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    आओ ताली बजाएं| #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    • ताली बजाने के उद्धत फायदे हैं - ताली मानवीय ऊर्जा और स्पंदन को उठाती है 
    • ताली बजाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है शायद ऋषि-मुनियों को पता था कि लोगों के पास व्यायाम का समय भी नहीं बचेगा - एड किशन भावनानी 
    गोंदिया- भारत के हजारों वर्षों के इतिहास का अगर हम अध्ययन करें तो हमें हर सामायिक अंतर में हमें अनमोल गाथाएं महसूस करने को मिलेगी, कि क्यों भारत को सोने की चिड़िया का दर्जा दिया जाता था, क्यों हजारों हमारे पूर्वजों, बड़े बुजुर्गों की अनमोल संस्कृति सभ्यता वैश्विक स्तरपर सटीक लुभावने, आकर्षित करने वाली हैं जिसपर बुरी नजरें अंग्रेजों की पड़ी और इस सोने की चिड़िया को गुलाम बनाकर अनमोल संसाधनों का दोहन किया। वैसे तो गाथाओं का कोई अंत नहीं परंतु आज हम भारत की ताली गाथा पर चर्चा इस आर्टिकल के माध्यम से करेंगे जिसके उद्धत फायदे हैं, मानवीय ऊर्जा और स्पंदन को उठाती है। जो परंपरा पुरातन काल से ही चली आ रही है शायद ऋषि-मुनियों को पता था कि लोगों के पास व्यायाम का भी समय नहीं बचेगा इसलिए ताली संस्कृति शुरू की आओ ताली बजाएं!! 
    साथियों बात अगर हम ताली को परिभाषित करने की करें तो, ताली उस ध्वनि को कहते हैं जो दो सपाट सतहों के आपस में टकराने से उत्पन्न होती है, जैसे मनुष्यों या जानवरों के अंगों में, मनुष्य अपने हाथ की हथेलियों द्वारा ताली बजाते हैं, प्रायः प्रशंसा या अनुमोदन (देखें सराहना) की अभिव्यक्ति में निरंतर घनघनाहट साथ, लेकिन कभी-कभी ताली लय के साथ भी बजायी जाती है जिससे कि वह संगीत और नृत्य के स्वरों से मेल करे। सील उन कुछ जंतुओं में से हैं जो ताली बजा सकते हैं। 
    साथियों बात अगर हम ताली बजाने के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की करें तो,  ताली बजाना एक व्यायाम ही है, ताली बजाने से हमारे शरीर में खिंचवा होता है, शरीर की मांसपेशियां एक्टिव हो जाती है। जोर – जारे से ताली बजाने से कुछ ही देर में एहसास होगा कि आपको पसीना आना शुरू हो गया और पूरे शरीर में एक उत्तेजना पैदा हो गई है। बस यही है व्यायाम। हमारी हथेलियों में शरीर के अन्य अंगों की नसों के बिंदु होते हैं, जिन्हें एक्यूप्रेशर बिन्दु कहते हैं। ताली बजाने से इन बिंदुओं पर जोर पड़ता है और संबंधित अंगों में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे वे बेहतर काम करने लगते हैं। एक्युप्रेशर पद्धति में ताली बजाना सबसे ज्यादा लाभदायक माना गया है। ताली बजाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है। आज मानवीय जीव पास है व्यायामका भी समय नहीं है इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मंदिरों में ताली बजाने की परंपरा शुरू की ताकि कुछ देर ही सही पर हम व्यायाम कर सकें। 
    साथियों बात अगर हम ताली बजाने को निराशा से उबारने की थेरेपी की करें तो, यह निराशा की स्थिति से उबरने के लिएअसरदार थेरेपी है। कोई व्यक्ति पाचन की समस्या से गुजर रहा हो तो उसे क्लैपिंग थेरेपी अपनानी चाहिए। हृदय और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं, अस्थमा के इलाज में यह थेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह गर्दन के दर्द से लेकर पीठ और जोड़ों के दर्द में भी आराम पहुंचाती है। बच्चे अगर इस थेरेपी को अपनाएं तो इससे उनकी काम करने की क्षमता और बौद्धिक विकास होता है। इससे दिमाग तेज होने में मदद मिलती है। 
    साथियों बात अगर हम ताली बजाने के मौकों की करें तो, खुशी का मौका का हो, किसी की तारीफ करनी हो, कोई जीत का विषय हो या किसी को प्रोत्साहन देना हो, इसके लिए लोग ताली बजाते हैं। ताली बजाना भले ही खुशी जाहिर करने का एक तरीका हो, लेकिन यह तरीका सेहत के लिए भी बड़े काम का है। रोजाना कुछ मिनट के लिए ताली बजाने से कई तरह से स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद मिलती है। इसे क्लैपिंग थैरेपी भी कह सकते हैं। यह थैरेपी हजारों सालों से चलती आ रही है। भारत में भजन, कीर्तन, मंत्रोपचार और आरती के समय ताली बजाने की प्रथा है। इससे मिलने वाले शारीरिक लाभ भी कम नहीं हैं। इसका वैज्ञानिक कारण भी है, क्योंकि विज्ञान के मुताबिक मानव शरीर के हाथों में 29 दबाव केन्द्र यानी एक्युप्रेशर पॉइन्ट्स होते हैं।
    साथियों बात अगर हम ताली बजाने के प्रेशर प्वाइंट रूपी फायदों की करें तो, (1) ताली बजाने से दिल और फेफड़ों से जुड़ी हुई अस्थमा जैसी समस्याओं में मदद मिलती है (2)पीठ, गर्दन और जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है।(3)ताली बजाकर गठिया रोग से भी बचा जा सकता है।(4)लो ब्लड प्रेशर के मरीज़ भी इस थेरेपी की मदद ले सकते हैं।(5)पाचनतंत्र की समस्याओं में भी क्लैपिंग थेरेपी का इस्तेमाल फायदेमंद साबित होता है। इस तेल से वेट लॉस में होगा फायदा!(6)क्लैपिंग थेरेपी से बच्चों की कार्यक्षमता का विकास होता है और उन्हें पढ़ाई में भी सुधार होता है । जो बच्चे रोज़ाना ताली बजाते हैं उन्हें लिखने में भी कम परेशानी होती है और उनसे स्पेलिंग से जुड़ी ग़लतियां भी कम होती हैं। (7)ताली बजाने से बच्चों का दिमाग तेज़ होता है। (8)शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बीमारियों से बचने के लिए भी क्लैपिंग करनी चाहिए।(9) रोज़ाना आधे घंटे ताली बजाने से मधुमेह, गठिया उच्च रक्तचाप,डिप्रेशन, पुराने सिरदर्द, जुकाम, अनिद्रा, बालों का झड़ना  और आंख की समस्याओं से पीड़ित लोगों को मदद मिलती है। (10)घर और ऑफिस में हमेशा एयर कंडीशन में रहने वाले लोग जिन्हें बिल्कुल पसीना नहीं निकलता उन्हें क्लैपिंग थेरेपी का अभ्यास करना चाहिए। क्योंकि यह शरीर में रक्त के प्रवाह को सुचारु बनाकर उसे पूरी तरह से शुद्ध करता है। 
    साथियों बात अगर हम ताली बजाने के अन्य गाथाओं की करें तो, संगीत के विद्यार्थी भिन्न-भिन्न स्वरों के महत्व को समझने में सहायता के लिए और नयी रचनाओं की लय से सामंजस्य बैठाने के लिए प्रायः लिखी हुई धुन की लय को ताली द्वारा बजाते हैं। 60 सेकेण्ड में सबसे अधिक तालियां बजाने का विश्व रिकॉर्ड, 806 तालियों का है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के टिम ऐह्लस्ट्रौम के पास है। पूरी तरह ताली द्वारा निष्पादित शास्त्रीय कृतियां, शास्त्रीय कृतियां जिनमें ताली बजाना शामिल है। कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए जनता कर्फ्यू के दिन शाम को ठीक 5 बजे लोगों ने घरों से निकलकर ताली बजाकर जनता की सेवा में लगे लोगों का अभिनंदन किया, जैसे ही घड़ी की सूई ने 5 बजने का इशारा किया, लोग अपने घरों की छतों, बालकनी खिड़की और छज्जों पर जमा होकर ताली बजाने लगे। पीएम की अपील पर देशवासियों की एकजुटता देखकर उन्होंने सभी लोगों को धन्यवाद भी दिया है। 
    साथियों बात अगर हम ताली द्वारा सकारात्मकता माहौल लाने की करें तो, कई संस्कृतियों में, ताली बजाना उत्सव, पावती, प्रशंसा, प्रोत्साहन और मान्यता के लिए एक प्रतीक और इशारा माना जाता है। पूजा के समय भी, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो भगवान के भजन गाने का अभ्यास करते हैं, और इसके साथ हाथों से ताली भी बजाते हैं। इससे एक सकारात्मक वातावरण बन जाता है जो किसी की ऊर्जा और स्पंदन को ऊपर उठाती है। चाहे खेल खेलने की बात हो या प्रदर्शन देखने की, ताली का इस्तेमाल सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाने के लिए किया जाता है। 
    अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ ताली बजाएं ताली बजाने के उद्धत फायदे हैं। ताली मानवीय ऊर्जा और स्पंदन को उठाती है। ताली बजाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है शायद ऋषि-मुनियों को यह पता था कि लोगों के पास व्यायाम का समय नहीं बचेगा!! 

    -संकलनकर्ता लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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