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    3D को अपना युवा बदलेंगे संसार : कैलाश सत्यार्थी | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    • श्लोक उच्चारण में नहीं, व्यवहार में दिखे सम्मान
    मुंबई। युवा अपने जीवन में 3डी को अपना लें, तो वे पूरे संसार को बदल डालेंगे। 3D यानी Dream, Discover and Do. युवा ऊर्जा का भंडार होते हैं और यदि वे अपने सपने को पहचान, उसको यथार्थ बनाने में जी-जान से जुट जाएं, तो मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि उस सपने को साकार होने से कोई रोक नहीं सकता है। ऐसे ही युवा नवनिर्माण एवं सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के सारथी बनते हैं। उक्त उद्गार नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने के.सी. कॉलेज में आयोजित HSNC University के Annual Lecture Series “Harbingers of change: Story of transformation” के उद्घाटक वक्ता के रूप में व्यक्त किये। श्री सत्यार्थी ने अपने उद्बोधन में युवा वर्ग सामाजिक परिवर्तन का रथी एवं सारथी दोनों बनने का आह्वान किया। 
    गीता में उल्लेखित “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन...” के माध्यम से जहां निस्वार्थ कर्म की प्रेरणा दी. अपने अनुभवों एवं संक्षिप्त प्रसंगों का उल्लेख करते हुए श्री सत्यार्थी ने युवाओं से बड़े सपने देखने तथा उसे साकार करने के लिए निस्वार्थ भाव से सतत एवं समर्पित भाव से प्रयास करने का आह्वान किया. वहीं देश में हो रहे लैंगिक भेदभाव एवं उत्पीड़न का उल्लेख करते हुए “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते...” के माध्यम से लोगों के दोहरे आचरण पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा कि जो बातें हम श्लोकों के द्वारा प्रवचन एवं पूजा में करते हैं। यदि वहीं बातें हम अपने आचरण में उतारे तो बहुत सी समस्याओं का समाधान अपने-आप ही हो जाएगा। साथ ही बाल मजदूरी एवं शिक्षा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में जितने सैनिक हैं, उसके दसवें हिस्से के बराबर भी शिक्षक नहीं है। बच्चों की समस्याओं के समग्र समाधान एवं उनकी शिक्षा के लिए जितने बजट की जरूरत है वे विश्व के 10 दिन के रक्षा बजट के बराबर भी नहीं है। ऐसे में यह सोचना जरूरी हो जाता है कि हमारी प्राथमिकता क्या है और एक सभ्य समाज का निर्माण कैसे होगा?
    3D को अपना युवा बदलेंगे संसार : कैलाश सत्यार्थी श्लोक उच्चारण में नहीं, व्यवहार में दिखे सम्मान मुंबई, युवा अपने जीवन में 3डी को अपना लें, तो वे पूरे संसार को बदल डालेंगे। 3D यानी Dream, Discover and Do. युवा ऊर्जा का भंडार होते हैं और यदि वे अपने सपने को पहचान, उसको यथार्थ बनाने में जी-जान से जुट जाएं, तो मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि उस सपने को साकार होने से कोई रोक नहीं सकता है। ऐसे ही युवा नवनिर्माण एवं सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के सारथी बनते हैं। उक्त उद्गार नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने के.सी. कॉलेज में आयोजित HSNC University के Annual Lecture Series “Harbingers of change: Story of transformation” के उद्घाटक वक्ता के रूप में व्यक्त किये। श्री सत्यार्थी ने अपने उद्बोधन में युवा वर्ग सामाजिक परिवर्तन का रथी एवं सारथी दोनों बनने का आह्वान किया। गीता में उल्लेखित “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन...” के माध्यम से जहां निस्वार्थ कर्म की प्रेरणा दी. अपने अनुभवों एवं संक्षिप्त प्रसंगों का उल्लेख करते हुए श्री सत्यार्थी ने युवाओं से बड़े सपने देखने तथा उसे साकार करने के लिए निस्वार्थ भाव से सतत एवं समर्पित भाव से प्रयास करने का आह्वान किया. वहीं देश में हो रहे लैंगिक भेदभाव एवं उत्पीड़न का उल्लेख करते हुए “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते...” के माध्यम से लोगों के दोहरे आचरण पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा कि जो बातें हम श्लोकों के द्वारा प्रवचन एवं पूजा में करते हैं। यदि वहीं बातें हम अपने आचरण में उतारे तो बहुत सी समस्याओं का समाधान अपने-आप ही हो जाएगा। साथ ही बाल मजदूरी एवं शिक्षा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में जितने सैनिक हैं, उसके दसवें हिस्से के बराबर भी शिक्षक नहीं है। बच्चों की समस्याओं के समग्र समाधान एवं उनकी शिक्षा के लिए जितने बजट की जरूरत है वे विश्व के 10 दिन के रक्षा बजट के बराबर भी नहीं है। ऐसे में यह सोचना जरूरी हो जाता है कि हमारी प्राथमिकता क्या है और एक सभ्य समाज का निर्माण कैसे होगा?   बचपन में कहा बदलेंगे संविधान, लोगों ने उड़ाया मजाक श्री सत्यार्थी कहा कि उन्होंने अपने बचपन में बच्चों को सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ते हुए देखा कि उनके पास फीस एवं किताबों के लिए पैसा नहीं था, तो उन्होंने पहले गली- गली घूमकर किताबें इकट्ठा की और बुक बैंक की शुरुआत कर इस समस्या का तत्कालीन समाधान निकाला। लेकिन सिर्फ इतने से वे संतुष्ट नहीं थे। श्री सत्यार्थी का मानना था कि बुनियाद शिक्षा से कोई वंचित न रहे इसलिए जरूरी है कि संविधान में परिवर्तन हो। उनकी इस बात का लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन वो दिन भी आया जब एक आम एक व्यक्ति की मांग को देश की संसद में पक्ष एवं विपक्ष दोनों तरफ के सांसदों का समर्थन मिला और देश में ‘शिक्षा के अधिकार को’ संवैधानिक दर्जा मिला।  बालश्रम के खिलाफ उठाई आवाज, 200 देशों ने माना श्री सत्यार्थी ने कहा कि बाल श्रम को रोकने तथा उसकी कोई व्यापक परिभाषा नहीं थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने एक दस्तावेज तैयार किया, जिसे यूएन ने भी स्वीकार और लगभग 200 देशों की सरकारें उसे एक मागदर्शक के रूप में स्वीकार रहीं हैं।   अराध्य कभी अपवित्र नहीं हो सकती अपने वक्तव्य में यौन उत्पीड़न के मामलों का जिक्र करते हुए श्री सत्यार्थी ने कहा कि हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां नारी को देवी माना जाता है। यहां नारी की पूजा की जाती है। हम धन की देवी के रूप में देवी लक्ष्मी, ज्ञान की देवी के रूप में माँ सरस्वती एवं शक्ति की देवी के रूप में माता दुर्गा की आराधना करते हैं। लेकिन वहीं जब भी कोई ऐसा मामला आता है, जब किसी बेटी के साथ कुछ गलत हो जाता है, तो हम उसे ही गलत कहने लगते है, उनके प्रति हमारा व्यवहार बदल जाता है। यह एक बड़ा कारण है, जिससे बहुत यौन अपराधों की शिकार बेटियां सामने नहीं आती है। जरूरत है इस सोच को बदलने की। मेरा मानना है कि ‘अराध्य कभी अपवित्र नहीं हो सकती’। मैं आप सभी साथियों से अनुरोध करूंगा कि आप इस बात को समझाने में हमारी मदद करें। पीड़िता के साथ खड़े हों, उसे सम्मान दें।   हो गई है पीर पर्वत सी... श्री सत्यार्थी ने अपने वक्तव्य का समापन दुष्यंत कुमार की गजल “हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए” के आह्वान के साथ किया। उपस्थित विद्यार्थियों को उनके सामर्थ्य से अवगत कराते हुए उन्हें सामाजिक परिवर्तन का सूत्रधार एवं संवाहक बनने के लिए प्रेरित किया।  हाथ मिलाकर स्वर्ग बनाएंगे: डॉ. हीरानंदानी HSNC विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि श्री सत्यार्थी जी सपने को लेकर चल रहे हैं। उसी उद्देश्य “हर बच्चे को मिले शिक्षा” को ध्यान में रखकर हमारे नेतृत्वकर्ताओं HSNC बोर्ड का गठन किया, जो वर्तमान एक विश्वविद्यालय, 17 कालेजों और 9 स्कूलों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वर्तमान में हमारे संस्थानों में 45000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। आज इस अवसर पर मैं श्री सत्यार्थी जी को विश्वास दिलाता हूं कि हमारे विद्यार्थी आपकी संस्था के साथ मिलकर, आपके मार्गदर्शन में देश को स्वर्ग बनाने में अपना सर्वोच्च योगदान देंगे। एचएसएनसी विश्वविद्यालय आपके हर मिशन में हरसंभव साथ रहेगा। एचएसएनसी विश्वविद्यालय बच्चों और दुर्व्यवहार के शिकार लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सभी प्रकार की शोध एवं अन्य गतिविधियों में योगदान देने के लिए आपकी संस्था के साथ हाथ मिलाना चाहता है। डॉ. हीरानंदानी ने आगे कहा कि आज मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि सभागार में बैठने वाला प्रत्येक व्यक्ति श्री सत्यार्थी के मूल्यों और दृष्टिकोण को अपनाएगा और उनके द्वारा उठाए गए इस नेक कार्य में किसी न किसी रूप में योगदान देगा।  आंकड़े बता रहे समर्पण की सफलता : अनिल हरीश HSNC बोर्ड के प्रेसिडेंट श्री अनिल हरीश ने श्री सत्यार्थी जी द्वार किए गये कार्यों एवं उनकी संस्था के प्रयासों को मिली सफलता पर आंकड़ों के माध्यम प्रकाश डाला। श्री हरीश ने कहा कि एक समय पूरे विश्व में 250 मिलियन बाल मजदूर हुआ करते थे, लेकिन हाल ही में आये आंकड़ों के अनुसार अब यह संख्या 100 मिलियन है। इसका श्रेय पूरी तरह से श्री सत्यार्थी जी एवं उनकी टीम को जाता है। लेकिन अभी जो आंकड़ा दिखाई दे रहा है वह इस बात का संकेत है कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में हर किसी का फर्ज बनता है कि वह अपने स्तर पर बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाई. मैं श्री सत्यार्थी जी एवं उनकी संस्था को विश्वास दिलाता हूं कि आपके हर अभियान में हमारी तरफ से हरसंभव सहयोग किया जाएगा.  सत्यार्थी फाउंडेशन के बच्चों को HSNC देगा अवसर: प्रो. बागला HSNC विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमलता बागला ने अपने वक्तव्य की शुरुआत श्री सत्यार्थी जी के कविता से की और श्री सत्यार्थी एवं उनके टीम द्वारा मानव कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। डॉ. बागला ने एक प्रमुख घोषणा करते हुए श्री सत्यार्थी से कहा कि “मैं आपको विश्वास दिलाना चाहती हूँ कि आपके फाउंडेशन के जो भी लड़के –लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें आप HSNC University में भेजिए हमारी तरफ से उनको हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।” इतना ही उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थी आपकी प्रेरणा से एवं आपके पदचिह्नों पर चल कर आदर्श समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही प्रो. बागला ने कहा कि HSNC विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए संकल्पित है। हमें अपने विद्यार्थियों को साथ लेकर उन सभी आयामों तक पहुंचना है, जिसे लोग असंभव करार देते हैं। मैं पूरे विश्वास के साथ कहती हूँ कि आने वाले समय में HSNC विश्वविद्यालय की अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान होगी। फोटो : संलग्न
     बचपन में कहा बदलेंगे संविधान, लोगों ने उड़ाया मजाक
    श्री सत्यार्थी कहा कि उन्होंने अपने बचपन में बच्चों को सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ते हुए देखा कि उनके पास फीस एवं किताबों के लिए पैसा नहीं था, तो उन्होंने पहले गली- गली घूमकर किताबें इकट्ठा की और बुक बैंक की शुरुआत कर इस समस्या का तत्कालीन समाधान निकाला। लेकिन सिर्फ इतने से वे संतुष्ट नहीं थे। श्री सत्यार्थी का मानना था कि बुनियाद शिक्षा से कोई वंचित न रहे इसलिए जरूरी है कि संविधान में परिवर्तन हो। उनकी इस बात का लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन वो दिन भी आया जब एक आम एक व्यक्ति की मांग को देश की संसद में पक्ष एवं विपक्ष दोनों तरफ के सांसदों का समर्थन मिला और देश में ‘शिक्षा के अधिकार को’ संवैधानिक दर्जा मिला।
    बालश्रम के खिलाफ उठाई आवाज, 200 देशों ने माना
    श्री सत्यार्थी ने कहा कि बाल श्रम को रोकने तथा उसकी कोई व्यापक परिभाषा नहीं थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने एक दस्तावेज तैयार किया, जिसे यूएन ने भी स्वीकार और लगभग 200 देशों की सरकारें उसे एक मागदर्शक के रूप में स्वीकार रहीं हैं।
     अराध्य कभी अपवित्र नहीं हो सकती
    अपने वक्तव्य में यौन उत्पीड़न के मामलों का जिक्र करते हुए श्री सत्यार्थी ने कहा कि हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां नारी को देवी माना जाता है। यहां नारी की पूजा की जाती है। हम धन की देवी के रूप में देवी लक्ष्मी, ज्ञान की देवी के रूप में माँ सरस्वती एवं शक्ति की देवी के रूप में माता दुर्गा की आराधना करते हैं। लेकिन वहीं जब भी कोई ऐसा मामला आता है, जब किसी बेटी के साथ कुछ गलत हो जाता है, तो हम उसे ही गलत कहने लगते है, उनके प्रति हमारा व्यवहार बदल जाता है। यह एक बड़ा कारण है, जिससे बहुत यौन अपराधों की शिकार बेटियां सामने नहीं आती है। जरूरत है इस सोच को बदलने की। मेरा मानना है कि ‘अराध्य कभी अपवित्र नहीं हो सकती’। मैं आप सभी साथियों से अनुरोध करूंगा कि आप इस बात को समझाने में हमारी मदद करें। पीड़िता के साथ खड़े हों, उसे सम्मान दें। 
    हो गई है पीर पर्वत सी...
    श्री सत्यार्थी ने अपने वक्तव्य का समापन दुष्यंत कुमार की गजल “हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए” के आह्वान के साथ किया। उपस्थित विद्यार्थियों को उनके सामर्थ्य से अवगत कराते हुए उन्हें सामाजिक परिवर्तन का सूत्रधार एवं संवाहक बनने के लिए प्रेरित किया।
    • हाथ मिलाकर स्वर्ग बनाएंगे: डॉ. हीरानंदानी
    HSNC विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि श्री सत्यार्थी जी सपने को लेकर चल रहे हैं। उसी उद्देश्य “हर बच्चे को मिले शिक्षा” को ध्यान में रखकर हमारे नेतृत्वकर्ताओं HSNC बोर्ड का गठन किया, जो वर्तमान एक विश्वविद्यालय, 17 कालेजों और 9 स्कूलों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वर्तमान में हमारे संस्थानों में 45000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। आज इस अवसर पर मैं श्री सत्यार्थी जी को विश्वास दिलाता हूं कि हमारे विद्यार्थी आपकी संस्था के साथ मिलकर, आपके मार्गदर्शन में देश को स्वर्ग बनाने में अपना सर्वोच्च योगदान देंगे। एचएसएनसी विश्वविद्यालय आपके हर मिशन में हरसंभव साथ रहेगा। एचएसएनसी विश्वविद्यालय बच्चों और दुर्व्यवहार के शिकार लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सभी प्रकार की शोध एवं अन्य गतिविधियों में योगदान देने के लिए आपकी संस्था के साथ हाथ मिलाना चाहता है। डॉ. हीरानंदानी ने आगे कहा कि आज मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि सभागार में बैठने वाला प्रत्येक व्यक्ति श्री सत्यार्थी के मूल्यों और दृष्टिकोण को अपनाएगा और उनके द्वारा उठाए गए इस नेक कार्य में किसी न किसी रूप में योगदान देगा।
    • आंकड़े बता रहे समर्पण की सफलता : अनिल हरीश
    HSNC बोर्ड के प्रेसिडेंट श्री अनिल हरीश ने श्री सत्यार्थी जी द्वार किए गये कार्यों एवं उनकी संस्था के प्रयासों को मिली सफलता पर आंकड़ों के माध्यम प्रकाश डाला। श्री हरीश ने कहा कि एक समय पूरे विश्व में 250 मिलियन बाल मजदूर हुआ करते थे, लेकिन हाल ही में आये आंकड़ों के अनुसार अब यह संख्या 100 मिलियन है। इसका श्रेय पूरी तरह से श्री सत्यार्थी जी एवं उनकी टीम को जाता है। लेकिन अभी जो आंकड़ा दिखाई दे रहा है वह इस बात का संकेत है कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में हर किसी का फर्ज बनता है कि वह अपने स्तर पर बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाई. मैं श्री सत्यार्थी जी एवं उनकी संस्था को विश्वास दिलाता हूं कि आपके हर अभियान में हमारी तरफ से हरसंभव सहयोग किया जाएगा.
    • सत्यार्थी फाउंडेशन के बच्चों को HSNC देगा अवसर: प्रो. बागला
    HSNC विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमलता बागला ने अपने वक्तव्य की शुरुआत श्री सत्यार्थी जी के कविता से की और श्री सत्यार्थी एवं उनके टीम द्वारा मानव कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। डॉ. बागला ने एक प्रमुख घोषणा करते हुए श्री सत्यार्थी से कहा कि “मैं आपको विश्वास दिलाना चाहती हूँ कि आपके फाउंडेशन के जो भी लड़के –लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें आप HSNC University में भेजिए हमारी तरफ से उनको हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।” इतना ही उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थी आपकी प्रेरणा से एवं आपके पदचिह्नों पर चल कर आदर्श समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही प्रो. बागला ने कहा कि HSNC विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए संकल्पित है। हमें अपने विद्यार्थियों को साथ लेकर उन सभी आयामों तक पहुंचना है, जिसे लोग असंभव करार देते हैं। मैं पूरे विश्वास के साथ कहती हूँ कि आने वाले समय में HSNC विश्वविद्यालय की अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान होगी।

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