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    अमेरिका में 18वें ओपन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में नीरज चोपड़ा के साथ जौनपुर के बेटे रोहित यादव का हुआ चयन | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    जौनपुर। रुकावटें आती है सफलता की राहों में, ये कौन नहीं जानता, फिर भी वह मंज़िल पा ही लेता है, जो हार नहीं मानता.... यह पंक्तियां जैवलिन प्लेयर रोहित यादव पर बिल्कुल सटीक बैठती है। यह भारत के दूसरे नीरज चोपड़ा है। ओलम्पिक चैम्पियन नीरज चोपड़ा को आज पूरी दुनिया जानती है। उनके साथ ही हमारे जौनपुर के लाल ने कड़ी मेहनत करते हुए आज उस मुकाम पर पहुंच गया जहां पहुंचने के लिए उसने रुकावटों की दीवार को गिरा दिया है। बस कुछ कदम दूरी पर ही मंजिल खुद आकर उसे गले लगा लेगी। जौनपुर के बेटे रोहित यादव का चयन 18वें ओपन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में नीरज चौपड़ा के साथ हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत की तरफ से रोहित यादव और नीरज चोपड़ा का ही चयन हुआ है। रोहित का चयन होने पर उनके घर पर खुशियों का माहौल है।
    कुछ पाने की कोशिश में, कदम लड़खड़ाए तो संभल जाना, लेकिन चाहे कुछ भी हो, तुम हार मत मानना.... मछलीशहर विधानसभा के डभियां गांव के रहने वाले रोहित की कहानी भी कुश्ती में गोल्ड मेडल लाने वाली महावीर सिंह फोगाट की बेटी गीता-बबिता की तरह ही संघर्षों से भरी पड़ी है। रोहित के पिता सभाजीत यादव को शुरू से ही खेल-कूद पसंद था। 
    सभाजीत खुद मैराथन में हिस्सा लिया करते थे और कई मेडल जीते। खेल के प्रति लगाव और संसाधनों के अभाव के कारण देश के लिए मेडल लाने का सपना सभाजीत पूरा नहीं कर सके तो उन्होंने अपने बेटों को इसकी ट्रेनिंग देना शुरू किया। बड़े बेटे राहुल और रोहित को महज 8 साल की उम्र से सभाजीत ट्रेनिंग देने लगे। बेटों को जैवलिन प्लेयर बनाने के लिए उन्होंने बांस काट कर फेंकना शुरू करा दिया।
    गांव में घर के सामने ही दोनों बेटे सुबह शाम अभ्यास करने लगे। सुबह-सुबह ही सभाजीत दोनों बेटों को जगा देते थे। उठाने का बाद शुरू हो जाती थी कड़ी मेहनत। बेटों को कहीं आने-जाने की भी इजाजत नहीं रहती थी। बच्चों के खाने-पीने का ध्यान भी पिता सभाजीत देते थे। सभाजीत के घर तक आने जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। पगडण्डी के सहारे उनके घर तक पहुँचा जाता है। सभाजीत बताते हैं कि आज उनका 21 वर्षीय बेटा रोहित अमेरिका में खेलने गया है। इस बात से उन्हें काफी खुशी है, उन्हें पूरा भरोसा है कि बेटा देश के खेलेगा और मेडल लाएगा। अब वो अपने तीसरे और सबसे छोटे बेटे रोहन को भी इसी तरह ट्रेनिंग दे रहे हैं।

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    *राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद जौनपुर के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार श्रीवास्तव की तरफ से नया सबेरा परिवार को छठवीं वर्षगांठ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं | Naya Sabera Network*
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    *इंटेलेक्चुअल पब्लिक स्कूल बोदकरपुर (सुक्खीपुर) जौनपुर एवं डी.डी. मेट्रो न्यू दिल्ली के पूर्व संवाददाता आरिफ अंसारी की तरफ से नया सबेरा परिवार को छठवीं वर्षगांठ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं | Naya Sabera Network*
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