थाम कर लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। 
    साथियों बात अगर हम हर घर तिरंगा अभियान की करें तो,
    हर घर तिरंगा,  आजादी के 75 साल पूरे होने पर 20 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान जोरों पर है। हर घर तिरंगा आजादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में लोगों को तिरंगा घर लाने और इसे फहराने के लिए प्रोत्साहित करने, हमारे राष्ट्रीय ध्वज के साथ बंधन को मजबूत करने के लिए एक अभियान है। पहल के पीछे का विचार लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना जगाना और भारतीय राष्ट्रीय ध्वजके बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। 
    साथियों बात अगर हम राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सम्मान की करें तो, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सामने पूरा भारत देश नतमस्तक है, देश का हर नागरिक तिरंगे का दिल से सम्मान करता है। भारत के संविधान में तिरंगे का अपमान करना दंडनीय अपराध माना गया है, जिसे लेकर सजा का भी निर्धारण किया गया है। भारत की पहचान है तिरंगा, हर भारतवासी का गौरव है तिरंगा। लेकिन क्या हम जानते हैं कि तिरंगे को फहराने का क्या नियम है? 
    साथियों बात अगर हम भारतीय ध्वज संहिता 2002 की करें तो, इसमें देश में राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग, प्रदर्शन और फहराने के लिए निर्देशों का एक व्यापक सेट शामिल है। यह राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन के लिए सभी कानूनों, परंपराओं, प्रथाओं और निर्देशों को एक साथ लाता है, साथ ही निजी, सार्वजनिक और सरकारी संस्थानों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन को नियंत्रित करता है। 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता लागू हुई। भारतीय ध्वज संहिता के खंड 2.1 के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान के अनुरूप आम जनता, निजी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों आदि के सदस्यों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। 
    साथियों ध्वज संहिता के अन्तर्गत सभी नियमों, रिवाजों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है. इसमें राष्ट्रीय ध्वज को अपने व्यक्तिगत प्रतिष्ठानों, घरों इत्यादि में फहराने से संबंधित नियम, कानून और परंपराओं का जिक्र है. यह संहिता 2002 में बनाई गई थी, तिरंगा हमेशा काॅटन सिल्क या फिर खादी का होना चाहिए।इसका डिजाइन हमेशा रेक्टेंगल शेप में होना चाहिए। इसके अनुपात की अगर बात करें तो 3ः2 इसे तय किया गया है।तिरंगे के बीच में मौजूद अशोक चक्र में 24 तीलियां होनी चाहिए। इसके अलावा झंडे पर कुछ बनाना या लिखना गैर कानूनी होता है।तिरंगा कभी भी किसी गाड़ी के पीछे, बोट या फिर प्लेन में नहीं लगाया जा सकता और न ही इसका इस्तेमाल किसी बिल्डिंग को ढकने में किया जा सकता है। 
    साथियों किसी भी स्थिति में तिरंगा जमीन पर टच नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसा होना तिरंगे का अपमान माना गया है।तिरंगे का उपयोग किसी प्रकार की यूनिफोर्म या फिर सजावट के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।भारत में बेंगलुरू से 420 किमी स्थित हुबली एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है, जो झण्डा बनाने का और सप्लाई करने का काम करता है।किसी भी अन्य झण्डे को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या फिर उसके बराबर में नहीं रख सकते। देश के लिए जान देने वाले शहीदों और देश के महान शख्सियतों को तिरंगे में लपेटा जाता है। इस दौरान केसरिया पट्टी सिर की तरफ रखते हैं।शव को जलाने या दफनाने के बाद इसे गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या फिर वजन बांधकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।
    साथियों कटे-फटे या फिर रंग उड़े तिरंगे को भी सम्मान के साथ जलाया जाता है या फिर वजन बांधकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। किसी मंच पर तिरंगे को फहराते समय बोलने वाले का मुंह श्रोताओं की तरफ हो तब तिरंगा हमेशा उसकी दाहनी तरफ होना चाहिए। जो भी तिरंगा फहराने के नियमों का उल्लंघन करता है उसे जेल भी हो सकती है। 
    साथियों बात अगर हम घरों पर तिरंगा फहराने की करें तो ,घर में राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। इससे जुड़ी कुछ बातें हैं जिनका पालन करना करें जब भी राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित किया जाता है,तो वह सम्मान की स्थिति में होना चाहिए। अगर राष्ट्रीय ध्वज क्षतिग्रस्त हो तो उसे प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए।ध्वज पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए। किसी अन्य ध्वज या झंडे के साथ एक ही मास्टहेड(बराबर ऊंचाई)से झंडा ना फहरायें। ध्वज संहिता के भाग 3 की धारा IX में निहित प्रावधानों के अलावा किसी भी वाहन पर झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए।जब राष्ट्रीय ध्वज को क्षैतिज रूप से प्रदर्शित किया जाता है,तो केसरिया रंग सबसे ऊपर होना चाहिए और जब लंबवत् (ऊर्ध्वाधर) प्रदर्शित किया जाता है तो केसरिया रंग की पट्टी दाईं ओर होनी चाहिए (यानी ध्वज के सामने खड़े व्यक्ति के लिए बाएं) जहां तक ​​संभव हो ध्वज, इस संहिता के भाग-1 में निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।कोई अन्य झंडा राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर और बराबर नहीं होना चाहिए. फूल, माला या प्रतीक सहित कोई भी चीज ना तो राष्ट्रीय के ऊपर और ना ही जिससे ध्वज फहराया जाता है उसके ऊपर रखी जानी चाहिए। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय,सांस्कृतिक अवसरों और खेलों के दौरान जनता को कागज से बने ध्वज को लहराने की अनुमति है। समारोह समाप्त हो जाने के बाद कागज के झंडे को ना तो विकृत किया जाए और ना ही फेंका जाए. एकांत में पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ उनका निपटान करें। 
    अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय ध्वज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखें। राष्ट्रीय ध्वज घरों में फहराते समय भारतीय ध्वज संहिता 2002 के प्रावधानों को रेखांकित करना जरूरी है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की शान है तिरंगे के सामने पूरा देश नतमस्तक है।ध्वज संहिता के नियम रिवाजों कानूनों का पालन करना हर नागरिक का परम कर्तव्य है। 

    -संकलनकर्ता लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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